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राज्यसभा में उठा उपभोक्ता आयोगों के खाली पदों का मुद्दा

राज्यसभा में कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने उपभोक्ता आयोगों में खाली पदों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि देशभर में लाखों मामले लंबित हैं और आयोगों में अध्यक्ष व सदस्यों की कमी से सुनवाई प्रभावित हो रही है। सरकार से पूछा गया कि इन पदों को भरने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

राज्यसभा में विवेक तन्खा ने उठाया उपभोक्ता आयोगों के खाली पदों का मुद्दा, लंबित मामलों और धीमी न्याय प्रक्रिया पर सरकार से मांगा जवाब

प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

• राज्यसभा में उपभोक्ता आयोगों के खाली पदों का मुद्दा उठा।

• सांसद विवेक तन्खा ने प्रश्नकाल में सरकार से जवाब मांगा।

• देशभर में आयोगों में कई पद अभी भी खाली हैं।

• इन खाली पदों से लाखों मामलों की सुनवाई अटकी है।

• सांसदों ने कहा कि इससे आम उपभोक्ता परेशान हो रहा है।

राज्यसभा में क्यों गूंजा उपभोक्ता आयोगों के खाली पदों का मुद्दा

संसद के हालिया सत्र में एक अहम सवाल उठा।यह सवाल सीधे आम लोगों से जुड़ा है।राज्यसभा में सांसद विवेक तन्खा ने यह मुद्दा उठाया।उन्होंने कहा कि समस्या अब गंभीर बन चुकी है।देशभर के उपभोक्ता आयोगों में कई पद खाली पड़े हैं।इन पदों के खाली रहने से काम धीमा हो गया है।तन्खा ने कहा कि इससे न्याय मिलने में देरी हो रही है।आम उपभोक्ता लंबे समय तक इंतजार करता है।

खाली पदों से कैसे बढ़ रहा है लंबित मामलों का बोझ

उपभोक्ता आयोग आम नागरिकों के लिए राहत का मंच हैं।यह मंच सामान और सेवा से जुड़े विवाद सुनता है।लेकिन कई आयोगों में पर्याप्त सदस्य नहीं हैं।कई जगह अध्यक्ष के पद भी खाली पड़े हैं।इस कारण सुनवाई की गति धीमी हो जाती है।मामलों की तारीखें बार बार आगे बढ़ती हैं।देशभर में लाखों मामले लंबित बताए जाते हैं।यह संख्या हर साल बढ़ती जा रही है।

संसद में सरकार से क्या जवाब मांगा गया

प्रश्नकाल के दौरान तन्खा ने सरकार से सवाल किया।उन्होंने पूछा कि इतनी बड़ी संख्या में पद क्यों खाली हैं।उन्होंने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया तेज होनी चाहिए।वरना आयोगों की व्यवस्था कमजोर हो जाएगी।उन्होंने यह भी पूछा कि सरकार की योजना क्या है।कब तक इन पदों को भरने की प्रक्रिया पूरी होगी।

सदन में चर्चा के दौरान क्या माहौल रहा

इस मुद्दे पर सदन में गंभीर चर्चा हुई।सभापति की मौजूदगी में सवाल आगे बढ़ा।कई सांसदों ने भी चिंता जताई।उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल प्रशासनिक नहीं है।यह सीधे जनता के अधिकार से जुड़ी है।इसलिए समाधान जल्दी जरूरी है।

उपभोक्ता आयोग क्यों जरूरी माने जाते हैं

उपभोक्ता आयोग लोगों को आसान न्याय देते हैं।यह मंच अदालत से ज्यादा सरल माना जाता है।यहां कम खर्च में शिकायत दर्ज होती है।और कई मामलों का जल्दी समाधान हो सकता है।लेकिन जब पद खाली रहते हैं तो व्यवस्था प्रभावित होती है।कई मामलों की सुनवाई लंबे समय तक अटक जाती है।

वीडियो में दिखा संसद का पूरा घटनाक्रम

इस मुद्दे से जुड़ा वीडियो भी सामने आया।यह वीडियो संसद टीवी पर प्रसारित हुआ।वीडियो में सांसद तन्खा सवाल पूछते दिखे।उन्होंने सरकार का ध्यान इस समस्या पर खींचा।अब सभी की नजर सरकार के फैसले पर है।देखना होगा कि नियुक्तियां कब तक होती हैं।

Chakreshhar Singh Surya
Chakreshhar Singh Suryahttps://www.prathmikmedia.com
चक्रेशहार सिंह सूर्या…! इतना लम्बा नाम!! अक्सर लोगों से ये प्रतिक्रया मिलती है। हालाँकि इन्टरनेट में ढूँढने पर भी ऐसे नाम का और कोई कॉम्बिनेशन नहीं मिलता। आर्ट्स से स्नातक करने के बाद पत्रकारिता से शुरुआत की उसके बाद 93.5 रेड एफ़एम में रेडियो जॉकी, 94.3 माय एफएम में कॉपीराइटर, टीवी और फिल्म्स में असिस्टेंट डायरेक्टर और डायलॉग राइटर के तौर पर काम किया। अब अलग-अलग माध्यमों के लिए फीचर फ़िल्म्स, ऑडियो-विज़ुअल एड, डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिल्म्स डायरेक्शन, स्टोरी, स्क्रिप्ट् राइटिंग, वॉईस ओवर का काम करते हैं। इन्हें लीक से हटकर काम और खबरें करना पसंद हैं। वर्तमान में प्राथमिक मीडिया साप्ताहिक हिन्दी समाचार पत्र और न्यूज़ पोर्टल के संपादक हैं। इनकी फोटो बेशक पुरानी है लेकिन आज भी इतने ही खुशमिज़ाज।
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