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46 करोड़ के टैक्स बकायादारों की सूची निगम ने की सार्वजनिक

बड़े-बड़े सरकारी संस्थानों के नाम हैं शामिल

जबलपुर नगर निगम ने 46 करोड़ रुपये का टैक्स न चुकाने वाले 25 बड़े बकायेदारों की सूची जारी की है। इसमें रेलवे और BSNL जैसे बड़े नाम शामिल हैं। 14 मार्च की लोक अदालत भुगतान का आखिरी मौका है, इसके बाद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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जबलपुर नगर निगम ने किन बड़े बकायेदारों की लिस्ट जारी की है?

जबलपुर के विकास को रफ्तार देने के लिए नगर निगम अब सख्त हो गया है। निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने शहर के 25 बड़े बकायेदारों के नाम सार्वजनिक कर दिए हैं। इन संस्थानों पर करीब 46 करोड़ रुपये का टैक्स बकाया है। निगम ने साफ किया है कि अब ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस सूची में सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के बड़े नाम शामिल हैं। सबसे ज्यादा बकाया भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) पर है। BSNL को नगर निगम को 13.19 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान करना है।

रेलवे और विकास प्राधिकरण पर कितना टैक्स बकाया है?

सरकारी विभागों में रेलवे और जबलपुर विकास प्राधिकरण (JDA) भी पीछे नहीं हैं। JDA की अलग-अलग योजनाओं पर करीब 6.81 करोड़ रुपये का टैक्स बकाया है। वहीं, पश्चिम मध्य रेलवे के विभिन्न दफ्तरों और कॉलोनियों पर करोड़ों रुपये बाकी हैं। रेलवे के अलग-अलग वार्डों का कुल बकाया काफी अधिक है।

रेलवे प्रशासन को मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय और आवासीय कॉलोनियों का टैक्स भरना है। इसके अलावा, गोल बाजार स्थित शहीद स्मारक ट्रस्ट पर भी 2.18 करोड़ बकाया हैं। निगम का कहना है कि बार-बार नोटिस देने के बाद भी पैसा नहीं मिला। इसलिए अब नाम उजागर करने का फैसला लिया गया है।

किन प्राइवेट फैक्ट्रियों और कंपनियों के नाम लिस्ट में हैं?

निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों पर भी निगम की गाज गिरी है। अधारताल की कारबोरेन्डम यूनिवर्सल लिमिटेड पर 1.35 करोड़ रुपये का टैक्स बाकी है। रिछाई औद्योगिक क्षेत्र की ओ.के. फूड्स पर भी 1.11 करोड़ का बकाया है। उदयपुर ब्रेवरेज और प्रेस्टीज कंक्रीट जैसी कंपनियां भी इस लिस्ट में शामिल हैं।

कृषि उपज मंडी और कई तेल मिलों ने भी लंबे समय से टैक्स नहीं दिया है। बालाजी एडिबल्स और जबलपुर स्टील जैसी कंपनियों से लाखों की वसूली होनी है। निगम ने इन सभी को चेतावनी दी है कि वे तुरंत भुगतान करें।

लोक अदालत में टैक्स भरने पर क्या छूट मिलेगी?

बकायेदारों के पास अपना हिसाब बराबर करने का एक आखिरी मौका है। 14 मार्च 2026 को शहर में नेशनल लोक अदालत का आयोजन होगा। निगमायुक्त ने कहा है कि बकायेदार इस दिन आकर समझौता कर सकते हैं। लोक अदालत में टैक्स के अधिभार (सरचार्ज) पर नियमानुसार छूट भी मिल सकती है। यह मौका उन लोगों के लिए है जो कानूनी कार्रवाई से बचना चाहते हैं। लोक अदालत में मामले को आसानी से सुलझाया जा सकता है। अगर इस दिन भी बकाया जमा नहीं हुआ, तो कार्रवाई तय है। निगम प्रशासन ने इसके लिए पूरी कानूनी तैयारी कर ली है।

टैक्स न चुकाने पर नगर निगम क्या कानूनी कार्रवाई करेगा?

अगर 14 मार्च तक बकाया जमा नहीं हुआ, तो निगम कड़े कदम उठाएगा। हालांकि नगर निगम ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में यह साफ नहीं किया है कि क्या अन्य बकायादारों के तहत इन संपत्तियों पर भी तालाबंदी या कुर्की की कार्यवाही की जाएगी या नहीं।

देखिए बकायादारों की पूरी सूची

क्रमबकायेदार का नाम और विवरणबकाया राशि (रुपये में)
1भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL), जबलपुर निर्माणी13,19,46,691
2CEO, जबलपुर विकास प्राधिकरण (JDA), स्कीम नं. 644,39,78,898
3DRM, पश्चिम मध्य रेल (व्यवसायिक भवन, प्लेटफार्म नं. 6)3,86,21,037
4CEO, जबलपुर विकास प्राधिकरण (JDA), स्कीम नं. 652,42,09,880
5DRM, पश्चिम मध्य रेल (बजरंग आवासीय कॉलोनी)2,27,44,687
6महाकौशल शहीद स्मारक भवन ट्रस्ट, गोल बाजार2,18,30,451
7DRM, पश्चिम मध्य रेल (गोकुलदास धर्मशाला)2,17,60,612
8भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL), CTO कम्पाउंड1,68,79,849
9सेंट्रल रेलवे माल गोदाम, कछपुरा1,55,24,317
10कारबोरेन्डम यूनिवर्सल लि. (सीमेंट फैक्ट्री), अधारताल1,35,73,281
11ओ.के. फूड्स प्रा. लि. (राजेश गुप्ता), रिछाई1,11,06,337
12सचिव, कृषि उपज मंडी, जयप्रकाश नारायण वार्ड1,07,82,503
13उदयपुर ब्रेवरेज प्रा. लि. (विकास मित्तल), रिछाई1,05,93,048
14भारत दूरसंचार निगम (अभियंता यातायात थाने के पास)1,03,05,834
15प्रीस्टेज कंक्रीट औद्योगिक पोल फैक्ट्री, अधारताल1,02,72,633
16DRM, पश्चिम मध्य रेल, हाउबाग79,63,746
17मण्डल रेल प्रबंधक, मदन महल स्टेशन68,81,915
18DRM, पश्चिम मध्य रेल (वार्ड नं. 12)62,21,177
19प्रताप चंद पिता फकीर चंद आनंद, पं. दीनदयाल उपाध्याय वार्ड61,93,933
20बालाजी एडिबल्स प्रा. लि. (रामगोपाल अग्रवाल), रिछाई56,48,379
21अधारताल मैदा मिल (पी. पी. बंसल), अधारताल56,20,707
22DRM, पश्चिम मध्य रेल (प्रकाश आवासीय कॉलोनी)55,75,505
23जबलपुर स्टील प्रा. लि. (अजय खंडेलवाल), अधारताल52,38,156
24BSNL आवासीय परिसर, विकास नगर52,18,683
25कमर्शियल इंजी. एण्ड बॉडी बिल्डर्स प्रा. लि., रिछाई50,36,732

कॉलेज पहुंचे फिर भी एब्सेंट, छात्रों ने कैमरों के सामने खोला मोर्चा

शहर के एक कॉलेज में अटेंडेंस को लेकर बड़ा विवाद सामने आया। छात्रों का आरोप है कि वे रोज कॉलेज पहुंचे, फिर भी रजिस्टर में एब्सेंट लगा दिया गया। कम अटेंडेंस के कारण परीक्षा का डर बढ़ गया। नाराज छात्रों ने मीडिया के सामने विरोध दर्ज कराया और प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की।

कॉलेज अटेंडेंस विवाद, रोज आने वाले छात्रों को एब्सेंट दिखाया, छात्रों का विरोध

प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

• शहर के एक कॉलेज में अटेंडेंस को लेकर विवाद शुरू हुआ।

• छात्रों का कहना है कि वे रोज कॉलेज पहुंचे।

• फिर भी रजिस्टर में उन्हें एब्सेंट दिखाया गया।

• कम अटेंडेंस से परीक्षा को लेकर चिंता बढ़ी।

• नाराज छात्रों ने मीडिया के सामने विरोध जताया।

कॉलेज गेट पर फूटा छात्रों का गुस्सा

शहर के एक कॉलेज में अचानक माहौल गर्म हो गया।कई छात्र अपनी शिकायत लेकर सामने आए।कॉलेज गेट के बाहर छात्रों ने मीडिया से खुलकर बात की।उन्होंने कहा कि उनकी समस्या लंबे समय से चल रही है।छात्रों के चेहरे पर नाराजगी साफ दिख रही थी।उनका कहना है कि अब चुप रहना संभव नहीं था।

रोज कॉलेज आने के बाद भी लगा दिया एब्सेंट

छात्रों ने सबसे बड़ा आरोप अटेंडेंस पर लगाया।उनका कहना है कि वे रोज कॉलेज पहुंचते हैं।कई छात्र नियमित रूप से कक्षाओं में मौजूद रहते हैं।लेकिन उपस्थिति रजिस्टर कुछ और ही कहानी दिखा रहा है।रजिस्टर में कई छात्रों को एब्सेंट दर्ज कर दिया गया।इससे उनकी कुल अटेंडेंस अचानक कम हो गई।छात्रों ने कहा कि यह समझ से परे है।अगर वे कॉलेज में थे तो एब्सेंट कैसे लग गया।

अटेंडेंस कम होने से बढ़ी परीक्षा की चिंता

कॉलेज में परीक्षा के लिए तय अटेंडेंस जरूरी होती है।कम उपस्थिति होने पर परीक्षा में परेशानी होती है।छात्रों का कहना है कि यही डर उन्हें परेशान कर रहा है।अगर रिकॉर्ड नहीं सुधरा तो नुकसान हो सकता है।कई छात्रों को अपनी पढ़ाई की चिंता है।वे नहीं चाहते कि एक गलती से भविष्य प्रभावित हो।

कई बार शिकायत के बाद भी नहीं मिला हल

छात्रों ने बताया कि यह समस्या नई नहीं है।उन्होंने पहले भी प्रशासन को जानकारी दी थी।कई बार कॉलेज अधिकारियों से बात की गई।लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं मिला।छात्रों का आरोप है कि शिकायतों को गंभीरता नहीं मिली।यही वजह है कि मामला अब खुलकर सामने आया।

छात्रों की चेतावनी, समस्या नहीं सुलझी तो आंदोलन

नाराज छात्रों ने प्रशासन को चेतावनी दी है।उन्होंने कहा कि अटेंडेंस रिकॉर्ड तुरंत सुधारा जाए।अगर ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन होगा।छात्र बड़े स्तर पर विरोध करने की बात कह रहे हैं।उन्होंने साफ कहा कि वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे।जरूरत पड़ी तो मामला उच्च अधिकारियों तक जाएगा।

प्रशासन ने कहा, शिकायत की होगी जांच

मामले पर कॉलेज प्रशासन ने भी प्रतिक्रिया दी।अधिकारियों ने कहा कि शिकायत मिली है।प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की जांच होगी।अटेंडेंस रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।अगर गलती मिली तो उसे सुधारा जाएगा।प्रशासन ने छात्रों को भरोसा देने की कोशिश की।

अब सभी की नजर प्रशासन के फैसले पर

फिलहाल कॉलेज में माहौल तनाव भरा है।छात्र समाधान का इंतजार कर रहे हैं।सबकी नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर है।देखना होगा कि अटेंडेंस विवाद कैसे सुलझता है।अगर समाधान जल्दी नहीं मिला तो विरोध बढ़ सकता है।

जबलपुर में आंगनवाड़ी राशन घोटाला, डॉक्टर के घर 140 बैग जब्त

जबलपुर में आंगनवाड़ी पोषाहार की कालाबाजारी का बड़ा खुलासा हुआ है। प्रशासनिक टीम ने घमापुर क्षेत्र में एक डॉक्टर के घर छापा मारा। यहां से 140 बैग टेक होम राशन बरामद हुआ। यह राशन बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए था। अब प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है।

जबलपुर में आंगनवाड़ी राशन घोटाले का खुलासा, डॉक्टर के घर से 140 बैग टेक होम राशन जब्त, प्रशासन जांच में जुटा

प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

• जबलपुर में आंगनवाड़ी पोषाहार की कालाबाजारी का मामला सामने आया।

• प्रशासन को गुप्त सूचना मिली कि राशन निजी घर में छिपाया गया।

• टीम ने घमापुर इलाके के एक घर पर छापा मारा।

• घर के अंदर 140 बैग टेक होम राशन बरामद हुआ।

• अब प्रशासन पूरे नेटवर्क और जिम्मेदार लोगों की जांच कर रहा है।

जबलपुर में आंगनवाड़ी पोषाहार की कालाबाजारी का बड़ा खुलासा

जबलपुर में आंगनवाड़ी पोषाहार से जुड़ा बड़ा मामला सामने आया है।यह राशन बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए भेजा जाता है। प्रशासन ने छापा मारकर भारी मात्रा में सरकारी राशन जब्त किया। यह कार्रवाई कलेक्टर के निर्देश पर की गई। जांच में सामने आया कि राशन निजी घर में छिपाकर रखा गया था।इस घटना से पूरे सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं।

गुप्त सूचना के बाद प्रशासन ने बनाई संयुक्त टीम

कलेक्टर कार्यालय को पहले एक गुप्त सूचना मिली थी।सूचना में राशन के अवैध भंडारण की बात कही गई थी।सूचना को गंभीर मानते हुए तुरंत टीम बनाई गई। टीम में तहसीलदार और पुलिस अधिकारी शामिल थे। इसके बाद बताए गए पते पर छापेमारी की तैयारी हुई। प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की।

घमापुर इलाके के घर में छिपा मिला सरकारी राशन

यह कार्रवाई घमापुर थाना क्षेत्र में की गई। टीम सरकारी कुआं मरघटाई के पास एक मकान पहुंची। यह मकान डॉक्टर यादव का बताया जा रहा है। जब टीम पहुंची तब मकान का दरवाजा बंद था।अधिकारियों ने पंचनामा तैयार किया।इसके बाद ताला तुड़वाकर घर के अंदर प्रवेश किया गया। घर के अंदर का दृश्य देखकर अधिकारी हैरान रह गए। कमरों में टेक होम राशन के कई बैग रखे मिले।गिनती करने पर कुल 140 बैग बरामद हुए।

बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए था यह राशन

यह टेक होम राशन आंगनवाड़ी केंद्रों में भेजा जाता है। इसका उद्देश्य बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पोषण देना है।सरकार इस योजना पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है।लेकिन कई बार इसमें गड़बड़ी के मामले सामने आते हैं। इस घटना के बाद लोगों में नाराजगी भी देखी गई। लोगों का कहना है कि गरीबों का हक छीना गया।

अधिकारी बोले, ट्रांसपोर्टर की भूमिका की जांच होगी

मौके पर मौजूद जांच अधिकारी ने जानकारी दी।उन्होंने कहा कि सूचना कलेक्टर कार्यालय से मिली थी।टीम ने पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई की।घर से 140 बैग राशन बरामद किया गया।प्राथमिक जांच में ट्रांसपोर्टर की भूमिका सामने आ रही है। संभावना है कि राशन उसी के जरिए यहां पहुंचा। अब पूरी सप्लाई चेन की जांच की जा रही है।

जांच के बाद दर्ज होगी FIR और होगी सख्त कार्रवाई

प्रशासन अब इस मामले की गहराई से जांच कर रहा है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि राशन यहां कैसे पहुंचा।क्या इसमें विभाग के कर्मचारी शामिल हैं। क्या ट्रांसपोर्टर या अन्य लोग इसमें जुड़े हैं। अधिकारियों ने साफ कहा कि दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा। जांच पूरी होने के बाद एफआईआर दर्ज होगी। जरूरत पड़ी तो और लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है। इस कार्रवाई के बाद पूरे जिले में आंगनवाड़ी राशन की निगरानी बढ़ सकती है।

राज्यसभा में उठा उपभोक्ता आयोगों के खाली पदों का मुद्दा

राज्यसभा में कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने उपभोक्ता आयोगों में खाली पदों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि देशभर में लाखों मामले लंबित हैं और आयोगों में अध्यक्ष व सदस्यों की कमी से सुनवाई प्रभावित हो रही है। सरकार से पूछा गया कि इन पदों को भरने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

राज्यसभा में विवेक तन्खा ने उठाया उपभोक्ता आयोगों के खाली पदों का मुद्दा, लंबित मामलों और धीमी न्याय प्रक्रिया पर सरकार से मांगा जवाब

प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

• राज्यसभा में उपभोक्ता आयोगों के खाली पदों का मुद्दा उठा।

• सांसद विवेक तन्खा ने प्रश्नकाल में सरकार से जवाब मांगा।

• देशभर में आयोगों में कई पद अभी भी खाली हैं।

• इन खाली पदों से लाखों मामलों की सुनवाई अटकी है।

• सांसदों ने कहा कि इससे आम उपभोक्ता परेशान हो रहा है।

राज्यसभा में क्यों गूंजा उपभोक्ता आयोगों के खाली पदों का मुद्दा

संसद के हालिया सत्र में एक अहम सवाल उठा।यह सवाल सीधे आम लोगों से जुड़ा है।राज्यसभा में सांसद विवेक तन्खा ने यह मुद्दा उठाया।उन्होंने कहा कि समस्या अब गंभीर बन चुकी है।देशभर के उपभोक्ता आयोगों में कई पद खाली पड़े हैं।इन पदों के खाली रहने से काम धीमा हो गया है।तन्खा ने कहा कि इससे न्याय मिलने में देरी हो रही है।आम उपभोक्ता लंबे समय तक इंतजार करता है।

खाली पदों से कैसे बढ़ रहा है लंबित मामलों का बोझ

उपभोक्ता आयोग आम नागरिकों के लिए राहत का मंच हैं।यह मंच सामान और सेवा से जुड़े विवाद सुनता है।लेकिन कई आयोगों में पर्याप्त सदस्य नहीं हैं।कई जगह अध्यक्ष के पद भी खाली पड़े हैं।इस कारण सुनवाई की गति धीमी हो जाती है।मामलों की तारीखें बार बार आगे बढ़ती हैं।देशभर में लाखों मामले लंबित बताए जाते हैं।यह संख्या हर साल बढ़ती जा रही है।

संसद में सरकार से क्या जवाब मांगा गया

प्रश्नकाल के दौरान तन्खा ने सरकार से सवाल किया।उन्होंने पूछा कि इतनी बड़ी संख्या में पद क्यों खाली हैं।उन्होंने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया तेज होनी चाहिए।वरना आयोगों की व्यवस्था कमजोर हो जाएगी।उन्होंने यह भी पूछा कि सरकार की योजना क्या है।कब तक इन पदों को भरने की प्रक्रिया पूरी होगी।

सदन में चर्चा के दौरान क्या माहौल रहा

इस मुद्दे पर सदन में गंभीर चर्चा हुई।सभापति की मौजूदगी में सवाल आगे बढ़ा।कई सांसदों ने भी चिंता जताई।उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल प्रशासनिक नहीं है।यह सीधे जनता के अधिकार से जुड़ी है।इसलिए समाधान जल्दी जरूरी है।

उपभोक्ता आयोग क्यों जरूरी माने जाते हैं

उपभोक्ता आयोग लोगों को आसान न्याय देते हैं।यह मंच अदालत से ज्यादा सरल माना जाता है।यहां कम खर्च में शिकायत दर्ज होती है।और कई मामलों का जल्दी समाधान हो सकता है।लेकिन जब पद खाली रहते हैं तो व्यवस्था प्रभावित होती है।कई मामलों की सुनवाई लंबे समय तक अटक जाती है।

वीडियो में दिखा संसद का पूरा घटनाक्रम

इस मुद्दे से जुड़ा वीडियो भी सामने आया।यह वीडियो संसद टीवी पर प्रसारित हुआ।वीडियो में सांसद तन्खा सवाल पूछते दिखे।उन्होंने सरकार का ध्यान इस समस्या पर खींचा।अब सभी की नजर सरकार के फैसले पर है।देखना होगा कि नियुक्तियां कब तक होती हैं।

OBC क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, माता पिता की सैलरी से नहीं तय होगा आरक्षण

सुप्रीम कोर्ट ने OBC क्रीमी लेयर नियमों पर बड़ा फैसला सुनाया है। अब माता-पिता की नौकरी की सैलरी से क्रीमी लेयर तय नहीं होगी। कोर्ट ने 2004 का सरकारी स्पष्टीकरण रद्द कर दिया। अब व्यापार, निवेश और अन्य आय के आधार पर क्रीमी लेयर तय होगी। इससे हजारों छात्रों को राहत मिल सकती है।

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OBC क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला। अब माता-पिता की सैलरी से आरक्षण खत्म नहीं होगा। हजारों छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद।

प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

• सुप्रीम कोर्ट ने OBC क्रीमी लेयर नियमों पर अहम फैसला दिया।

• माता-पिता की नौकरी की सैलरी अब आय में नहीं जोड़ी जाएगी।

• कोर्ट ने 2004 का सरकारी स्पष्टीकरण पत्र रद्द कर दिया।

• अब अन्य स्रोतों की आय और सामाजिक स्थिति देखी जाएगी।

• इससे हजारों छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बदला क्रीमी लेयर का पूरा नियम

OBC आरक्षण से जुड़ा एक बड़ा विवाद अब साफ हो गया है।सुप्रीम कोर्ट ने क्रीमी लेयर नियमों पर अहम फैसला दिया है।अब माता-पिता की नौकरी की सैलरी क्रीमी लेयर तय नहीं करेगी।इसका सीधा असर हजारों छात्रों पर पड़ सकता है।अदालत ने कहा कि वेतन को आय मानना सही नहीं था।इसलिए पुराने सरकारी स्पष्टीकरण को रद्द कर दिया गया।

क्यों बनाया गया था क्रीमी लेयर का नियम

OBC आरक्षण का उद्देश्य कमजोर वर्गों को अवसर देना है।लेकिन समय के साथ कुछ परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हो गए।ऐसे परिवारों को क्रीमी लेयर माना जाता है।इन परिवारों के बच्चों को आरक्षण नहीं दिया जाता।इस नियम का मकसद जरूरतमंदों तक लाभ पहुंचाना है।सरकार इसके लिए आय सीमा तय करती है।फिलहाल यह सीमा करीब आठ लाख रुपये सालाना है।

2004 के एक पत्र से खड़ा हुआ विवाद

यह विवाद करीब बीस साल पहले शुरू हुआ।साल 2004 में सरकार ने एक स्पष्टीकरण जारी किया।उसमें नौकरी की सैलरी को आय में शामिल कर दिया गया।इससे कई छात्रों को बड़ा नुकसान हुआ।कई उम्मीदवारों ने प्रतियोगी परीक्षाएं पास की थीं।लेकिन सैलरी नियम के कारण आरक्षण नहीं मिला।इसके बाद कई अभ्यर्थियों ने अदालत में चुनौती दी।

कोर्ट ने सुनवाई में क्या कहा

सुनवाई के दौरान अदालत ने अहम टिप्पणी की।कोर्ट ने कहा वेतन से क्रीमी लेयर तय करना सही नहीं है।अदालत ने 1993 के मूल आदेश का जिक्र किया।उसमें अन्य स्रोतों की आय को आधार बताया गया था।कोर्ट ने कहा 2004 का स्पष्टीकरण नियमों से अलग था।इसलिए उसे अवैध मानते हुए रद्द कर दिया गया।

अब क्रीमी लेयर तय करने का नया तरीका

अब क्रीमी लेयर तय करने का आधार बदल गया है।माता-पिता की नौकरी की सैलरी इसमें नहीं जोड़ी जाएगी।खेती से होने वाली आय भी इसमें शामिल नहीं होगी।लेकिन अन्य आय जरूर गिनी जाएगी।जैसे व्यापार से कमाई, किराया और निवेश की आय।बड़ी संपत्तियों से मिलने वाली आय भी देखी जाएगी।कुछ उच्च पदों वाले परिवार अलग श्रेणी में रहेंगे।जैसे शीर्ष प्रशासनिक पदों पर कार्यरत अधिकारी।

हजारों छात्रों को मिल सकती है राहत

इस फैसले से कई छात्रों को बड़ी राहत मिल सकती है।कई अभ्यर्थी वर्षों से इस नियम से परेशान थे।कुछ उम्मीदवारों ने बड़ी परीक्षाएं पास की थीं।फिर भी उन्हें नौकरी नहीं मिल सकी।सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को समीक्षा का निर्देश दिया है।ऐसे मामलों को छह महीने में फिर देखा जाएगा।जरूरत होने पर अतिरिक्त पद भी बनाए जा सकते हैं।ताकि पहले से नियुक्त लोगों पर असर न पड़े।

आसान भाषा में समझें फैसला

अगर माता-पिता नौकरी करते हैं तो चिंता कम होगी।सिर्फ सैलरी के कारण आरक्षण खत्म नहीं होगा।अब परिवार की अन्य आय को देखा जाएगा।सामाजिक स्थिति भी अहम भूमिका निभाएगी।विशेषज्ञ इसे सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम मानते हैं।इससे हजारों OBC परिवारों को लाभ मिल सकता है।

जबलपुर में नशे पर बवाल, VHP ने घमापुर थाना घेरा

जबलपुर के घमापुर इलाके में नशे और शराब के कारोबार को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर माफियाओं को संरक्षण देने का आरोप लगाया। इसके विरोध में कार्यकर्ता घमापुर थाने पहुंचे। उन्होंने थाने का घेराव किया और हनुमान चालीसा का पाठ किया और इस मामले में प्राथमिक मीडिया ने स्टिंग करके किया खुलासा

जबलपुर में नशे के कारोबार पर बवाल, VHP ने घमापुर थाने का घेराव किया और पुलिस पर शराब माफियाओं को संरक्षण देने का आरोप लगाया

प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

• जबलपुर के घमापुर इलाके में नशे और अवैध शराब को लेकर विवाद बढ़ा।

• विश्व हिंदू परिषद ने पुलिस पर माफियाओं को संरक्षण देने का आरोप लगाया।

• कार्यकर्ताओं ने विरोध में घमापुर थाने का घेराव किया।

• प्रदर्शन के दौरान थाने के सामने हनुमान चालीसा पढ़ी गई।

• कार्यकर्ताओं ने दोषी पुलिसकर्मियों के निलंबन की मांग की।

• प्राथमिक मीडिया की टीम ने किया स्टिंग तो सामने आई सच्चाई

जबलपुर में नशे के कारोबार को लेकर अचानक बढ़ा तनाव

जबलपुर के घमापुर इलाके में माहौल अचानक गरमा गया। नशे और शराब के अवैध कारोबार पर लोगों का गुस्सा बढ़ा। स्थानीय संगठनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। कहा गया कि कुछ पुलिसकर्मी माफियाओं को बचाते हैं। इसी आरोप ने पूरे मामले को बड़ा बना दिया।

VHP कार्यकर्ता पहुंचे थाने, शुरू हुआ घेराव

विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता घमापुर थाने पहुंचे।कुछ ही देर में थाने के बाहर भीड़ बढ़ गई। कार्यकर्ताओं ने नारे लगाए और विरोध जताया। उन्होंने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया। घेराव के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण रहा।

थाने के सामने बैठकर पढ़ी गई हनुमान चालीसा

प्रदर्शन के बीच एक अलग तस्वीर भी दिखी। कार्यकर्ता थाने के सामने जमीन पर बैठ गए। इसके बाद सभी ने मिलकर हनुमान चालीसा का पाठ किया। उन्होंने इसे शांतिपूर्ण विरोध बताया। उनका कहना था कि यह लड़ाई समाज को बचाने की है।

पुलिस पर शराब माफियाओं की मुखबिरी का आरोप

विश्व हिंदू परिषद के नेताओं ने बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ पुलिसकर्मी माफियाओं को सूचना देते हैं। इससे अवैध कारोबार करने वालों को पहले खबर मिलती है। छापे की कार्रवाई से पहले ही वे बच निकलते हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि इससे अपराध बढ़ता है। आपको बता दें कि इसी थाने की कार्य प्रणाली पर पहले कांग्रेस भी सवाल उठा चुकी है और क्षेत्रीय विधायक लखन घनघोरिया ने भी इस थाने का घेराव किया था। लेकिन हालात आज भी जस के तस हैं।

इलाके में बढ़ती चाकूबाजी से लोग डरे

प्रदर्शन के दौरान इलाके की सुरक्षा भी मुद्दा बनी। कार्यकर्ताओं ने कहा कि चाकूबाजी की घटनाएं बढ़ रही हैं। नशे का कारोबार युवाओं को गलत रास्ते पर ले जा रहा है। स्थानीय लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इसलिए सख्त कार्रवाई की मांग उठी।

दो दिन पहले पुलिस अधिकारियों को दी गई थी जानकारी

कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि शिकायत पहले दी गई थी।दो दिन पहले पुलिस अधिकारियों को पूरा मामला बताया गया था।उन्होंने कहा कि लिखित शिकायत भी दी गई।लेकिन कार्रवाई होती नजर नहीं आई।इसी कारण गुस्सा बढ़ता गया।

दोषी पुलिसकर्मियों के निलंबन पर अड़े कार्यकर्ता

घेराव के दौरान कार्यकर्ता एक मांग पर अड़े रहे।उन्होंने कहा कि दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जाए।उनका कहना था कि बिना कार्रवाई भरोसा नहीं बनेगा।जनता का विश्वास बचाना जरूरी है।

गांजा बेचने के आरोप ने बढ़ाई नाराजगी

कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि इलाके में गांजा बेचा जाता है।उनका कहना है कि कुछ जगहों पर खुलेआम नशा बिकता है।लोगों का दावा है कि कई युवा वहां आते जाते दिखते हैं।इससे आसपास रहने वाले परिवार परेशान हैं।इसी वजह से संगठनों ने सख्त कार्रवाई की मांग की।उन्होंने कहा कि नशे के इस जाल को खत्म करना जरूरी है।

पुलिस ने जांच का दिया भरोसा

मामले में पुलिस अधिकारियों ने प्रतिक्रिया दी।सीएसपी ने कहा कि शिकायत की जांच होगी।उन्होंने कहा कि किसी को बचाया नहीं जाएगा।यदि आरोप सही मिले तो कार्रवाई होगी।पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।

प्राथमिक मीडिया के स्टिंग ने किया खुलासा

इस मामले की सच्चाई पता करने के लिए हमारी टीम ने क्षेत्र में स्टिंग किया। चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई की क्षेत्र में कई जगह पर अवैध व्यापार चल रहा है। खासकर चांदमारी तलैया क्षेत्र के पास अवैध व्यापार खुलेआम फल फूल रहा है। जिसमें देखा गया है कि अवैध गांजा व्यापार और खुले आप शराब बेची जा रही है, सूत्रों की माने तो क्षेत्र की कुछ महिलाएं भी शामिल हैं इस अवैध कारोबार में।

जबलपुर की गुंडा पुलिस, युवकों को दी खुलेआम धमकी कहा 1 मिनट लगेगा तेरी होशियारी गां….. में डाल दूंगा

जबलपुर में डुमना चौकी के बाहर पुलिसकर्मी और सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर का वीडियो वायरल हुआ है। वीडियो में पुलिसकर्मी गाली और धमकी देते दिखाई दे रहे हैं। घटना के बाद पुलिस की सोशल मीडिया निगरानी पर सवाल उठे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद ही जांच और कार्रवाई शुरू होगी।

जबलपुर डुमना चौकी के बाहर पुलिसकर्मी का वीडियो वायरल, गाली और धमकी के आरोप

प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

• जबलपुर में एक पुलिसकर्मी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।

• घटना डुमना चौकी के बाहर की बताई जा रही है।

• कुछ युवक वहां गाड़ी ठीक करते हुए नजर आए।

• वीडियो में पुलिसकर्मी गाली और धमकी देते दिखाई दे रहे हैं।

• पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद ही कार्रवाई होगी।

दिया तले अंधेरा, सोशल मीडिया निगरानी के दावे पर सवाल

दिया तले अंधेरा वाली कहावत अक्सर सुनने को मिलती है।इन दिनों यही बात जबलपुर पुलिस पर लागू होती दिख रही है।पुलिस कहती है कि वह सोशल मीडिया पर नजर रखती है।गलत पोस्ट पर तुरंत कार्रवाई का दावा भी किया जाता है।लेकिन एक वायरल वीडियो ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए।यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है।लोग पूछ रहे हैं कि निगरानी टीम को यह वीडियो पहले क्यों नहीं दिखा।

डुमना चौकी के बाहर हुआ पूरा विवाद

जानकारी के अनुसार यह घटना डुमना चौकी के बाहर की है।वहां कुछ युवक अपनी गाड़ी ठीक कर रहे थे।युवक पेड़ के नीचे खड़े होकर काम कर रहे थे।बताया जा रहा है कि वे सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर हैं।इसी दौरान वहां मौजूद एक पुलिसकर्मी उनसे उलझ गया।इसके बाद माहौल अचानक तनाव भरा हो गया।

वीडियो में पुलिसकर्मी गाली और धमकी देते दिखे

वायरल वीडियो में बहस साफ सुनाई देती है।वीडियो में पुलिसकर्मी गाली और धमकी देते दिखाई दे रहे हैं।बताया जा रहा है कि पुलिसकर्मी का नाम अशोक पांडे है।वीडियो में उनका लहजा काफी सख्त नजर आता है।वह युवकों से कहते हैं कि एक मिनट में घिरवा दूंगा।यह लाइन सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा में है।वीडियो सामने आने के बाद कई लोग हैरान हैं।

वायरल वीडियो ने खड़े किए कई बड़े सवाल

लोगों का कहना है कि यह दृश्य चिंता बढ़ाता है।वीडियो देख कर कई लोग अपनी राय दे रहे हैं।कई लोगों का कहना है कि यह व्यवहार सही नहीं है।कुछ लोग इसे पुलिस की सख्ती बता रहे हैं।इस वीडियो को देखकर ऐसा भी लग रहा है कि कुछ पुलिसकर्मीथाने और चौकियों को अपने बाप दादा की जागीर समझते हैं।तभी तो चौकी के बाहर पेड़ के नीचे खड़े युवक भी उनकी आंखों में चुभ गए।

पुलिस की सोशल मीडिया टीम पर उठी चर्चा

जबलपुर पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर नजर रहती है।अक्सर टीम वायरल पोस्ट पर कार्रवाई भी करती है।लेकिन इस मामले में वीडियो पहले लोगों तक पहुंचा।इसके बाद मीडिया के जरिए मामला चर्चा में आया।इस वजह से पुलिस की निगरानी प्रणाली पर सवाल उठे हैं।

चौकी प्रभारी ने क्या कहा

मामले पर डुमना चौकी प्रभारी से भी बात की गई।उन्होंने कहा कि पहले पूरी जानकारी ली जा रही है।उनका कहना है कि युवकों से संपर्क किया जा रहा है।दोनों पक्षों की बात सुनना जरूरी है।इसके बाद ही आगे की स्थिति साफ होगी।

वीडियो हटाने की चर्चा भी तेज

घटना के बाद वीडियो को लेकर नई बात सामने आई।कहा जा रहा है कि वीडियो बाद में हटा दिया गया।सूत्रों के अनुसार इनफ्लुएंसर ने वीडियो डिलीट किया।लेकिन इसके पीछे की वजह अभी साफ नहीं है।इस कारण सोशल मीडिया पर अलग अलग बातें चल रही हैं।

एडिशनल एसपी का बयान

मामले पर एडिशनल एसपी ने भी प्रतिक्रिया दी।उन्होंने कहा कि पुलिस शिकायत का इंतजार कर रही है।यदि शिकायत मिलती है तो जांच की जाएगी।दोष साबित होने पर कार्रवाई भी होगी।अधिकारियों का कहना है कि वीडियो की जांच जरूरी है।

शहर में चर्चा और बहस जारी

वीडियो वायरल होने के बाद शहर में चर्चा तेज है।लोग सोशल मीडिया पर अपनी राय दे रहे हैं।कुछ लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।कई लोग पुलिस से स्पष्ट जवाब चाहते हैं।अब सभी की नजर इस मामले की जांच पर है।

भ्रूण लेकर हाईकोर्ट पहुंचा पिता, बोला यह हमलों का सबूत

जबलपुर हाईकोर्ट में सोमवार को हैरान करने वाली घटना हुई। रीवा के दयाशंकर पांडे अपने अजन्मे बच्चे का भ्रूण लेकर कोर्ट पहुंच गए। उनका आरोप है कि शिकायत के बाद उन पर हमले हो रहे हैं। हालिया हादसे में पत्नी का गर्भपात हुआ। उन्होंने इसे हमलों का सबूत बताया।

हाईकोर्ट में चौंकाने वाली घटना। रीवा के दयाशंकर पांडे अजन्मे बच्चे का भ्रूण लेकर कोर्ट पहुंचे। बोले, लगातार हमले हो रहे हैं और यह उसका सबूत है।

प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

• पहला, रीवा निवासी दयाशंकर पांडे हाईकोर्ट भ्रूण लेकर पहुंचे।

• उनका आरोप है कि शिकायत के बाद हमले हुए।

• हालिया सड़क हादसे में उनकी पत्नी का गर्भपात हुआ।

• उन्होंने कोर्ट में इसे हमलों का सबूत बताया।

• पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।

जबलपुर हाईकोर्ट में अचानक मचा हड़कंप

सोमवार को जबलपुर हाईकोर्ट में असामान्य दृश्य दिखा।रीवा के दयाशंकर पांडे अचानक कोर्ट रूम पहुंचे।उनके हाथ में एक जार था।उसमें उनके अजन्मे बच्चे का भ्रूण रखा था।यह देखकर कोर्ट परिसर में हलचल मच गई।कई लोग कुछ पल के लिए हैरान रह गए।सुरक्षा कर्मी तुरंत सक्रिय हो गए।घटना कोर्ट नंबर 17 में हुई।

जज की बेंच के सामने रखी अपनी पीड़ा

दयाशंकर पांडे जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच तक पहुंचे।उन्होंने जज के सामने अपनी बात रखी।उन्होंने कहा कि उनके परिवार पर हमले हो रहे हैं।उन्होंने कहा कि यह सबूत है।दयाशंकर ने कहा कि अदालत सबूत मांगती है।इसलिए वह भ्रूण लेकर आए हैं।उन्होंने कहा कि आगे शायद वह जिंदा भी न रहें।

शुभ मोटर्स की शिकायत के बाद बढ़ा विवाद

दयाशंकर पहले जबलपुर की एक कंपनी में काम करते थे।कंपनी का नाम शुभ मोटर्स बताया गया।वह वहां अकाउंटेंट के पद पर थे।दयाशंकर का आरोप है कि कंपनी में गड़बड़ी हुई।उन्होंने कहा कि करीब 200 करोड़ की कैपिटल दिखाई गई।उनके अनुसार यह रकम फर्जी थी।उन्होंने इसकी शिकायत कई जगह की।दयाशंकर का दावा है कि यहीं से विवाद शुरू हुआ।उनका कहना है कि इसके बाद दबाव और हमले बढ़े।

लोकसभा चुनाव के दौरान जलाई गई थी गाड़ी

दयाशंकर ने बताया कि पहला बड़ा हमला 2024 में हुआ।उस समय लोकसभा चुनाव चल रहे थे।वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में थे।उनकी प्रचार वाली गाड़ी में आग लगा दी गई।उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस में की।उनका आरोप है कि आरोपी अब तक नहीं पकड़े गए।

पिता भी बने हादसे का शिकार

दयाशंकर ने दूसरी घटना का भी जिक्र किया।उन्होंने बताया कि यह मई 2025 की घटना है।उस दिन उनके पिता कोर्ट जा रहे थे।रास्ते में एक कार ने उन्हें टक्कर मार दी।कार पर नंबर प्लेट नहीं थी।दयाशंकर ने इसे संदिग्ध बताया।

नवंबर 2025 में फिर हुआ सड़क हादसा

दयाशंकर के अनुसार एक और हादसा हुआ।यह घटना नवंबर 2025 में हुई।उन्होंने कहा कि एक कार ने उन्हें टक्कर मारी।उनका दावा है कि यह सामान्य हादसा नहीं था।उन्हें इसके पीछे साजिश का शक है।

मार्च 2026 के हादसे में पत्नी का गर्भपात

सबसे दर्दनाक घटना मार्च 2026 में हुई।उस दिन वह पत्नी और बच्ची के साथ बाइक पर थे।रास्ते में एक कार ने बाइक को टक्कर मारी।इस हादसे में उनकी पत्नी घायल हुईं।पत्नी उस समय गर्भवती थीं।डॉक्टरों को बाद में गर्भपात करना पड़ा।इसमें उनके अजन्मे बच्चे की मौत हो गई।

पुलिस और एसएएफ ने संभाली स्थिति

कोर्ट में घटना के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई।एसएएफ के जवान तुरंत मौके पर पहुंचे।सिविल लाइन और ओमती पुलिस भी पहुंची।पुलिस ने दयाशंकर को हिरासत में लिया।उन्हें पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया।अब पूरे मामले की जांच की जा रही है।

न्याय की गुहार के साथ कोर्ट पहुंचे दयाशंकर

दयाशंकर का कहना है कि उन्होंने कई जगह शिकायत की।उन्होंने पुलिस और सरकार को भी लिखा।उन्होंने राष्ट्रपति तक पत्र भेजा।उनका दावा है कि उन्हें कहीं न्याय नहीं मिला।इसी कारण वह हाईकोर्ट पहुंचे।उन्होंने कहा कि यह कदम मजबूरी में उठाया।

जबलपुर में भाजपा का प्रशिक्षण शिविर, मोहन यादव बोले संगठन ही ताकत

जबलपुर में भाजपा का बड़ा प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ। इसमें जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के कार्यकर्ता पहुंचे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में कहा कि भाजपा की असली ताकत संगठन और कार्यकर्ता हैं। प्रशिक्षण से कार्यकर्ताओं को पार्टी की सोच और काम का तरीका समझ आता है।

प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

• जबलपुर में भाजपा का बड़ा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ।

• चार संभागों के सैकड़ों कार्यकर्ता इसमें शामिल हुए।

• मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कार्यक्रम में पहुंचे।

• उन्होंने संगठन की ताकत और कार्यकर्ताओं की भूमिका बताई।

• प्रशिक्षण का लक्ष्य कार्यकर्ताओं को मजबूत बनाना है।

जबलपुर में जुटे चार संभागों के भाजपा कार्यकर्ता

जबलपुर में भाजपा का प्रशिक्षण वर्ग आयोजित हुआ।इस कार्यक्रम ने कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरा।कार्यक्रम का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान 2026 था।जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के कार्यकर्ता पहुंचे।दूर दूर से कार्यकर्ता कार्यक्रम में शामिल हुए।हॉल में जोश और उत्साह साफ दिखाई दिया।कार्यकर्ताओं ने नेताओं की बातें ध्यान से सुनीं।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिया संगठन मजबूत करने का संदेश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहे।उन्होंने मंच से कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है।उन्होंने कहा कि इस सफलता का कारण संगठन है।साथ ही कार्यकर्ताओं की मेहनत भी सबसे बड़ी ताकत है।उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता पार्टी की असली पहचान हैं।

प्रशिक्षण से कार्यकर्ता सीखते हैं संगठन का तरीका

मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षण के महत्व पर बात की।उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता को हमेशा सीखते रहना चाहिए।प्रशिक्षण से पार्टी की विचारधारा समझ आती है।कार्यकर्ताओं को संगठन का तरीका भी समझ आता है।ऐसे कार्यक्रम टीम को मजबूत बनाते हैं।साथ ही कार्यकर्ताओं में आत्मविश्वास बढ़ाते हैं।

सरकार में रहते हुए भी कार्यकर्ता जैसा भाव जरूरी

मुख्यमंत्री ने अपनी सोच भी साझा की।उन्होंने कहा कि हम सरकार में जरूर हैं।लेकिन दिल से हम कार्यकर्ता ही हैं।उन्होंने कहा कि यही भावना हमें काम करने की ताकत देती है।सांसद, विधायक और मंत्री लगातार काम कर रहे हैं।वे संगठन और सरकार दोनों की जिम्मेदारी निभाते हैं।

प्रदेश अध्यक्ष के काम की मुख्यमंत्री ने की सराहना

कार्यक्रम में संगठन के काम की भी चर्चा हुई।मुख्यमंत्री ने प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सराहना की।उन्होंने कहा कि संगठन लगातार सक्रिय है।कई अभियान चलाए जा रहे हैं।इनसे कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा आई है।संगठन का विस्तार भी तेजी से हो रहा है।

संस्कारधानी जबलपुर की भी मुख्यमंत्री ने की तारीफ

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में जबलपुर का जिक्र किया।उन्होंने कहा कि यह शहर मां नर्मदा के किनारे बसा है।यह शहर अपनी संस्कृति के लिए जाना जाता है।उन्होंने कार्यकर्ताओं के उत्साह की भी तारीफ की।मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां का जोश प्रेरित करता है।

कार्यक्रम में कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद

कार्यक्रम में कई बड़े नेता मौजूद रहे।प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मंच पर मौजूद रहे।राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री कार्यक्रम में पहुंचे।क्षेत्रीय संगठन मंत्री भी मौजूद रहे।साथ ही बड़ी संख्या में कार्यकर्ता कार्यक्रम में शामिल हुए।पूरा कार्यक्रम संगठन को मजबूत करने पर केंद्रित रहा।

जबलपुर में टैक्स बकायादारों पर सख्ती, कई घरों पर कुर्की की कार्रवाई

जबलपुर नगर निगम ने टैक्स बकायादारों के खिलाफ सख्त अभियान शुरू किया है। कई वार्डों में नोटिस चस्पा किए गए। कुछ जगह कुर्की की कार्रवाई भी हुई। तीन दिन में टैक्स जमा न करने वालों पर और सख्ती होगी। निगम ने लोगों से समय पर टैक्स भरने की अपील की है।

प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

• जबलपुर नगर निगम ने टैक्स वसूली अभियान तेज किया।

• कई वार्डों में बड़े बकायादारों को अंतिम नोटिस मिला।

• नोटिस में तीन दिन के भीतर भुगतान करने को कहा गया।

• समय खत्म होने पर कुर्की की कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

• कुछ वार्डों में निगम टीम ने संपत्ति कुर्क भी की।

जबलपुर में क्यों तेज हुई टैक्स वसूली की कार्रवाई

जबलपुर में नगर निगम ने बकाया टैक्स वसूलने की मुहिम तेज की।यह अभियान शहर के कई वार्डों में चलाया जा रहा है। निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से टैक्स बकाया है। इसी कारण अब सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। निगम की टीमें अलग अलग संभागों में पहुंच रही हैं।टीम सीधे बकायादारों के घर पहुंच रही है। वहां अंतिम चेतावनी नोटिस लगाए जा रहे हैं। नोटिस में साफ लिखा है कि तीन दिन में टैक्स भरें।अन्यथा संपत्ति कुर्क की जाएगी।

इन वार्डों में बड़े बकायादारों को मिला नोटिस

संभाग क्रमांक 10 में रविवार को कार्रवाई हुई।यह कार्रवाई शहीद भगत सिंह वार्ड में हुई। महर्षि सुदर्शन वार्ड में भी टीम पहुंची।निगम कर्मचारियों ने कई घरों में नोटिस लगाए। लक्ष्मण यादव पर कुल 53,590 और 39,432 रुपये बकाया है। चेतराम बंजारा पर 46,636 रुपये टैक्स बाकी है। प्रेमवती झारिया पर 39,923 रुपये बकाया बताया गया। किशनलाल रजक पर 62,254 रुपये टैक्स बाकी है। सूरज प्रसाद विनोदिया पर 49,104 रुपये बकाया है। बद्री प्रसाद साहू पर 34,949 रुपये बाकी बताए गए। कल्पना पांडेय पर 32,961 रुपये टैक्स बकाया है। संभागीय अधिकारी नरेश शर्मा ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सभी को तीन दिन का समय दिया गया। यदि भुगतान नहीं हुआ तो कुर्की की कार्रवाई होगी।

राजीव गांधी वार्ड में हुई कुर्की की कार्रवाई

संभाग क्रमांक 06 में भी कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई राजीव गांधी वार्ड में हुई। यहां कई बकायादार लंबे समय से टैक्स नहीं भर रहे थे। निगम टीम ने मौके पर पहुंचकर कुर्की की कार्रवाई की।पुरुषोत्तम लाल साहू पर 39,359 रुपये बकाया था। देशराज सिंह भदोरिया पर 39,524 रुपये बाकी थे। भीमलाल गुप्ता पर 33,252 रुपये टैक्स बकाया था। निगम ने इन मामलों में कुर्की की कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान कई अधिकारी मौजूद रहे। राजस्व निरीक्षक और निगम कर्मचारी भी साथ रहे।

विजय नगर में डेढ़ लाख से ज्यादा बकाया पर कुर्की

संभाग क्रमांक 14 के विजय नगर क्षेत्र में भी कार्रवाई हुई।यह कार्रवाई मोतीलाल वार्ड में की गई।यहां साबरा बी पर बड़ा टैक्स बकाया दर्ज था।उन पर 1,59,594 रुपये का बकाया था।निगम टीम ने मौके पर पहुंचकर कुर्की की कार्रवाई की।संपत्ति पर कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।कार्रवाई के दौरान कई अधिकारी मौजूद रहे।राजस्व अधिकारी आनंद मिश्रा टीम के साथ पहुंचे।संभागीय अधिकारी सुदीप पटेल भी मौके पर मौजूद थे।

नगर निगम की अपील, समय पर टैक्स भरें

निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने नागरिकों से अपील की।उन्होंने कहा कि टैक्स समय पर जमा करें।टैक्स से शहर की कई सेवाएं चलती हैं।सड़क, सफाई और लाइट व्यवस्था इसी से बेहतर होती है।उन्होंने कहा कि कुर्की से बचना आसान है।समय पर टैक्स जमा करना ही इसका तरीका है।