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OBC क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, माता पिता की सैलरी से नहीं तय होगा आरक्षण

सुप्रीम कोर्ट ने OBC क्रीमी लेयर नियमों पर बड़ा फैसला सुनाया है। अब माता-पिता की नौकरी की सैलरी से क्रीमी लेयर तय नहीं होगी। कोर्ट ने 2004 का सरकारी स्पष्टीकरण रद्द कर दिया। अब व्यापार, निवेश और अन्य आय के आधार पर क्रीमी लेयर तय होगी। इससे हजारों छात्रों को राहत मिल सकती है।

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OBC क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला। अब माता-पिता की सैलरी से आरक्षण खत्म नहीं होगा। हजारों छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद।

प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

• सुप्रीम कोर्ट ने OBC क्रीमी लेयर नियमों पर अहम फैसला दिया।

• माता-पिता की नौकरी की सैलरी अब आय में नहीं जोड़ी जाएगी।

• कोर्ट ने 2004 का सरकारी स्पष्टीकरण पत्र रद्द कर दिया।

• अब अन्य स्रोतों की आय और सामाजिक स्थिति देखी जाएगी।

• इससे हजारों छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बदला क्रीमी लेयर का पूरा नियम

OBC आरक्षण से जुड़ा एक बड़ा विवाद अब साफ हो गया है।सुप्रीम कोर्ट ने क्रीमी लेयर नियमों पर अहम फैसला दिया है।अब माता-पिता की नौकरी की सैलरी क्रीमी लेयर तय नहीं करेगी।इसका सीधा असर हजारों छात्रों पर पड़ सकता है।अदालत ने कहा कि वेतन को आय मानना सही नहीं था।इसलिए पुराने सरकारी स्पष्टीकरण को रद्द कर दिया गया।

क्यों बनाया गया था क्रीमी लेयर का नियम

OBC आरक्षण का उद्देश्य कमजोर वर्गों को अवसर देना है।लेकिन समय के साथ कुछ परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हो गए।ऐसे परिवारों को क्रीमी लेयर माना जाता है।इन परिवारों के बच्चों को आरक्षण नहीं दिया जाता।इस नियम का मकसद जरूरतमंदों तक लाभ पहुंचाना है।सरकार इसके लिए आय सीमा तय करती है।फिलहाल यह सीमा करीब आठ लाख रुपये सालाना है।

2004 के एक पत्र से खड़ा हुआ विवाद

यह विवाद करीब बीस साल पहले शुरू हुआ।साल 2004 में सरकार ने एक स्पष्टीकरण जारी किया।उसमें नौकरी की सैलरी को आय में शामिल कर दिया गया।इससे कई छात्रों को बड़ा नुकसान हुआ।कई उम्मीदवारों ने प्रतियोगी परीक्षाएं पास की थीं।लेकिन सैलरी नियम के कारण आरक्षण नहीं मिला।इसके बाद कई अभ्यर्थियों ने अदालत में चुनौती दी।

कोर्ट ने सुनवाई में क्या कहा

सुनवाई के दौरान अदालत ने अहम टिप्पणी की।कोर्ट ने कहा वेतन से क्रीमी लेयर तय करना सही नहीं है।अदालत ने 1993 के मूल आदेश का जिक्र किया।उसमें अन्य स्रोतों की आय को आधार बताया गया था।कोर्ट ने कहा 2004 का स्पष्टीकरण नियमों से अलग था।इसलिए उसे अवैध मानते हुए रद्द कर दिया गया।

अब क्रीमी लेयर तय करने का नया तरीका

अब क्रीमी लेयर तय करने का आधार बदल गया है।माता-पिता की नौकरी की सैलरी इसमें नहीं जोड़ी जाएगी।खेती से होने वाली आय भी इसमें शामिल नहीं होगी।लेकिन अन्य आय जरूर गिनी जाएगी।जैसे व्यापार से कमाई, किराया और निवेश की आय।बड़ी संपत्तियों से मिलने वाली आय भी देखी जाएगी।कुछ उच्च पदों वाले परिवार अलग श्रेणी में रहेंगे।जैसे शीर्ष प्रशासनिक पदों पर कार्यरत अधिकारी।

हजारों छात्रों को मिल सकती है राहत

इस फैसले से कई छात्रों को बड़ी राहत मिल सकती है।कई अभ्यर्थी वर्षों से इस नियम से परेशान थे।कुछ उम्मीदवारों ने बड़ी परीक्षाएं पास की थीं।फिर भी उन्हें नौकरी नहीं मिल सकी।सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को समीक्षा का निर्देश दिया है।ऐसे मामलों को छह महीने में फिर देखा जाएगा।जरूरत होने पर अतिरिक्त पद भी बनाए जा सकते हैं।ताकि पहले से नियुक्त लोगों पर असर न पड़े।

आसान भाषा में समझें फैसला

अगर माता-पिता नौकरी करते हैं तो चिंता कम होगी।सिर्फ सैलरी के कारण आरक्षण खत्म नहीं होगा।अब परिवार की अन्य आय को देखा जाएगा।सामाजिक स्थिति भी अहम भूमिका निभाएगी।विशेषज्ञ इसे सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम मानते हैं।इससे हजारों OBC परिवारों को लाभ मिल सकता है।

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