जबलपुर। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बिना अनुमति कॉलोनियों का निर्माण कर लोगों से प्लॉट बेचने के मामलों में जिला प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने ऐसे सात कॉलोनाइजर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। इन आदेशों के तहत संबंधित क्षेत्रों के तहसीलदारों को कार्रवाई कर पुलिस में प्रकरण दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच में उजागर हुआ अवैध प्लॉट बिक्री का नेटवर्क
प्रशासनिक जांच में पनागर, कुंडम और पिपरिया बनियखेड़ा सहित कई ग्रामीण इलाकों में अवैध कॉलोनियों का जाल सामने आया है। बिना लेआउट स्वीकृति और आवश्यक अनुमति के कॉलोनियां विकसित कर आम लोगों को प्लॉट बेचे गए। अलग-अलग स्थानों पर 17 से लेकर 82 तक भूखंडों का विक्रय किया गया, जिससे बड़ी संख्या में खरीदारों के साथ धोखाधड़ी हुई।
पहले से चल रहे थे प्रकरण, अब होगी एफआईआर
कलेक्टर कार्यालय की कॉलोनी सेल के अनुसार इन सातों कॉलोनाइजर्स के खिलाफ कलेक्टर न्यायालय में पहले से प्रकरण दर्ज थे। जांच में अवैध कॉलोनी निर्माण की पुष्टि होने के बाद अब मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम और मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिले में चिन्हित 98 अवैध कॉलोनियों पर आगे भी चरणबद्ध कार्रवाई जारी रहेगी।
साल 2026 की शुरुआत ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद मंगलकारी होने जा रही है। 4 जनवरी को साल का पहला ‘रवि पुष्य नक्षत्र’ पड़ रहा है। ज्योतिष शास्त्र में पुष्य को ‘नक्षत्रों का राजा’ कहा जाता है। जब यह नक्षत्र रविवार के दिन पड़ता है, तो ‘रवि पुष्य योग’ का निर्माण होता है, जिसे तंत्र-मंत्र, धन संचय और नवीन कार्यों के लिए ‘अमृत योग’ माना गया है।
क्यों खास है इस बार का रवि पुष्य नक्षत्र?
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि देव हैं और इसके अधिष्ठाता देवता देवगुरु बृहस्पति हैं। रविवार सूर्य का दिन है, जो सफलता और तेज का प्रतीक है। जब शनि, गुरु और सूर्य की ऊर्जा का संगम होता है, तो एक दुर्लभ “सिद्धि योग” बनता है।
इस संयोग की मुख्य विशेषताएं:
अक्षय फल: इस दिन किए गए निवेश या खरीदारी का पुण्य कभी समाप्त नहीं होता।
सर्वार्थ सिद्धि: पुष्य नक्षत्र के साथ बन रहे अन्य शुभ योग इसे स्वर्ण (Gold) खरीदने और व्यापारिक सौदों के लिए सर्वोत्तम बनाते हैं।
दोषों का शमन: रवि पुष्य योग को कुंडली के कई अशुभ योगों के प्रभाव को कम करने वाला माना गया है।
ज्योतिषीय नजरिया: क्या करें और क्या खरीदें?
विख्यात ज्योतिषियों के अनुसार, इस दिन ग्रहों की स्थिति धन वृद्धि के लिए अत्यंत अनुकूल है:
गतिविधि
महत्व एवं लाभ
स्वर्ण/चांदी की खरीदारी
सुख-समृद्धि और लक्ष्मी का स्थाई वास होता है।
नया व्यापार/निवेश
लंबे समय तक स्थिरता और भारी मुनाफा सुनिश्चित करता है।
श्री यंत्र स्थापना
इस दिन घर या ऑफिस में श्री यंत्र स्थापित करना सौभाग्य लाता है।
बहीखाता पूजन
व्यापारियों के लिए नए वित्तीय लक्ष्यों की शुरुआत हेतु श्रेष्ठ।
विशेष सावधानी: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पुष्य नक्षत्र में ‘विवाह’ करना वर्जित माना जाता है, क्योंकि इसे ब्रह्मा जी का विशेष विधान प्राप्त है। अतः मांगलिक कार्यों के चयन में सावधानी बरतें।
सभी 12 राशियों के लिए विशेष उपाय
इस महासंयोग का पूर्ण लाभ उठाने के लिए अपनी राशि के अनुसार ये सरल उपाय करें:
मेष: हनुमान चालीसा का पाठ करें और गुड़ का दान करें।
वृषभ: श्री सूक्त का पाठ कर माता लक्ष्मी को सफेद मिठाई अर्पित करें।
मिथुन: गणेश जी को दूर्वा चढ़ाएं और गाय को हरा चारा खिलाएं।
कर्क: शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाएं। चांदी की वस्तु खरीदना शुभ होगा।
सिंह: आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें और तांबे के पात्र का दान करें।
कन्या: पक्षियों को सप्तधान्य डालें और “ॐ बुं बुधाय नमः” का जाप करें।
तुला: छोटी कन्याओं को फल बांटें और मंदिर में शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
वृश्चिक: लाल मसूर की दाल दान करें और तांबे का सिक्का पास रखें।
धनु: विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। केसर का तिलक लगाना लाभकारी होगा।
मकर: पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और शनि चालीसा पढ़ें।
कुंभ: जरूरतमंदों को काला तिल या तेल दान करें।
मीन: हल्दी मिश्रित जल से स्नान करें और केले के वृक्ष की पूजा करें।
शुभ मुहूर्त (4 जनवरी 2026)
4 जनवरी को पुष्य नक्षत्र सूर्योदय के साथ ही विद्यमान रहेगा, जिससे पूरा दिन ही मांगलिक कार्यों के लिए शुभ है। फिर भी, विशेष कार्यों के लिए इन विशिष्ट समयों का पालन करना अत्यंत लाभकारी होगा:
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 05:25 से 06:19 तक (अध्यात्म और साधना के लिए श्रेष्ठ) प्रातः संध्या: प्रातः 05:52 से 07:13 तक अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 से 12:47 तक (दिन का सबसे शक्तिशाली मुहूर्त, हर कार्य हेतु शुभ) विजय मुहूर्त: दोपहर 02:10 से 02:52 तक (मुकदमेबाजी या प्रतियोगिता में सफलता हेतु) अमृत काल: दोपहर 02:44 से 04:22 तक (स्वर्ण एवं संपत्ति की खरीदारी के लिए सर्वोत्तम) गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:35 से 06:03 तक (लक्ष्मी पूजन के लिए उपयुक्त) सायाह्न संध्या: शाम 05:38 से 06:59 तक निशिता मुहूर्त: रात्रि 11:59 से 12:53 (5 जनवरी) तक (विशेष तंत्र साधना और गुप्त पूजा के लिए) खरीदारी और निवेश के लिए अभिजीत मुहूर्त और विजय मुहूर्त सबसे फलदायी रहेंगे।
अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी ज्योतिषीय गणनाओं, सामान्य मान्यताओं और उपलब्ध शोध पर आधारित है। prathmikmedia.com इन तथ्यों की पूर्ण सत्यता या इसके प्रभावों की व्यक्तिगत गारंटी नहीं लेता है। किसी भी उपाय, निवेश या महत्वपूर्ण निर्णय को लेने से पहले संबंधित विषय के विशेषज्ञ या अनुभवी से परामर्श अवश्य लें।
जबलपुर। अब तक गीला और सूखा कचरा अलग करने की व्यवस्था थी, लेकिन नगर निगम की नई पहल के तहत अब जैव कचरा (बायो-वेस्ट), घरेलू हानिकारक कचरा और ई-वेस्ट को भी घर पर ही अलग करना होगा। नागरिकों से अपील की गई है कि वे डायपर, सेनेटरी नैपकिन जैसे जैव अपशिष्ट, टूटे बल्ब, एक्सपायरी दवाइयों जैसे हानिकारक कचरे और खराब मोबाइल, बैटरी, चार्जर जैसे ई-वेस्ट को सामान्य कचरे में न मिलाएँ, बल्कि निर्धारित डिब्बों में अलग-अलग रखें। शहर को साफ-सुथरा बनाने और स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर रैंक दिलाने के लिए नगर निगम जबलपुर लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है। निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार के निर्देश पर शहर के अलग-अलग इलाकों में लोगों को कचरा अलग-अलग रखने के लिए समझाया जा रहा है। इसी कड़ी में संभाग क्रमांक 12 के पंडित मदन मोहन मालवीय वार्ड की मलिन बस्ती में विशेष अभियान चलाया गया।
घर-घर जाकर समझाया गया
अभियान के दौरान निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार और अपर आयुक्त देवेन्द्र सिंह चौहान के मार्गदर्शन में नगर निगम की टीम ने डोर-टू-डोर कचरा वाहन के साथ क्षेत्र का भ्रमण किया। टीम ने हर घर जाकर लोगों से बात की और उन्हें बताया कि कचरा घर से ही अलग करना क्यों जरूरी है।
5 रंगों के डिब्बों में कचरा अलग करने की जानकारी
नगर निगम की टीम ने लोगों को आसान भाषा में समझाया कि कचरा मिलाने के बजाय 5 तरह के डिब्बों में रखें—
नीला डिब्बा: सूखा कचरा जैसे कागज, प्लास्टिक, कांच, धातु, खाली डिब्बे और पुराने कपड़े
हरा डिब्बा: गीला कचरा जैसे रसोई का कचरा, सब्जियों-फलों के छिलके, बचा हुआ खाना
पीला डिब्बा: गंदा और जैव कचरा जैसे डायपर, सेनेटरी पैड, टिशू पेपर, बाल और सूखी पत्तियाँ
काला डिब्बा: हानिकारक कचरा जैसे टूटे बल्ब, ट्यूबलाइट, पेंट, कीटनाशक और एक्सपायरी दवाइयाँ
लाल डिब्बा: इलेक्ट्रॉनिक कचरा जैसे खराब मोबाइल, चार्जर, बैटरी, रिमोट और ईयरफोन
साफ शहर के लिए सहयोग की अपील
निगमायुक्त ने लोगों से अपील की कि वे कचरा अलग करके ही नगर निगम की गाड़ी में दें। इससे कचरे का सही तरीके से निपटान होगा और शहर साफ रहेगा। नगर निगम के इस प्रयास की लोगों ने सराहना की और स्वच्छता अभियान में पूरा सहयोग देने की बात कही।
अवधूत आनंद का परिचय - जबलपुर (माँ नर्मदा के पावन तट) में जन्मे अवधूत आनंद का बचपन से ही अध्यात्म और अदृश्य जगत के प्रति गहरा झुकाव रहा। परिवार में हर कोई अलग-अलग साधना पथ पर था, पर सभी का लक्ष्य एक ही—ईश्वर प्रेम और सत्य की खोज। 2012 में दिल्ली (NCR) आने के बाद उन्होंने एक दशक तक कॉर्पोरेट जीवन जिया, लेकिन भीतर के आह्वान ने उन्हें साधना की ओर खींच लाया। इस दौरान उन्होंने तंत्र, वेद, प्राणिक हीलिंग, अंक ज्योतिष और वैदिक ज्योतिष का गहन अध्ययन किया। गुरु पूर्णिमा 2023 को अपने परमगुरु भगवान दत्तात्रेय की प्रेरणा से उन्होंने कॉर्पोरेट नौकरी त्याग दी और पूर्ण रूप से साधना मार्ग को समर्पित हो गए। तभी से वे “अवधूत आनंद” के रूप में समाज का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
🎤 पितृ पक्ष और पितृ दोष पर अवधूत आनंद जी से बातचीत के अंश यहाँ दिए जा रहे हैं
(नीचे दिए गए प्रश्न–उत्तर इंटरव्यू से लिए गए अंश हैं, पूरा इंटरव्यू आप YouTube पर देख सकते हैं)
❓ सवाल 1: आखिर पितृ होते कौन हैं? उत्तर (अवधूत आनंद जी): पितृ मनुष्य के देवता गण हैं। जब कोई व्यक्ति देह त्यागता है तो पहले 13 दिन प्रेत योनि में रहता है और उसके बाद अपने पितरों से जुड़ता है।
❓ सवाल 2: पितृ और जेनेटिक्स का क्या संबंध है? उत्तर: आधुनिक विज्ञान (Genetics) मानता है कि DNA के ज़रिए जानकारी पीढ़ियों तक जाती है। अध्यात्म में यही पितृ तत्व कहलाता है।
❓ सवाल 3: पितृ ऋण और उसका महत्व क्या है? उत्तर: हर व्यक्ति पर जन्म के साथ पितृ ऋण होता है। संतान के जन्म से यह ऋण आगे बढ़ता है और पितृ संतुष्ट होते हैं।
❓ सवाल 4: पितृ दोष क्या है और परिवार को कैसे प्रभावित करता है? उत्तर: जब कुल परंपरा की नियमावली भंग हो, जैसे पूजा-पाठ छोड़ना, मांसाहार अपनाना, संतान न होना, तब पितृ रुष्ट होते हैं। इसे पितृ दोष कहते हैं।
❓ सवाल 5: पितृ स्थल क्या होता है? उत्तर: पितृ स्थल घर की दहलीज, अन्न भंडार या खेत/जमीन पर बनाया जाता है। यही वह स्थान है जहाँ तर्पण और पूजन होता है।
❓ सवाल 6: पितृ दोष की पहचान कैसे होती है? उत्तर: ज्योतिष में सूर्य-राहु, सूर्य-केतु आदि से और तंत्र में आभामंडल देखकर पता चलता है कि पितृ कृपा कारक हैं या बाधक।
❓ सवाल 7: पितृ पक्ष का महत्व क्या है? उत्तर: श्राद्ध पक्ष (पितृ पक्ष) में 14 दिनों तक पितृ धरती पर आते हैं और अपने वंशजों से तर्पण ग्रहण करते हैं।
❓ सवाल 9:पितृ दोष और पितृ श्राप में क्या अंतर है? उत्तर:पितृ दोष तब होता है जब पितरों को तृप्ति नहीं मिलती या उनकी उपेक्षा होती है। पितृ श्राप तब लगता है जब पूर्वजों के साथ अन्याय या अपमान होने पर वे क्रोधित होकर श्राप देते हैं।
❓ सवाल 10: पितृ दोष से मुक्ति के लिए कौन-से उपाय करने चाहिए? उत्तर: पितृ पक्ष में तर्पण, अन्नदान, वस्त्रदान और हवन करें। हर अमावस्या को पीपल या बरगद के नीचे दीपक जलाएँ और जल-भोजन अर्पित करें। दक्षिण दिशा में तेल का दीपक जलाना शुभ होता है। दान-पुण्य और सेवा अवश्य करें। (सभी उपायों के लिए पूरा इंटरव्यू आप YouTube पर देख सकते हैं)
❓ सवाल 11: क्या पितृ दोष से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सकती है? उत्तर: नहीं, पितृ दोष से स्थायी मुक्ति संभव नहीं है क्योंकि हर पीढ़ी में नए-नए ऋण और संबंध बनते रहते हैं। इसका समाधान है—निरंतर साधना, पितरों के प्रति श्रद्धा और नियमित तर्पण-श्राद्ध।
👉 यहाँ केवल कुछ अंश दिए गए हैं। पूरा इंटरव्यू आप YouTube पर देख सकते हैं।
अस्वीकरण – उपरोक्त जानकारी साक्षात्कारकर्ता के द्वारा दी गई है, जिसकी प्रामाणिकता का दावा प्राथमिकमीडिया नहीं करता। उपरोक्त उपायों, निवारणों या किसी भी जानकारी पर अमल करने से पहले अपने बुद्धि विवेक से निर्णय लें। किसी भी हानि के लिए प्राथमिकमीडिया या इसका कोई सदस्य उत्तरदायी नही होगा।
जबलपुर। नगर निगम जबलपुर ने सम्पत्तिकर, जलकर एवं उपभोक्ता प्रभार की वसूली के लिए कार्यवाही तेज कर दी है। निगम आयुक्त के निर्देश पर राजस्व विभाग की टीम ने 50 हजार रुपये से अधिक बकाया रखने वाले करदाताओं को धारा 173 एवं 174 के अंतर्गत नोटिस जारी किए हैं। अपर आयुक्त राजस्व अंजू सिंह ने संभाग क्रमांक 2 और 6 की समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया कि बड़े बकायादारों पर अब कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने करदाताओं से अपील की कि वे आगामी 13 दिसम्बर 2025, शनिवार को आयोजित लोक अदालत में उपस्थित होकर अपने बकाया करों की राशि जमा करें और छूट का लाभ उठाएँ।
संभाग क्रमांक 2 के बड़े बकायादार
खटवानी सेल्स एण्ड सर्विसेस प्रा. लि. – ₹5,56,943
कमला रानी/सी.पी. केसरवानी – ₹2,28,728
मोतीलाल बर्मन – ₹1,87,591
रमेश कुमार सोंधिया / बाबूलाल सोंधिया – ₹1,86,832
अजय कुमार शर्मा – ₹1,07,070
अमर प्रीतम सिंह – ₹1,64,410
वर्मा सेल्स कम्पनी पेट्रोल पंप – ₹1,79,351
विनोद विश्वकर्मा – ₹1,69,306
श्रीमती वेदरानी खन्ना – ₹1,18,986
सरदार मोहन सिंह बग्गा / शाहनी कौर / तरनदीप सिंह – ₹6,31,045
सतनाम सिंह / सतपाल सिंह / आत्म सिंह – ₹1,14,204
सैयद माजिद अली एवं सैयद वाहिद अली – ₹1,98,623
श्रीमती आशा सिंह – ₹1,98,623
दलजीत सिंह बग्गा – ₹4,65,124 एवं ₹1,81,844
श्रीमती अश्विनी सिंह – ₹3,42,042
सुदामा बबेले – ₹2,02,609
इशिका सिंह वैद्य / शालिनी सिंह बैद्य – ₹3,02,096
लक्ष्मी राय / बी.डी. राय – ₹1,63,814
वीरेन्द्र कुमार यादव – ₹1,52,814
रोज मेरी विनियम प्रा. लि. / डॉ. ओमप्रकाश अग्रवाल / राजेश मछानी – ₹5,34,096
संभाग क्रमांक 6 के बड़े बकायादार
रहमत उल्ला – ₹1,66,500
हामित दुसैन – ₹1,66,500
कन्हैया लाल – ₹1,79,300
चन्दा बाई – ₹3,84,800
राजाराम पुरूषोत्तम – ₹3,43,200
इकामन बी – ₹1,62,900
गंगा बाई – ₹5,61,200
मदन लाल – ₹5,01,700
अनुपम आनंद एवं हर्ष देव आनंद – ₹2,92,200
सतपाल लांबा / चमनलाल लांबा – ₹1,23,200
गौरव डयोढिया – ₹1,53,900
चीना बाई केशरवानी – ₹1,15,900
रूपेश जैन – ₹1,18,500
राजकुमार जैन – ₹2,72,100
संजय कुमार जैन – ₹2,65,000
रमजान खान – ₹9,95,700 (सबसे अधिक)
मोहम्मद मोहसिन – ₹1,48,700
अमन सिविल इंजिनियरिंग – ₹1,48,300
शुभा मिश्रा – ₹1,83,400
बक्श अली – ₹63,100
हाजी शेख यासीन – ₹77,800
कमल रानी – ₹58,800
मो. अख्तर – ₹71,200
महावीर ट्रस्ट – ₹82,400
मन्नू धोबी – ₹61,000
बाबू सलाम गुलाम – ₹79,000
दालचंद – ₹55,000
मो. ईशाक – ₹73,000
मो. शाहिद / मो. वाजिद – ₹54,000
गवर्नमेंट पुलिस क्वार्टर – ₹90,000
जमना प्रसाद तिवारी – ₹90,000
बसंत चौरसिया – ₹65,000
सरदार सतनाम सिंह – ₹73,000
आनंत इन्वेस्टमेंट / शैलेश जैन – ₹74,000
अरविंद अग्रवाल – ₹85,000
सरदार गजेन्द्र सिंह बांगा – ₹95,000
महेंद्र जैन – ₹94,000
शशि चक्रवर्ती / धमेन्द्र चक्रवर्ती – ₹95,000
नीलकंठ दीक्षित – ₹83,000
सुनीता जैन – ₹83,000
रमेश पटैल – ₹80,000
कमला देवी असाटी – ₹78,000
रामलिमन भारत प्रसाद – ₹76,000
कल्लू प्रसाद पटैल – ₹73,000
नरसिंह दास रैकवार / तुलसीदास रैकवार – ₹62,000
सुधीर कुमार मिश्रा – ₹59,000
किशन सिंह परिहार – ₹56,000
फूला बाई साहू – ₹55,000
किरन कछवाहा – ₹50,000
पुरूषोत्तम लाल साहू – ₹58,000
आर आर विश्वकर्मा / दीपक विश्वकर्मा – ₹60,000
हीरा लाल चौधरी – ₹54,000
अनीला दुबे – ₹59,000
मुईनुद्दीन खान / मोहम्मद सईद – ₹64,000
मनीष श्रीवास्तव – ₹63,000
स्नेहिल पटैल – ₹66,000
राजकुमार / सुरेन्द्र कुमार पाठक – ₹58,000
शकुन साहू – ₹59,000
नरबदा बाई – ₹66,000
निगम की अपील
निगम आयुक्त ने नागरिकों से अपील की है कि वे समय पर सम्पत्तिकर, जलकर एवं उपभोक्ता प्रभार की राशि जमा करें, जिससे निगम की कार्यवाही से बचा जा सके।
पीआईबी, नई दिल्ली। दिल्ली और उत्तर भारत के इंडो-गैंगेटिक प्लेन (IGP) क्षेत्र की हवा अब सिर्फ धूल और धुएं से ही नहीं, बल्कि अदृश्य बैक्टीरिया से भी ज्यादा खतरनाक हो चुकी है। बोस इंस्टीट्यूट (Bose Institute), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के वैज्ञानिकों ने एक शोध में पाया है कि दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में हवा में मौजूद रोग फैलाने वाले बैक्टीरिया (Airborne Pathogens) कम आबादी वाले क्षेत्रों की तुलना में दो गुना अधिक पाए गए हैं।
हवा में तैरते बैक्टीरिया से सांस, पेट और त्वचा पर असर
शोध में खुलासा हुआ कि ये एयरबॉर्न पैथोजेनिक बैक्टीरिया फेफड़ों, आंतों (Gastro-Intestinal Tract), मुँह (Oral Infections) और त्वचा (Skin Infections) की बीमारियों के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। खास बात यह है कि ये बैक्टीरिया हवा में मौजूद PM2.5 कणों पर सवार होकर पूरे शहर में फैल जाते हैं। PM2.5 इतने छोटे कण होते हैं कि यह सीधे फेफड़ों की गहराई तक पहुँच जाते हैं और अपने साथ बैक्टीरिया को भी शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ले जाते हैं। यही वजह है कि दिल्ली में सांस की बीमारियाँ, खाँसी, एलर्जी और संक्रमण लगातार बढ़ रहे हैं।
सर्दियों और धुंध में सबसे ज्यादा खतरा –
बोस इंस्टीट्यूट के शोध प्रमुख डॉ. सनत कुमार दास के अनुसार, सर्दियों से गर्मियों में मौसम बदलने के दौरान, खासकर धुंध या हल्की बारिश के दिनों में, बैक्टीरिया का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। उस समय हवा स्थिर हो जाती है और प्रदूषण के साथ बैक्टीरिया लंबे समय तक हवा में बने रहते हैं।
दिल्ली क्यों है सबसे बड़ा हॉटस्पॉट?
दिल्ली, IGP का सबसे भीड़भाड़ वाला इलाका है
यहाँ पर हर साल सर्दियों में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आने से तापमान अचानक गिरता है
नमी (Humidity) बढ़ने और हवा रुकने से प्रदूषण और बैक्टीरिया दोनों इकट्ठे हो जाते हैं
ज्यादा आबादी वाले इलाकों (High Populated Regions) में बैक्टीरिया की मात्रा दोगुनी पाई गई है
शोध का महत्व
यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय जर्नल Atmospheric Environment: X में प्रकाशित हुआ है (DOI: 10.1016/j.aeaoa.2025.100351)। शोध के मुताबिक, दिल्ली जैसे मेगासिटी में लोग रोज़ाना प्रदूषित हवा के साथ-साथ इन अदृश्य बैक्टीरिया को भी साँस में ले रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर सरकार और स्वास्थ्य विभाग इस पर ध्यान दें तो भविष्य में बीमारियों के फैलाव की बेहतर भविष्यवाणी की जा सकती है, शहरी डिज़ाइन में बदलाव लाकर प्रदूषण कम किया जा सकता है और नागरिकों की सेहत को सुरक्षित रखा जा सकता है।
जबलपुर। स्वच्छता में देशभर में पांचवां स्थान हासिल करने के बाद नगर निगम जबलपुर ने एक और अभिनव पहल की है। अब मंदिरों और घरों की पूजन सामग्री को जल स्त्रोतों में विसर्जित करने के बजाय एकत्र कर उससे अगरबत्ती, धूपबत्ती और ऑर्गेनिक खाद बनाई जाएगी। इस पहल के अंतर्गत रानीताल स्थित हनुमान मंदिर से शुरुआत की गई, जहाँ से पूजन सामग्री को दो इलेक्ट्रिक वाहनों की सहायता से कलेक्ट कर कम्पोस्ट प्लांट तक पहुँचाया गया। इस परियोजना के तहत स्व-सहायता समूह की महिलाएं इन पूजन सामग्रियों से अगरबत्ती और धूपबत्ती बनाएंगी, जिससे उन्हें रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। महापौर अन्नू ने कहा कि संस्कारधानी की मातृशक्ति को इस योजना से सशक्त बनाया जाएगा।
नगर निगम अध्यक्ष रिकुंज विज ने कहा कि इस नवाचार से पूजन सामग्री अब जल स्त्रोतों में विसर्जित नहीं होगी, जिससे नदियों और तालाबों की साफ-सफाई भी बनी रहेगी। निगमायुक्त प्रीति यादव ने बताया कि यदि आवश्यकता हुई, तो और अधिक गाड़ियाँ और प्लांट्स की संख्या बढ़ाई जाएगी। इस अवसर पर राम सोनकर, दामोदर सोनी, अंशुल यादव, हर्षित यादव, डॉ. सुभाष तिवारी, उपायुक्त संभव अयाची, स्वास्थ्य अधिकारी अंकिता बर्मन, सहायक यंत्री अभिनव मिश्रा, स्वास्थ्य अधिकारी अर्जुन यादव और स्वच्छता निरीक्षक सौरभ तिवारी सहित कई अन्य अधिकारी मौजूद रहे। सभी नागरिकों से अपील की गई है कि अपने घरों की पूजन सामग्री को मंदिरों में रखे गए विशेष डस्टबिनों में ही डालें ताकि इसे सही तरीके से रीसायकल किया जा सके।
पीआईबी, दिल्ली. भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा देशभर में अनुसूचित जातियों सहित कलाकारों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘कला संस्कृति विकास योजना (Kala Sanskriti Vikas Yojana – KSVY) चलाई जा रही है। यह एक केंद्रीय क्षेत्र की समेकित योजना है, जिसके तहत प्रदर्शन कला से जुड़े संगठनों व व्यक्तियों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। 2021 से अब तक पिछले चार वर्षों में इस योजना के तहत ₹817.51 करोड़ की राशि व्यय की गई है। योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को प्रशिक्षण, सांस्कृतिक अवसर और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है, विशेष रूप से अनुसूचित जाति के कलाकारों, रंगमंच समूहों और लोक परंपराओं को बढ़ावा देने। वित्तीय सहायता का उपयोग सामान्य वित्तीय नियम (GFR) 2017 के अंतर्गत प्रमाणित उपयोग प्रमाण पत्र, बिल-वाउचर, फोटो/वीडियो और पूर्णता प्रमाणपत्र आदि के माध्यम से निगरानी की जाती है। साथ ही, मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा स्थलीय निरीक्षण भी किया जाता है।
कला संस्कृति विकास योजना (KSVY) के अंतर्गत प्रमुख उप-योजनाएँ:
1. गुरु-शिष्य परंपरा के संवर्धन हेतु वित्तीय सहायता (Repertory Grant):
थिएटर, संगीत और नृत्य के लिए गुरुओं व शिष्यों को सहायता। गुरु को ₹15,000 प्रतिमाह और शिष्य को ₹2,000 से ₹10,000 प्रतिमाह (उम्र के अनुसार) सहायता।
2. कला एवं संस्कृति संवर्धन हेतु वित्तीय सहायता: राष्ट्रीय स्तर की सांस्कृतिक संस्थाओं को सहायता: ₹1 करोड़ तक की सहायता, विशिष्ट मामलों में ₹5 करोड़ तक।
सांस्कृतिक आयोजन व उत्पादन अनुदान (CFPG): ₹5 लाख से ₹20 लाख तक सहायता।
हिमालयी सांस्कृतिक विरासत संरक्षण: ₹10 लाख तक की वार्षिक सहायता।
बौद्ध/तिब्बती संस्थानों हेतु सहायता: ₹30 लाख से ₹1 करोड़ तक।
भवन अनुदान (स्टूडियो थिएटर आदि): महानगरों में ₹50 लाख, गैर-महानगरों में ₹25 लाख तक।
घरेलू महोत्सव व मेले: ‘राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव’ के माध्यम से कलाकारों को मंच।
3. टैगोर सांस्कृतिक परिसरों के निर्माण हेतु सहायता – नए सांस्कृतिक स्थलों के निर्माण और पुराने केंद्रों के उन्नयन हेतु। ₹15 करोड़ तक की परियोजनाओं में 60:40 या 90:10 अनुपात में केंद्रीय सहायता।
4. छात्रवृत्ति और फैलोशिप योजनाएँ:
उत्कृष्ट व्यक्तियों हेतु फैलोशिप – जूनियर: ₹10,000/माह, सीनियर: ₹20,000/माह (2 वर्षों के लिए)।
युवा कलाकारों हेतु छात्रवृत्ति – 18-25 वर्ष की आयु के कलाकारों को ₹5,000/माह (2 वर्षों तक)।
5. वरिष्ठ कलाकारों के लिए वित्तीय सहायता: 60 वर्ष से अधिक उम्र के कलाकारों को ₹6,000/माह तक की सहायता। मृत्यु के बाद उनके जीवनसाथी को सहायता स्थानांतरित की जाती है।
6. सेवा भोज योजना (Seva Bhoj Yojna): मंदिरों, गुरुद्वारों, मस्जिदों, चर्च, मठ आदि द्वारा नि:शुल्क भोजन वितरण पर CGST व IGST की प्रतिपूर्ति।
संस्कारधानी की सड़कों पर आवारा पशुओं की धमाचौकड़ी से गंभीर दुर्घटनाएँ घट जाती हैं। जिस वजह से नागरिकों में इन्हें लेकर भय का माहौल भी बना रहता है। लेकिन अब आप इनसे डरने की बजाय कुछ नंबर अपने मोबाईल पर सेव कर लें और अगली बार आवारा पशुओं के दिखने पर इन्हें सूचित करें। जिसके बाद आपकी समस्या का निदान हो काएगा। कुछ ऐसा ही सोचकर नगर निगम जबलपुर ने आवारा मवेशियों पर प्रभावी नियंत्रण और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये विधानसभा क्षेत्रवार कर्मचारियों की ड्यूटी तय की है। इस संबंध में निगमायुक्त प्रीति यादव ने आदेश जारी करते हुए अपर आयुक्त को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है, साथ ही निर्देश दिया है कि समस्त कार्रवाई फायर अधीक्षक कुसाग्र ठाकुर के निर्देशन में संपन्न होगी। वहीं नोडल अधिकारी वी.एन. बाजपेयी ने जानकारी देते हुए बताया कि नगर निगम सीमा के प्रमुख मार्गों, चौराहों और यातायात सघन क्षेत्रों में मवेशियों की अनियंत्रित गतिविधियां यातायात में बाधा के साथ-साथ जनहानि की आशंका भी उत्पन्न करती हैं। इस समस्या के समाधान हेतु विधानसभा क्षेत्रवार कर्मचारियों की ड्यूटी निर्धारित की गई है, जो सुबह और शाम दो पालियों में कार्य करेंगे।
प्रातः 8:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक:
पश्चिम विधानसभा क्षेत्र: शिव प्रसाद लोधी – 9752578128
कैंट विधानसभा क्षेत्र: प्रमोद कुमार – 9907777248
उत्तर विधानसभा क्षेत्र: ओमप्रकाश दुबे – 7440541828
पूर्व एवं पनागर विधानसभा क्षेत्र: ओमप्रकाश यादव – 7694071426
सायं 6:00 बजे से रात्रि 12:00 बजे तक:
पश्चिम विधानसभा क्षेत्र: ऋतुरंजन – 7879077931
कैंट विधानसभा क्षेत्र: सुरेन्द्र राजपूत – 9302981506
उत्तर विधानसभा क्षेत्र: महेश मलिक – 6267932021
पूर्व एवं पनागर विधानसभा क्षेत्र: संतोष यादव – 9584255742
ये होंगे इनके काम – इन कर्मचारियों का कार्य न केवल फील्ड में सक्रिय रहना होगा, बल्कि आउटसोर्स हॉंका टीम का पर्यवेक्षण एवं समन्वय भी करना होगा। यह सभी कर्मचारी मवेशियों की धरपकड़, उनके सुरक्षित परिवहन और पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।
पकड़े गए गाय, भैंस, बछड़े आदि को नगर निगम द्वारा संचालित गौसेवा केन्द्र – कॉंजीहौस में भेजा जाएगा, जबकि सांड और बैल जैसे मवेशियों को निगम सीमा से बाहर ऐसे स्थलों पर छोड़ा जाएगा जहां प्राकृतिक जलस्रोत, घास एवं चारा उपलब्ध हो।
इस अभियान की समुचित निगरानी हेतु सहायक अग्निशमन अधिकारी निलेश पाटीदार को हॉंका कार्रवाई का प्रभारी अधिकारी और राजेन्द्र पटैल को गौसेवा केन्द्र-प्रबंधन का प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया है। दोनों अधिकारी फायर अधीक्षक कुसाग्र ठाकुर के मार्गदर्शन में कार्य करेंगे।
बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान (Salman Khan) और साउथ की प्रसिद्ध अभिनेत्री रश्मिका मंदाना (Rashmika Mandanna) की आगामी फिल्म ‘सिकंदर’ (Sikandar) ने अपनी रिलीज़ से पहले ही दर्शकों के बीच भारी उत्सुकता पैदा कर दी है। यह फिल्म 30 मार्च 2025 को ईद के अवसर पर सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने जा रही है。
कहानी कुछ ऐसी है – ‘सिकंदर’ एक एक्शन-थ्रिलर फिल्म है, जिसमें सलमान खान एक बहादुर और निडर व्यक्ति की भूमिका निभा रहे हैं, जो समाज में न्याय और सच्चाई के लिए संघर्ष करता है। फिल्म की कहानी उनके संघर्ष, साहस और अदम्य इच्छाशक्ति को दर्शाती है, जो दर्शकों को रोमांचित करेगी। रश्मिका मंदाना उनकी प्रेमिका और पत्नी की भूमिका में नजर आएंगी, जो कहानी में रोमांस और गहराई लाती हैं।
स्टारकास्ट और निर्माण दल –
निर्देशक: ए.आर. मुरुगादॉस (A.R. Murugadoss), जिन्होंने ‘गजनी’ (Ghajini) और ‘हॉलिडे’ (Holiday) जैसी सफल फिल्मों का निर्देशन किया है।
निर्माता: साजिद नाडियाडवाला (Sajid Nadiadwala), जो सलमान खान के साथ पहले भी ‘किक’ (Kick) जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म में काम कर चुके हैं।
संगीतकार: प्रीतम (Pritam), जो अपने मेलोडियस और चार्टबस्टर गानों के लिए प्रसिद्ध हैं।
अन्य कलाकार: काजल अग्रवाल (Kajal Aggarwal), सत्यराज (Sathyaraj), शरमन जोशी (Sharman Joshi), प्रतीक बब्बर (Prateik Babbar), अंजिनी धवन (Anjini Dhawan) और जतिन सरना (Jatin Sarna) महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे।
फिल्म में देखने मिलेगा ये – फिल्म का ट्रेलर 23 मार्च 2025 को रिलीज़ हुआ, जिसमें सलमान खान के डैशिंग अवतार और रश्मिका मंदाना के साथ उनकी केमिस्ट्री ने दर्शकों का दिल जीत लिया। लगभग 2 घंटे 20 मिनट इस फिल्म में एक्शन, रोमांस और कॉमेडी देखने को मिलेगी।
प्रशंसकों की प्रतिक्रिया – ‘सिकंदर’ को लेकर दर्शकों में भारी उत्साह है। फिल्म के ट्रेलर और गानों को दर्शकों से मिला-जुला रिस्पॉन्स मिला है। पहले रिव्यू के अनुसार, यह फिल्म विस्फोटक, तीव्र और बेहद रोमांचक है, जिसमें सलमान खान का स्वैग और रश्मिका मंदाना की ग्रेस देखते ही बनती है। यह एक 100% ओरिजिनल कहानी है और किसी साउथ फिल्म का रीमेक नहीं है।
बॉक्स ऑफिस की उम्मीदें – फिल्म से बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, ‘सिकंदर’ पहले दिन लगभग 40 करोड़ रुपये की कमाई कर सकती है, जो इसे साल की सबसे बड़ी ओपनिंग फिल्मों में से एक बना सकती है। सलमान खान और रश्मिका मंदाना की ‘सिकंदर’ अपनी स्टारकास्ट, कहानी और निर्देशन के कारण पहले ही दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन चुकी है। ईद (EID 2025) के मौके पर इसकी रिलीज़ से दर्शकों को एक बेहतरीन मनोरंजन की उम्मीद है।