
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दमोह के लैब अटेंडेंट को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार को तीन माह में तीसरी क्रमोन्नति और बकाया वेतन देने का आदेश दिया। यह फैसला 30 साल सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों के लिए अहम माना जा रहा है।
दमोह के लैब अटेंडेंट ने तीसरी क्रमोन्नति की मांग की थी।
कर्मचारी ने 30 साल की सेवा पूरी कर ली थी।
विभाग ने समय पर लाभ नहीं दिया था।
मामला हाईकोर्ट पहुंचा और सुनवाई हुई।
कोर्ट ने तीन माह में लाभ देने का आदेश दिया।
शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर
जबलपुर से आई यह खबर कई कर्मचारियों के लिए अहम है।मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने दमोह के लैब अटेंडेंट को राहत दी है।कोर्ट ने राज्य सरकार को साफ निर्देश दिए हैं।तीसरी क्रमोन्नति और बकाया राशि तीन माह में देनी होगी।कोर्ट ने यह भी कहा कि आदेश की प्रति मिलने के बाद समय गिना जाएगा।देरी होने पर जिम्मेदारी विभाग की मानी जाएगी।इससे साफ संदेश गया है कि नियमों की अनदेखी नहीं चलेगी।
30 साल की सेवा के बाद भी नहीं मिला लाभ
हरिनारायण साहू दमोह जिले के निवासी हैं। वह स्कूल शिक्षा विभाग में लैब अटेंडेंट हैं। उन्होंने 30 साल से अधिक सेवा पूरी कर ली थी।नियम के अनुसार उन्हें तीसरी क्रमोन्नति मिलनी चाहिए थी। लेकिन विभाग ने समय पर यह लाभ नहीं दिया।
इसी कारण उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। उनकी ओर से अधिवक्ता शुभम मिश्रा ने कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर की। यह याचिका WP 6432 2026 के रूप में दर्ज हुई। उन्होंने 5 जनवरी 2025 से लाभ लागू करने की मांग रखी।
पहले के बैंचमार्क फैसले का दिया गया हवाला
सुनवाई के दौरान कर्मचारी की ओर से अधिवक्ता शुभम मिश्रा ने अहम तर्क रखे। वकील ने कहा कि मामला पहले के फैसले जैसा है।उन्होंने एस.पी. मिश्रा बनाम मध्य प्रदेश राज्य केस का जिक्र किया।उस मामले में भी कर्मचारी को तीसरी क्रमोन्नति मिली थी। कोर्ट ने तब साफ कहा था कि 30 साल सेवा पूरी होना पर्याप्त है। इसलिए समान स्थिति में समान लाभ मिलना चाहिए। सरकार की ओर से पेश वकील ने इस तथ्य से इनकार नहीं किया। उन्होंने यह नहीं कहा कि मामला अलग है। इससे कोर्ट के सामने तस्वीर साफ हो गई।
जस्टिस भट्टी की बेंच से मिली राहत
मामले की सुनवाई जस्टिस मनिंदर एस. भट्टी की एकल पीठ ने की।कोर्ट ने माना कि कर्मचारी ने सेवा अवधि पूरी की है। ऐसी स्थिति में लाभ रोकना उचित नहीं है। कोर्ट ने आदेश में साफ लिखा कि तीसरी क्रमोन्नति दी जाए। सभी वित्तीय लाभों की गणना की जाए।
बकाया राशि तीन माह के भीतर दी जाए। यह आदेश पहले दिए गए फैसले के अनुरूप होगा। विभाग को नियमों के अनुसार कार्रवाई करनी होगी। कोर्ट ने स्पष्ट समय सीमा तय कर सख्ती दिखाई।
क्या होती है तीसरी क्रमोन्नति
तीसरी क्रमोन्नति समयमान वेतनमान का लाभ है।।यह पदोन्नति नहीं बल्कि वेतन वृद्धि है। 30 साल की सेवा पूरी होने पर यह दी जाती है। इसका मकसद अनुभव का सम्मान करना है। लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारी को आर्थिक राहत मिलती है। इससे उनका मनोबल मजबूत होता है। यदि विभाग समय पर लाभ नहीं देता तो विवाद पैदा होता है। कई कर्मचारी ऐसे मामलों में न्याय की उम्मीद रखते हैं। यह फैसला उनके लिए भी राह खोल सकता है।
फैसले से शिक्षा विभाग में बढ़ी हलचल
इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग में चर्चा तेज है।।कई कर्मचारी वर्षों से लाभ की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब उन्हें भी उम्मीद की किरण दिखी है। कानूनी जानकार मानते हैं कि यह आदेश अहम है। समान मामलों में इसे आधार बनाया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर कर्मचारी कोर्ट का सहारा ले सकते हैं। दमोह के इस कर्मचारी की लड़ाई लंबी रही। उन्हें अपना हक पाने के लिए कानूनी रास्ता चुनना पड़ा। अब कोर्ट के आदेश से उन्हें राहत मिली है।



