खमरिया, खिरवा और बरगी गांव की महिलाओं ने शराब बेचने आए व्यक्ति को घेरकर बोतलें छीन लीं और बीच सड़क तोड़ दीं।महिलाओं ने प्रशासन को बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है।
@फैज़ वारसी जबलपुर के बाद अब सिहोरा क्षेत्र में भी अवैध शराब के खिलाफ महिलाओं का आक्रोश खुलकर सड़क पर दिखा। सिहोरा के खमरिया, खिरवा और बरगी गांव की महिलाओं ने शराब बेचने आए व्यक्ति को घेरकर बोतलें छीन लीं और बीच सड़क तोड़ दीं। महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि अवैध शराब पर रोक नहीं लगी तो जिला स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

महिलाओं और बच्चों ने बीच सड़क फोड़ी अवैध शराब की बोतलें
सिहोरा क्षेत्र में अवैध शराब के खिलाफ सड़क पर उतरी महिलाएं
सिहोरा थाना क्षेत्र के गांव खमरिया, खिरवा और बरगी में अवैध शराब की बिक्री से परेशान महिलाओं ने गुरुवार को जोरदार प्रदर्शन किया। महिलाओं को सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति एक्टिवा में शराब भरकर गांव में बेचने की तैयारी कर रहा है। सूचना मिलते ही महिलाएं मौके पर पहुंचीं, व्यक्ति को घेर लिया और उसके पास मौजूद शराब छीनकर सड़क पर फेंक दी। प्रदर्शन कर रही महिलायें वीडियो में पुलिस पर भी आरोप लगाते सुनाई दे रही हैं। महिलाओं के अनुसार पुलिस को सूचना देने के बाद भी 2 घंटे तक पुलिस जब कार्यवाही करने नहीं आई तब उन्होंने मामला अपने हाथ में लिया।
बीच सड़क तोड़ी गईं शराब की बोतलें, गूंजे नारे
महिलाओं ने सड़क पर ही शराब की बोतलें फोड़ते हुए जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि अवैध शराब के कारण गांव का माहौल बिगड़ चुका है, आए दिन विवाद और मारपीट की घटनाएं हो रही हैं। नशे के कारण परिवार तबाह हो रहे हैं और युवा पीढ़ी तेजी से इसकी चपेट में आ रही है।
पहले भी किया था थाने का घेराव, फिर भी नहीं रुका कारोबार
महिलाओं ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने विरोध दर्ज कराया हो। अक्टूबर महीने में भी शराबबंदी की मांग को लेकर सिहोरा थाना का घेराव किया गया था, लेकिन इसके बावजूद क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार बेरोकटोक जारी रहा। इसी लापरवाही के चलते महिलाओं को अब खुद सड़क पर उतरना पड़ा।
सूचना पर पहुंचा आबकारी और पुलिस अमला, महिलाओं ने लगाए आरोप
प्रदर्शन की सूचना मिलते ही आबकारी विभाग और सिहोरा थाने का स्टाफ मौके पर पहुंचा। बड़ी संख्या में ग्रामीण भी घटनास्थल पर जमा हो गए थे। जब पुलिस के द्वारा इस शराब को जब्त करने की बात की गई, तो महिलाओं ने आरोप लगाए कि सूचना के 2 बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं। अधिकरियों ने किसी तरह आक्रोशित महिलाओं को शांत कराया, लेकिन महिलाओं का कहना साफ था कि अब केवल आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए।

नशे से बिगड़ रहा सामाजिक माहौल
प्रदर्शन कर रहीं महिलाओं का आरोप है कि खमरिया और खिरवा गांव में चारों ओर अवैध शराब बेची जा रही है। शराबियों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे महिलाओं और बच्चों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। युवाओं में नशे की लत तेजी से बढ़ रही है और इसका सीधा असर गांव की शांति और सुरक्षा पर पड़ रहा है।
सिंधी कैंप की मौतों का जिक्र हुआ ताज़ा
जबलपुर के सिंधी कैंप इलाके में बीते कुछ महीनों में 19 मौतों के बाद महिलाओं ने एसपी ऑफिस और कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराया था। अब आरोप है कि जांच के नाम पर आबकारी विभाग ने केवल औपचारिकता निभाई और यह जानने की कोशिश की गई कि मौतें कितने दिनों में हुईं, न कि यह कि शराब कहां से लाई गई थी। जो जांच की गई इसका मकसद सिर्फ यही नजर आया कि किस तरह से इन मौतों से पुलिस सहित आबकारी विभाग अपना पल्ला झाड़ ले।

FIR के आंकड़ों के सहारे मौतों को छिपाने का प्रयास
इस मामले में जो जांच की गई उसमें आबकारी विभाग ने क्षेत्रीय थाना प्रभारी से पूछा है कि शराब पीने से क्षेत्र में कितनी मौत हुई हैं। जिसका जवाब साफ है कि जिस थाने में अवैध शराब बिक्री ही थाना प्रभारी के संरक्षण में हो रही हो, वहां शराब से मौत के मामले में एफआईआर दर्ज होना तो नामुमकिन ही है। इस क्षेत्र के अवैध शराब बिक्री के कुछ वीडियो भी वायरल हुए है जो पुलिस सहित आबकारी के जिम्मेदारों की पोल खोल रहे हैं।
आबकारी के पंचनामे ही खोल रहे पोल
आबकारी विभाग ने मृतकों के परिजनों से बयान लेकर पंचनामे तैयार किए हैं। बयान में सवाल ही वही पूछे गए जो विभाग का बचाव करते हों। जैसे यह तो पूछा गया कि मृतक को शराब की लत कब से थी। लेकिन यह नहीं पूछा गया कि वह शराब खरीदता किससे था। यहां तक की कई परिजन तो अनपढ़ भी हैं जिन्होंने आबकारी के तथाकथित बयान पर अंगूठे लगाए हैं। आमतौर पर इस बस्ती में निम्न आय वर्ग के लोग रहते हैं, और शराब से मौत होने के बाद यह ना तो पुलिस शिकायत करते हैं ना ही शव का पोस्टमार्टम कराते हैं, इसलिए इस तरह की मौतों के मामले दब कर रह जाते हैं। लेकिन हैरानी की बात यह थी कि आबकारी विभाग के अधिकारियों को क्षेत्र में पड़ी हुई कच्ची शराब की पन्नियां भी नजर नहीं आई। हालांकि यह नजर आती भी कैसे क्योंकि जांच तो सिर्फ मामला दबाने के लिए की गई थी।

नस्ल के लिए काल बन रही अवैध शराब
अब आबकारी विभाग और पुलिस सहित प्रशासन चाहे जितनी सफाई दे जबलपुर के नागरिक जानते हैं कि अवैध शराब बिक्री की असलियत क्या है। जगह-जगह मैदानो से लेकर पार्कों तक में इसके सबूत नज़र आते हैं। लेकिन जब नजरअंदाज करने की ठान ही ली जाए तो फिर कुछ कैसे नज़र आ सकता है। पीड़ित तो बस अब यही दुआ कर रहे हैं कि चंद नोटो के लिए ऐसे व्यापार को नजरअंदाज करने वालों के परिवार पर भी कुछ ऐसा घटे कि उन्हें अपने कर्म याद आ जाएं। अब इन्हें सद्बुद्धि देने के लिए पीड़ितों को भगवान का ही सहारा रह गया है।





