28 दिन तक रिटायर्ड प्रोफेसर को रखा डिजिटल अरेस्ट, ठगी में जबलपुर कनेक्शन बेनकाब

रतलाम में सामने आए ‘डिजिटल अरेस्ट’ के सनसनीखेज साइबर ठगी मामले ने जबलपुर तक अपनी जड़ें फैला दी हैं। रिटायर्ड प्रोफेसर से 1.34 करोड़ की ठगी में जबलपुर के आरोपियों की अहम भूमिका उजागर हुई है। एसपी अमित कुमार के निर्देशन में रतलाम पुलिस ने अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर बड़ा नेटवर्क तोड़ा है।

फैज वारसी (जबलपुर) रतलाम के दीनदयाल नगर थाना क्षेत्र में सामने आए इस हाई-प्रोफाइल साइबर क्राइम में आरोपियों ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर रिटायर्ड प्रोफेसर को डिजिटल अरेस्ट में रखा। लगातार वीडियो कॉल, फर्जी कोर्ट कार्यवाही और गिरफ्तारी की धमकी देकर पीड़ित को 28 दिनों तक मानसिक रूप से बंधक बनाए रखा गया। इसी दबाव में उनसे अलग-अलग बैंक खातों में 1 करोड़ 34 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए।

जबलपुर के खातों से हुआ लाखों का लेनदेन

जांच के दौरान रतलाम पुलिस को ठगी की रकम का अहम ट्रेल जबलपुर से मिला। यहां से अशोक जायसवाल, सनी जायसवाल और सारांश तिवारी सहित एक नाबालिग को गिरफ्तार किया गया। पुलिस जांच में सामने आया कि इन आरोपियों के बैंक खातों में लाखों रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ था, जो सीधे ठगी की रकम से जुड़ा हुआ है। इन खातों का इस्तेमाल आगे क्रिप्टोकरेंसी खरीदने में किया गया।

अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का हिस्सा थे आरोपी

एसपी अमित कुमार के निर्देशन में गठित 18 सदस्यीय SIT की जांच में खुलासा हुआ कि यह कोई अकेली वारदात नहीं, बल्कि संगठित अंतरराज्यीय साइबर गिरोह है। गिरोह के तार कश्मीर, गुजरात, बिहार, असम और मध्य प्रदेश से जुड़े हैं। ठगी की रकम सूरत के रास्ते क्रिप्टोकरेंसी में बदली गई और कंबोडिया तक पहुंचाई गई।

जबलपुर से लेकर गुजरात-बिहार तक गिरफ्तारी

पुलिस ने जबलपुर के आरोपियों के अलावा नीमच से पवन कुमावत, उत्तर प्रदेश से NGO संचालक अमरेन्द्र मौर्य और गुजरात से आरिफ घाटा, हमीद खान पठान, शाहिद कुरैशी व सादिक हसन समा को भी गिरफ्तार किया है। इन सभी पर ठगी की रकम को घुमाने और क्रिप्टो के जरिए अवैध लाभ कमाने का आरोप है।

11 लाख रूपये फ्रीज, जांच जारी

रतलाम पुलिस ने अब तक 11 लाख रुपये की राशि फ्रीज करवाई है। मुख्य खातों की फॉरेंसिक ट्रेसिंग में करोड़ों के संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। पुलिस का कहना है कि कई अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश तेजी से जारी है।

पुलिस की चेतावनी: डिजिटल अरेस्ट से रहें सतर्क

एसपी अमित कुमार ने साफ कहा कि पुलिस या कोर्ट कभी भी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी या डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। अनजान कॉल, फर्जी नोटिस और कथित अधिकारियों से डरकर कोई भी रकम ट्रांसफर न करें। यह कार्रवाई न सिर्फ रतलाम पुलिस की बड़ी सफलता है, बल्कि आम नागरिकों के लिए एक कड़ी चेतावनी भी है कि साइबर ठग अब नए और खतरनाक मनोवैज्ञानिक हथकंडे अपना रहे हैं।

जबलपुर से बांग्लादेशी घुसपैठियों की वापसी, कोर्ट के आदेश पर कोलकाता बॉर्डर से किया गया डिपोर्ट

अवैध रूप से भारत में घुसे बांग्लादेशी नागरिकों को जिला अदालत ने 4 साल की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने सजा को 2 साल करते हुए इन्हें बांग्लादेश डिपोर्ट करने के आदेश दिए है।

जबलपुर में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिक मिनारा बेगम और मोहम्मद मोसूर को आखिरकार भारत से वापस बांग्लादेश भेज दिया गया है। हाईकोर्ट के निर्देश पर दोनों को कोलकाता बॉर्डर के माध्यम से डिपोर्ट किया गया। इससे पहले जिला अदालत ने विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत दोनों को चार-चार साल की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में हाईकोर्ट ने घटाकर दो साल कर दिया और सजा पूरी होने के बाद डिपोर्ट करने के आदेश दिए थे।

साल 2023 में जबलपुर पुलिस ने की थी गिरफ्तारी

अभियोजन के अनुसार, 5 अप्रैल 2023 को गोरखपुर थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि एक युवक और युवती अवैध रूप से जबलपुर क्षेत्र में रह रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने महर्षि स्कूल के पास स्थित मैदान से दोनों को संदिग्ध अवस्था में पकड़ा। पूछताछ में उन्होंने अपने नाम मोहम्मद मोसूर उर्फ शेख (उम्र 38 वर्ष) और मिनारा बेगम (उम्र 23 वर्ष), निवासी बांग्लादेश बताए थे।पुलिस द्वारा पासपोर्ट, वीजा और किसी भी प्रकार का भारतीय पहचान पत्र मांगे जाने पर दोनों कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। पूछताछ में उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि वे पिछले तीन-चार महीनों से जबलपुर में रह रहे थे। इसके बाद पुलिस ने विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया।

हाईकोर्ट का मानवीय और कानूनी संतुलन वाला आदेश

मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां सजा की अवधि पर पुनर्विचार किया गया। हाईकोर्ट ने चार साल की सजा को घटाकर दो साल कर दिया और निर्देश दिए कि सजा पूरी होने के बाद दोनों आरोपियों को उनके देश बांग्लादेश डिपोर्ट किया जाए। हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में संबंधित एजेंसियों ने प्रक्रिया पूरी करते हुए मिनारा बेगम और मोहम्मद मोसूर को कोलकाता बॉर्डर के जरिए बांग्लादेश भेज दिया। इस कार्रवाई के साथ जबलपुर में सामने आए बांग्लादेशी घुसपैठ के इस मामले का कानूनी अध्याय समाप्त हो गया।

जिला अदालत ने सुनाई थी चार-चार साल की सजा

मामले की सुनवाई के दौरान जिला न्यायालय ने पाया कि आरोपी भारतीय नागरिक होने का कोई भी प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाए। वहीं, गिरफ्तारी के समय उन्होंने स्वयं को बांग्लादेशी नागरिक बताया था। अपर सत्र न्यायाधीश विपिन सिंह भदौरिया की अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोनों को चार-चार साल के कठोर कारावास और दस-दस रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने सजा को 2 साल करते हुए इन घुसपैठियों को बांग्लादेश डिपोर्ट करने का आदेश जारी किया।

IAS गजेंद्र सिंह नागेश की ‘सरेआम सजा’ पर PM तक पहुँची शिकायत, नरसिंहपुर में युवक से मारपीट और पुरोहित से की थी अभद्रता

नरसिंहपुर में पदस्थ IAS अधिकारी गजेंद्र सिंह नागेश का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुँच गया है। वीडियो में अधिकारी युवक को थप्पड़ मारते और एक बुजुर्ग पुरोहित को ज़मीन में गाड़ने की धमकी देते नजर आ रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम को सिविल सेवा आचरण नियमों और संविधान का उल्लंघन बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

बरमान घाट का वायरल वीडियो, प्रशासनिक गरिमा पर गंभीर आघात

मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के नर्मदा तट स्थित बरमान घाट से जुड़ा यह वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। वीडियो में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं IAS अधिकारी गजेंद्र सिंह नागेश आम नागरिकों के साथ अभद्र और कथित रूप से हिंसक व्यवहार करते दिखाई दे रहे हैं, जिससे प्रशासनिक गरिमा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

युवक को थप्पड़, बुजुर्ग पुरोहित को ‘ज़मीन में गाड़ने’ की धमकी

वीडियो में IAS अधिकारी एक युवक को खुलेआम थप्पड़ मारते नजर आते हैं। इसके साथ ही एक बुजुर्ग पुरोहित के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग करते हुए उन्हें “ज़मीन में आधा गाड़ देने” की धमकी दी जाती है। मौके पर मौजूद अधिकारी का सुरक्षाकर्मी भी कथित रूप से मारपीट में शामिल दिखाई देता है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।

‘पेशाब क्यों किया?’— मौके पर ही खुद बन बैठे जज

वायरल फुटेज में यह भी सुना जा सकता है कि अधिकारी नर्मदा नदी के किनारे पेशाब करने को लेकर सवाल कर रहे हैं। आरोप है कि इस कथित अपराध पर IAS अधिकारी ने कानूनन प्रक्रिया अपनाने के बजाय मौके पर ही खुद को न्यायाधीश मानते हुए शारीरिक दंड देना शुरू कर दिया, जबकि ऐसे मामलों में केवल जुर्माना या वैधानिक कार्रवाई का प्रावधान है।

PM को भेजी गई शिकायत में सिविल सेवा आचरण अधिनियम के उल्लंघन का आरोप

मामले को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर के अधिवक्ता विवेक तिवारी ने प्रधानमंत्री को औपचारिक शिकायत भेजी है। शिकायत में कहा गया है कि इस प्रकार का आचरण सिविल सेवा आचरण नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है और एक IAS अधिकारी द्वारा पद की मर्यादा और शक्ति का दुरुपयोग किया गया है।

‘भारत में तालिबानी सजा का कोई प्रावधान नहीं’

अधिवक्ता विवेक तिवारी ने शिकायत में स्पष्ट किया गया है कि भारत में सजा देने का अधिकार केवल न्यायालयों को है। अपराध की स्थिति में सजा या तो जुर्माने के रूप में दी जाती है या न्यायिक प्रक्रिया के बाद जेल में निरुद्ध कर। खुले सार्वजनिक स्थान पर थप्पड़ मारना या धमकी देना भारतीय संविधान और विधि व्यवस्था के विपरीत है।

कैदियों को भी मानवाधिकार, फिर आम नागरिकों के साथ मारपीट क्यों?

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत में कैदियों तक को मानवाधिकार प्राप्त हैं। ऐसे में एक IAS अधिकारी द्वारा आम नागरिकों के साथ सार्वजनिक रूप से मारपीट और अपमानजनक व्यवहार करना न केवल गैरकानूनी बल्कि अमानवीय भी है।

प्रधानमंत्री से सख्त कार्रवाई की मांग, वीडियो पर संज्ञान लेने का आग्रह

अधिवक्ता विवेक तिवारी ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि वायरल वीडियो का स्वतः संज्ञान लेकर संबंधित IAS अधिकारी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया जाए और विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में कोई अधिकारी कानून को अपने हाथ में लेने का साहस न कर सके।

देशभर में प्रशासनिक जवाबदेही पर बहस

यह प्रकरण अब केवल नरसिंहपुर तक सीमित नहीं रहा। प्रधानमंत्री तक शिकायत पहुँचने के बाद यह मामला देशभर में प्रशासनिक जवाबदेही, सिविल सेवा की मर्यादा और संविधान की सर्वोच्चता को लेकर नई बहस को जन्म दे रहा है।

RTO की कुर्सी पर बैठकर करोड़! ED ने संतोष पॉल की 3.38 करोड़ की संपत्ति की कुर्क

मध्य प्रदेश परिवहन विभाग में पदस्थ संतोष पॉल और उनकी पत्नी रेखा पॉल की कमाई और संपत्ति अब जांच एजेंसियों के कठघरे में है। आय के मुकाबले कई गुना अधिक संपत्ति, नकद लेन–देन का संदिग्ध पैटर्न और बैंक खातों की गहन पड़ताल ने मामले को गंभीर बना दिया है। प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई ने प्रशासनिक तंत्र में फैले भ्रष्टाचार पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिकायत के बाद FIR और फिर कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय (ED), भोपाल जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत यह कार्रवाई आर्थिक अपराध शाखा (EOW), भोपाल द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की। यह एफआईआर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं में दर्ज की गई थी, जिसमें क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) संतोष पाल और वरिष्ठ लिपिक श्रीमती रेखा पाल पर अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगाए गए थे। ईडी ने एफआईआर के बाद मामले को मनी लॉन्ड्रिंग के दृष्टिकोण से जांच में लिया।

आय और संपत्ति का चौंकाने वाला अंतर

ईडी की विस्तृत जांच में सामने आया कि संतोष पाल और रेखा पाल की कुल सत्यापित वैधानिक आय लगभग 73.26 लाख रुपये थी। इसके विपरीत, जांच अवधि के दौरान उन्होंने करीब 4.80 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की और उस पर खर्च किया। एजेंसी के अनुसार, करीब 4.06 करोड़ रुपये की संपत्ति आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक पाई गई, जिसे स्पष्ट रूप से Disproportionate Assets की श्रेणी में रखा गया।

नकद जमा और EMI से जुड़ा संदिग्ध पैटर्न

जांच के दौरान बैंक खातों के विश्लेषण में एक खास पैटर्न सामने आया। ईडी के अनुसार, आरोपियों के खातों में बार-बार बड़ी मात्रा में नकद जमा किया गया, और ये जमा प्रायः लोन की EMI चुकाने से ठीक पहले किए जाते थे। जांच एजेंसी का मानना है कि यह तरीका बैंकिंग प्रणाली के जरिए बिना हिसाब की नकदी को खपाने और वैध दिखाने की मंशा को दर्शाता है, जो मनी लॉन्ड्रिंग की एक सामान्य कार्यप्रणाली मानी जाती है।

इन संपत्तियों पर चला ईडी का चाबुक

ईडी ने जांच के आधार पर लगभग 3.38 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। इन संपत्तियों में जबलपुर जिले में स्थित आवासीय मकान, आवासीय प्लॉट, कृषि भूमि और व्यावसायिक दुकानें शामिल हैं। जांच एजेंसी ने इन सभी अचल संपत्तियों को “अपराध की आय” (Proceeds of Crime) मानते हुए PMLA के तहत कार्रवाई की है।

PMLA के तहत आगे क्या हो सकता है

कानूनी जानकारों के अनुसार, अस्थायी कुर्की के बाद यदि आरोप साबित होते हैं, तो ये संपत्तियां स्थायी रूप से जब्त की जा सकती हैं। साथ ही, मामले में ईडी द्वारा अभियोजन की कार्रवाई भी की जा सकती है, जिससे आरोपियों को लंबी कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। यह मामला न केवल व्यक्तिगत स्तर पर, बल्कि पूरे परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

ED की सख्ती लेकिन अभी भी पद पर संतोष पॉल

ईडी की यह कार्रवाई यह संकेत देती है कि आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियां अब और अधिक सख्त रुख अपना रही हैं। परिवहन जैसे संवेदनशील विभाग में हुई इस कार्रवाई को प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ एक अहम कदम के तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन हैरानी की बात यह है की परिवहन विभाग के द्वारा संतोष पॉल कट ट्रांसफर वापस जबलपुर कर दिया गया है। हालांकि उन्हें विभाग के कानूनी मामले देखने के लिए प्रभार दिया गया है, लेकिन जानकारी के अनुसार वह खुद जबलपुर RTO बने बैठे हैं और RTO के अधिकार क्षेत्र के आदेश भी जारी कर रहे हैं।

हनुमानताल थाने पर फर्जी FIR का गंभीर आरोप, अधिवक्ता संघ से की गई शिकायत

जबलपुर के हनुमानताल थाने पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगे हैं, जहां एक अधिवक्ता के खिलाफ फर्जी FIR दर्ज करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि मारपीट की शिकायत दर्ज कराने के बाद थाने में ही बैठे अधिवक्ता पर काउंटर केस दर्ज कर दबाव बनाया गया। एक ही तारीख की घटना दिखाकर दर्ज की गई दो FIRs ने पुलिस की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

जबलपुर के हनुमानताल थाना क्षेत्र में पुलिस कार्यप्रणाली को लेकर एक और बड़ा विवाद सामने आया है। अवैध शराब बिक्री को संरक्षण देने के आरोपों से पहले ही घिरे हनुमानताल थाने पर अब एक अधिवक्ता के खिलाफ थाने में बैठे-बैठे फर्जी FIR दर्ज करने का आरोप लगा है। मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि पीड़ित कोई आम नागरिक नहीं, बल्कि पेशे से अधिवक्ता हैं, जिन्होंने पुलिस पर दबाव बनाकर झूठा काउंटर केस दर्ज करने का आरोप लगाया है।

हमले की FIR के बाद अधिवक्ता पर ही दर्ज हो गया काउंटर केस

मामला 22 नवंबर की रात का है। अधिवक्ता दिनेश गुप्ता के घर के बाहर कुछ लोग पटाखे फोड़ रहे थे। जब उन्होंने दरवाजे के सामने पटाखे फोड़ने से मना किया तो आरोपी आक्रोशित हो गए और अधिवक्ता व उनके परिवार के साथ मारपीट कर दी। इस घटना की शिकायत पर हनुमानताल थाना पुलिस ने उसी रात लगभग 11 बजे अनुज रैकवार, मनोज वंशकार, विनोद, आयुष और कंचन रैकवार के खिलाफ FIR दर्ज की।
लेकिन हैरानी की बात यह रही कि अगले ही दिन 23 नवंबर की रात करीब 9:30 बजे पुलिस ने उसी अधिवक्ता के खिलाफ काउंटर FIR दर्ज कर ली। सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि अधिवक्ता के खिलाफ दर्ज काउंटर केस में भी घटना की तारीख 22 नवंबर ही दर्शाई गई, जबकि शिकायत एक दिन बाद की बताई जा रही है।

सेटअप कर थाने में ही दर्ज की गई फर्जी FIR – अधिवक्ता का आरोप

अधिवक्ता दिनेश गुप्ता का आरोप है कि जब वे अपनी FIR दर्ज कराने के बाद थाने में ही मौजूद थे, उसी दौरान पुलिस ने दबाव बनाने के उद्देश्य से दूसरे पक्ष की झूठी शिकायत लेकर उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। उनका कहना है कि यदि वास्तव में दूसरी घटना हुई होती, तो एक दिन बाद शिकायत दर्ज कराने और उसी तारीख को घटना दर्शाने का कोई औचित्य नहीं बनता। अधिवक्ता ने इस पूरी कार्यवाही को जानबूझकर किया गया पुलिसिया सेटअप करार दिया है।

अधिवक्ता संघ को दी गई मामले की शिकायत

इस मामले को लेकर अधिवक्ता ने जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष मनीष मिश्रा को लिखित शिकायत सौंपी है। मनीष मिश्रा ने बताया कि इस विषय में पुलिस अधीक्षक सहित हनुमानताल थाना प्रभारी से बातचीत की गई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि यह साबित होता है कि थाना प्रभारी के संरक्षण में फर्जी कार्यवाही की गई है, तो अधिवक्ता संघ उग्र आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगा। अधिवक्ता संघ ने इस मामले को न्याय व्यवस्था और अधिवक्ताओं की सुरक्षा से जोड़कर देखा है।

थाना प्रभारी की सफाई, लेकिन FIR की तारीख ने बढ़ाया संदेह

वहीं हनुमानताल थाना प्रभारी का कहना है कि अधिवक्ता की शिकायत के दूसरे दिन दोबारा विवाद हुआ था, जिसके बाद दूसरे पक्ष की शिकायत पर काउंटर मामला दर्ज किया गया। हालांकि उनकी यह सफाई खुद सवालों के घेरे में है, क्योंकि FIR में घटना की तारीख 22 नवम्बर ही दर्ज है, न कि 23 नवंबर। यही विरोधाभास पुलिस की भूमिका पर गंभीर संदेह खड़ा कर रहा है।

ग्रामीण इलाकों में कॉलोनाइजर बेच रहे अवैध प्लॉट, 7 बिल्डर्स पर होगी FIR

जबलपुर। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बिना अनुमति कॉलोनियों का निर्माण कर लोगों से प्लॉट बेचने के मामलों में जिला प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने ऐसे सात कॉलोनाइजर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। इन आदेशों के तहत संबंधित क्षेत्रों के तहसीलदारों को कार्रवाई कर पुलिस में प्रकरण दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।

जांच में उजागर हुआ अवैध प्लॉट बिक्री का नेटवर्क

प्रशासनिक जांच में पनागर, कुंडम और पिपरिया बनियखेड़ा सहित कई ग्रामीण इलाकों में अवैध कॉलोनियों का जाल सामने आया है। बिना लेआउट स्वीकृति और आवश्यक अनुमति के कॉलोनियां विकसित कर आम लोगों को प्लॉट बेचे गए। अलग-अलग स्थानों पर 17 से लेकर 82 तक भूखंडों का विक्रय किया गया, जिससे बड़ी संख्या में खरीदारों के साथ धोखाधड़ी हुई।

पहले से चल रहे थे प्रकरण, अब होगी एफआईआर

कलेक्टर कार्यालय की कॉलोनी सेल के अनुसार इन सातों कॉलोनाइजर्स के खिलाफ कलेक्टर न्यायालय में पहले से प्रकरण दर्ज थे। जांच में अवैध कॉलोनी निर्माण की पुष्टि होने के बाद अब मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम और मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिले में चिन्हित 98 अवैध कॉलोनियों पर आगे भी चरणबद्ध कार्रवाई जारी रहेगी।

4 जनवरी: 2026 का पहला ‘रवि पुष्य नक्षत्र’, महासंयोग में चमक उठेगी इन राशियों की किस्मत; जानें शुभ मुहूर्त और उपाय

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साल 2026 की शुरुआत ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद मंगलकारी होने जा रही है। 4 जनवरी को साल का पहला ‘रवि पुष्य नक्षत्र’ पड़ रहा है। ज्योतिष शास्त्र में पुष्य को ‘नक्षत्रों का राजा’ कहा जाता है। जब यह नक्षत्र रविवार के दिन पड़ता है, तो ‘रवि पुष्य योग’ का निर्माण होता है, जिसे तंत्र-मंत्र, धन संचय और नवीन कार्यों के लिए ‘अमृत योग’ माना गया है।

क्यों खास है इस बार का रवि पुष्य नक्षत्र?

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि देव हैं और इसके अधिष्ठाता देवता देवगुरु बृहस्पति हैं। रविवार सूर्य का दिन है, जो सफलता और तेज का प्रतीक है। जब शनि, गुरु और सूर्य की ऊर्जा का संगम होता है, तो एक दुर्लभ “सिद्धि योग” बनता है।

इस संयोग की मुख्य विशेषताएं:

  • अक्षय फल: इस दिन किए गए निवेश या खरीदारी का पुण्य कभी समाप्त नहीं होता।
  • सर्वार्थ सिद्धि: पुष्य नक्षत्र के साथ बन रहे अन्य शुभ योग इसे स्वर्ण (Gold) खरीदने और व्यापारिक सौदों के लिए सर्वोत्तम बनाते हैं।
  • दोषों का शमन: रवि पुष्य योग को कुंडली के कई अशुभ योगों के प्रभाव को कम करने वाला माना गया है।

ज्योतिषीय नजरिया: क्या करें और क्या खरीदें?

विख्यात ज्योतिषियों के अनुसार, इस दिन ग्रहों की स्थिति धन वृद्धि के लिए अत्यंत अनुकूल है:

गतिविधिमहत्व एवं लाभ
स्वर्ण/चांदी की खरीदारीसुख-समृद्धि और लक्ष्मी का स्थाई वास होता है।
नया व्यापार/निवेशलंबे समय तक स्थिरता और भारी मुनाफा सुनिश्चित करता है।
श्री यंत्र स्थापनाइस दिन घर या ऑफिस में श्री यंत्र स्थापित करना सौभाग्य लाता है।
बहीखाता पूजनव्यापारियों के लिए नए वित्तीय लक्ष्यों की शुरुआत हेतु श्रेष्ठ।

विशेष सावधानी: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पुष्य नक्षत्र में ‘विवाह’ करना वर्जित माना जाता है, क्योंकि इसे ब्रह्मा जी का विशेष विधान प्राप्त है। अतः मांगलिक कार्यों के चयन में सावधानी बरतें।

सभी 12 राशियों के लिए विशेष उपाय

इस महासंयोग का पूर्ण लाभ उठाने के लिए अपनी राशि के अनुसार ये सरल उपाय करें:

  • मेष: हनुमान चालीसा का पाठ करें और गुड़ का दान करें।
  • वृषभ: श्री सूक्त का पाठ कर माता लक्ष्मी को सफेद मिठाई अर्पित करें।
  • मिथुन: गणेश जी को दूर्वा चढ़ाएं और गाय को हरा चारा खिलाएं।
  • कर्क: शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाएं। चांदी की वस्तु खरीदना शुभ होगा।
  • सिंह: आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें और तांबे के पात्र का दान करें।
  • कन्या: पक्षियों को सप्तधान्य डालें और “ॐ बुं बुधाय नमः” का जाप करें।
  • तुला: छोटी कन्याओं को फल बांटें और मंदिर में शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
  • वृश्चिक: लाल मसूर की दाल दान करें और तांबे का सिक्का पास रखें।
  • धनु: विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। केसर का तिलक लगाना लाभकारी होगा।
  • मकर: पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और शनि चालीसा पढ़ें।
  • कुंभ: जरूरतमंदों को काला तिल या तेल दान करें।
  • मीन: हल्दी मिश्रित जल से स्नान करें और केले के वृक्ष की पूजा करें।

शुभ मुहूर्त (4 जनवरी 2026)

4 जनवरी को पुष्य नक्षत्र सूर्योदय के साथ ही विद्यमान रहेगा, जिससे पूरा दिन ही मांगलिक कार्यों के लिए शुभ है। फिर भी, विशेष कार्यों के लिए इन विशिष्ट समयों का पालन करना अत्यंत लाभकारी होगा:

ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 05:25 से 06:19 तक (अध्यात्म और साधना के लिए श्रेष्ठ) प्रातः संध्या: प्रातः 05:52 से 07:13 तक अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 से 12:47 तक (दिन का सबसे शक्तिशाली मुहूर्त, हर कार्य हेतु शुभ) विजय मुहूर्त: दोपहर 02:10 से 02:52 तक (मुकदमेबाजी या प्रतियोगिता में सफलता हेतु) अमृत काल: दोपहर 02:44 से 04:22 तक (स्वर्ण एवं संपत्ति की खरीदारी के लिए सर्वोत्तम) गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:35 से 06:03 तक (लक्ष्मी पूजन के लिए उपयुक्त) सायाह्न संध्या: शाम 05:38 से 06:59 तक निशिता मुहूर्त: रात्रि 11:59 से 12:53 (5 जनवरी) तक (विशेष तंत्र साधना और गुप्त पूजा के लिए) खरीदारी और निवेश के लिए अभिजीत मुहूर्त और विजय मुहूर्त सबसे फलदायी रहेंगे।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी ज्योतिषीय गणनाओं, सामान्य मान्यताओं और उपलब्ध शोध पर आधारित है। prathmikmedia.com इन तथ्यों की पूर्ण सत्यता या इसके प्रभावों की व्यक्तिगत गारंटी नहीं लेता है। किसी भी उपाय, निवेश या महत्वपूर्ण निर्णय को लेने से पहले संबंधित विषय के विशेषज्ञ या अनुभवी से परामर्श अवश्य लें।

पचरंगा होगा घर का कचरादान – नगर निगम ने शुरू की मुहिम

जबलपुर। अब तक गीला और सूखा कचरा अलग करने की व्यवस्था थी, लेकिन नगर निगम की नई पहल के तहत अब जैव कचरा (बायो-वेस्ट), घरेलू हानिकारक कचरा और ई-वेस्ट को भी घर पर ही अलग करना होगा। नागरिकों से अपील की गई है कि वे डायपर, सेनेटरी नैपकिन जैसे जैव अपशिष्ट, टूटे बल्ब, एक्सपायरी दवाइयों जैसे हानिकारक कचरे और खराब मोबाइल, बैटरी, चार्जर जैसे ई-वेस्ट को सामान्य कचरे में न मिलाएँ, बल्कि निर्धारित डिब्बों में अलग-अलग रखें। शहर को साफ-सुथरा बनाने और स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर रैंक दिलाने के लिए नगर निगम जबलपुर लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है। निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार के निर्देश पर शहर के अलग-अलग इलाकों में लोगों को कचरा अलग-अलग रखने के लिए समझाया जा रहा है। इसी कड़ी में संभाग क्रमांक 12 के पंडित मदन मोहन मालवीय वार्ड की मलिन बस्ती में विशेष अभियान चलाया गया।

घर-घर जाकर समझाया गया

अभियान के दौरान निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार और अपर आयुक्त देवेन्द्र सिंह चौहान के मार्गदर्शन में नगर निगम की टीम ने डोर-टू-डोर कचरा वाहन के साथ क्षेत्र का भ्रमण किया। टीम ने हर घर जाकर लोगों से बात की और उन्हें बताया कि कचरा घर से ही अलग करना क्यों जरूरी है।

5 रंगों के डिब्बों में कचरा अलग करने की जानकारी

नगर निगम की टीम ने लोगों को आसान भाषा में समझाया कि कचरा मिलाने के बजाय 5 तरह के डिब्बों में रखें—

  • नीला डिब्बा: सूखा कचरा जैसे कागज, प्लास्टिक, कांच, धातु, खाली डिब्बे और पुराने कपड़े
  • हरा डिब्बा: गीला कचरा जैसे रसोई का कचरा, सब्जियों-फलों के छिलके, बचा हुआ खाना
  • पीला डिब्बा: गंदा और जैव कचरा जैसे डायपर, सेनेटरी पैड, टिशू पेपर, बाल और सूखी पत्तियाँ
  • काला डिब्बा: हानिकारक कचरा जैसे टूटे बल्ब, ट्यूबलाइट, पेंट, कीटनाशक और एक्सपायरी दवाइयाँ
  • लाल डिब्बा: इलेक्ट्रॉनिक कचरा जैसे खराब मोबाइल, चार्जर, बैटरी, रिमोट और ईयरफोन

साफ शहर के लिए सहयोग की अपील

निगमायुक्त ने लोगों से अपील की कि वे कचरा अलग करके ही नगर निगम की गाड़ी में दें। इससे कचरे का सही तरीके से निपटान होगा और शहर साफ रहेगा। नगर निगम के इस प्रयास की लोगों ने सराहना की और स्वच्छता अभियान में पूरा सहयोग देने की बात कही।

पितृ दोष निवारण के घर में कर सकते हैं ये उपाय.. जानिए अवधूत आनंद से पितृ पक्ष से जुड़े इस इंटरव्यू में

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अवधूत आनंद का परिचय - जबलपुर (माँ नर्मदा के पावन तट) में जन्मे अवधूत आनंद का बचपन से ही अध्यात्म और अदृश्य जगत के प्रति गहरा झुकाव रहा। परिवार में हर कोई अलग-अलग साधना पथ पर था, पर सभी का लक्ष्य एक ही—ईश्वर प्रेम और सत्य की खोज। 
2012 में दिल्ली (NCR) आने के बाद उन्होंने एक दशक तक कॉर्पोरेट जीवन जिया, लेकिन भीतर के आह्वान ने उन्हें साधना की ओर खींच लाया। इस दौरान उन्होंने तंत्र, वेद, प्राणिक हीलिंग, अंक ज्योतिष और वैदिक ज्योतिष का गहन अध्ययन किया।
गुरु पूर्णिमा 2023 को अपने परमगुरु भगवान दत्तात्रेय की प्रेरणा से उन्होंने कॉर्पोरेट नौकरी त्याग दी और पूर्ण रूप से साधना मार्ग को समर्पित हो गए। तभी से वे “अवधूत आनंद” के रूप में समाज का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

🎤 पितृ पक्ष और पितृ दोष पर अवधूत आनंद जी से बातचीत के अंश यहाँ दिए जा रहे हैं

(नीचे दिए गए प्रश्न–उत्तर इंटरव्यू से लिए गए अंश हैं, पूरा इंटरव्यू आप YouTube पर देख सकते हैं)

सवाल 1: आखिर पितृ होते कौन हैं?
उत्तर (अवधूत आनंद जी): पितृ मनुष्य के देवता गण हैं। जब कोई व्यक्ति देह त्यागता है तो पहले 13 दिन प्रेत योनि में रहता है और उसके बाद अपने पितरों से जुड़ता है।

सवाल 2: पितृ और जेनेटिक्स का क्या संबंध है?
उत्तर: आधुनिक विज्ञान (Genetics) मानता है कि DNA के ज़रिए जानकारी पीढ़ियों तक जाती है। अध्यात्म में यही पितृ तत्व कहलाता है।

सवाल 3: पितृ ऋण और उसका महत्व क्या है?
उत्तर: हर व्यक्ति पर जन्म के साथ पितृ ऋण होता है। संतान के जन्म से यह ऋण आगे बढ़ता है और पितृ संतुष्ट होते हैं।

सवाल 4: पितृ दोष क्या है और परिवार को कैसे प्रभावित करता है?
उत्तर: जब कुल परंपरा की नियमावली भंग हो, जैसे पूजा-पाठ छोड़ना, मांसाहार अपनाना, संतान न होना, तब पितृ रुष्ट होते हैं। इसे पितृ दोष कहते हैं।

सवाल 5: पितृ स्थल क्या होता है?
उत्तर: पितृ स्थल घर की दहलीज, अन्न भंडार या खेत/जमीन पर बनाया जाता है। यही वह स्थान है जहाँ तर्पण और पूजन होता है।

सवाल 6: पितृ दोष की पहचान कैसे होती है?
उत्तर: ज्योतिष में सूर्य-राहु, सूर्य-केतु आदि से और तंत्र में आभामंडल देखकर पता चलता है कि पितृ कृपा कारक हैं या बाधक।

सवाल 7: पितृ पक्ष का महत्व क्या है?
उत्तर: श्राद्ध पक्ष (पितृ पक्ष) में 14 दिनों तक पितृ धरती पर आते हैं और अपने वंशजों से तर्पण ग्रहण करते हैं।

सवाल 8: पितृ दोष के सामान्य लक्षण क्या होते हैं?
उत्तर (अवधूत आनंद जी): बार-बार बीमारियाँ और इलाज पर खर्च।
गद्दे और बिस्तर जल्दी खराब होना।
विवाह में रुकावटें और संतान सुख की कमी।
(सभी लक्षणों के लिए पूरा इंटरव्यू आप YouTube पर देख सकते हैं)
सवाल 9:पितृ दोष और पितृ श्राप में क्या अंतर है?
उत्तर: पितृ दोष तब होता है जब पितरों को तृप्ति नहीं मिलती या उनकी उपेक्षा होती है।
पितृ श्राप तब लगता है जब पूर्वजों के साथ अन्याय या अपमान होने पर वे क्रोधित होकर श्राप देते हैं।
❓ सवाल 10: पितृ दोष से मुक्ति के लिए कौन-से उपाय करने चाहिए?
उत्तर: पितृ पक्ष में तर्पण, अन्नदान, वस्त्रदान और हवन करें।
हर अमावस्या को पीपल या बरगद के नीचे दीपक जलाएँ और जल-भोजन अर्पित करें।
दक्षिण दिशा में तेल का दीपक जलाना शुभ होता है।
दान-पुण्य और सेवा अवश्य करें।
(सभी उपायों के लिए पूरा इंटरव्यू आप YouTube पर देख सकते हैं)
❓ सवाल 11: क्या पितृ दोष से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सकती है?
उत्तर: नहीं, पितृ दोष से स्थायी मुक्ति संभव नहीं है क्योंकि हर पीढ़ी में नए-नए ऋण और संबंध बनते रहते हैं। इसका समाधान है—निरंतर साधना, पितरों के प्रति श्रद्धा और नियमित तर्पण-श्राद्ध।
सवाल 12: पितृ पक्ष में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर: नए काम, मांगलिक कार्य या खरीदारी न करें।
पितरों की परंपराओं और नियमों की अवहेलना न करें।
(सभी नियमों के लिए पूरा इंटरव्यू आप YouTube पर देख सकते हैं)

📺 पूरा इंटरव्यू देखें

👉 यहाँ केवल कुछ अंश दिए गए हैं। पूरा इंटरव्यू आप YouTube पर देख सकते हैं।

अस्वीकरण – उपरोक्त जानकारी साक्षात्कारकर्ता के द्वारा दी गई है, जिसकी प्रामाणिकता का दावा प्राथमिकमीडिया नहीं करता। उपरोक्त उपायों, निवारणों या किसी भी जानकारी पर अमल करने से पहले अपने बुद्धि विवेक से निर्णय लें। किसी भी हानि के लिए प्राथमिकमीडिया या इसका कोई सदस्य उत्तरदायी नही होगा।

गवर्नमेंट पुलिस कॉर्टर और खटवानी सेल्स सहित दर्जनों बकायादारों को जारी हुआ धारा 173-174 के नोटिस

जबलपुर। नगर निगम जबलपुर ने सम्पत्तिकर, जलकर एवं उपभोक्ता प्रभार की वसूली के लिए कार्यवाही तेज कर दी है। निगम आयुक्त के निर्देश पर राजस्व विभाग की टीम ने 50 हजार रुपये से अधिक बकाया रखने वाले करदाताओं को धारा 173 एवं 174 के अंतर्गत नोटिस जारी किए हैं। अपर आयुक्त राजस्व अंजू सिंह ने संभाग क्रमांक 2 और 6 की समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया कि बड़े बकायादारों पर अब कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने करदाताओं से अपील की कि वे आगामी 13 दिसम्बर 2025, शनिवार को आयोजित लोक अदालत में उपस्थित होकर अपने बकाया करों की राशि जमा करें और छूट का लाभ उठाएँ।

संभाग क्रमांक 2 के बड़े बकायादार

  1. खटवानी सेल्स एण्ड सर्विसेस प्रा. लि. – ₹5,56,943
  2. कमला रानी/सी.पी. केसरवानी – ₹2,28,728
  3. मोतीलाल बर्मन – ₹1,87,591
  4. रमेश कुमार सोंधिया / बाबूलाल सोंधिया – ₹1,86,832
  5. अजय कुमार शर्मा – ₹1,07,070
  6. अमर प्रीतम सिंह – ₹1,64,410
  7. वर्मा सेल्स कम्पनी पेट्रोल पंप – ₹1,79,351
  8. विनोद विश्वकर्मा – ₹1,69,306
  9. श्रीमती वेदरानी खन्ना – ₹1,18,986
  10. सरदार मोहन सिंह बग्गा / शाहनी कौर / तरनदीप सिंह – ₹6,31,045
  11. सतनाम सिंह / सतपाल सिंह / आत्म सिंह – ₹1,14,204
  12. सैयद माजिद अली एवं सैयद वाहिद अली – ₹1,98,623
  13. श्रीमती आशा सिंह – ₹1,98,623
  14. दलजीत सिंह बग्गा – ₹4,65,124 एवं ₹1,81,844
  15. श्रीमती अश्विनी सिंह – ₹3,42,042
  16. सुदामा बबेले – ₹2,02,609
  17. इशिका सिंह वैद्य / शालिनी सिंह बैद्य – ₹3,02,096
  18. लक्ष्मी राय / बी.डी. राय – ₹1,63,814
  19. वीरेन्द्र कुमार यादव – ₹1,52,814
  20. रोज मेरी विनियम प्रा. लि. / डॉ. ओमप्रकाश अग्रवाल / राजेश मछानी – ₹5,34,096

संभाग क्रमांक 6 के बड़े बकायादार

  • रहमत उल्ला – ₹1,66,500
  • हामित दुसैन – ₹1,66,500
  • कन्हैया लाल – ₹1,79,300
  • चन्दा बाई – ₹3,84,800
  • राजाराम पुरूषोत्तम – ₹3,43,200
  • इकामन बी – ₹1,62,900
  • गंगा बाई – ₹5,61,200
  • मदन लाल – ₹5,01,700
  • अनुपम आनंद एवं हर्ष देव आनंद – ₹2,92,200
  • सतपाल लांबा / चमनलाल लांबा – ₹1,23,200
  • गौरव डयोढिया – ₹1,53,900
  • चीना बाई केशरवानी – ₹1,15,900
  • रूपेश जैन – ₹1,18,500
  • राजकुमार जैन – ₹2,72,100
  • संजय कुमार जैन – ₹2,65,000
  • रमजान खान – ₹9,95,700 (सबसे अधिक)
  • मोहम्मद मोहसिन – ₹1,48,700
  • अमन सिविल इंजिनियरिंग – ₹1,48,300
  • शुभा मिश्रा – ₹1,83,400
  • बक्श अली – ₹63,100
  • हाजी शेख यासीन – ₹77,800
  • कमल रानी – ₹58,800
  • मो. अख्तर – ₹71,200
  • महावीर ट्रस्ट – ₹82,400
  • मन्नू धोबी – ₹61,000
  • बाबू सलाम गुलाम – ₹79,000
  • दालचंद – ₹55,000
  • मो. ईशाक – ₹73,000
  • मो. शाहिद / मो. वाजिद – ₹54,000
  • गवर्नमेंट पुलिस क्वार्टर – ₹90,000
  • जमना प्रसाद तिवारी – ₹90,000
  • बसंत चौरसिया – ₹65,000
  • सरदार सतनाम सिंह – ₹73,000
  • आनंत इन्वेस्टमेंट / शैलेश जैन – ₹74,000
  • अरविंद अग्रवाल – ₹85,000
  • सरदार गजेन्द्र सिंह बांगा – ₹95,000
  • महेंद्र जैन – ₹94,000
  • शशि चक्रवर्ती / धमेन्द्र चक्रवर्ती – ₹95,000
  • नीलकंठ दीक्षित – ₹83,000
  • सुनीता जैन – ₹83,000
  • रमेश पटैल – ₹80,000
  • कमला देवी असाटी – ₹78,000
  • रामलिमन भारत प्रसाद – ₹76,000
  • कल्लू प्रसाद पटैल – ₹73,000
  • नरसिंह दास रैकवार / तुलसीदास रैकवार – ₹62,000
  • सुधीर कुमार मिश्रा – ₹59,000
  • किशन सिंह परिहार – ₹56,000
  • फूला बाई साहू – ₹55,000
  • किरन कछवाहा – ₹50,000
  • पुरूषोत्तम लाल साहू – ₹58,000
  • आर आर विश्वकर्मा / दीपक विश्वकर्मा – ₹60,000
  • हीरा लाल चौधरी – ₹54,000
  • अनीला दुबे – ₹59,000
  • मुईनुद्दीन खान / मोहम्मद सईद – ₹64,000
  • मनीष श्रीवास्तव – ₹63,000
  • स्नेहिल पटैल – ₹66,000
  • राजकुमार / सुरेन्द्र कुमार पाठक – ₹58,000
  • शकुन साहू – ₹59,000
  • नरबदा बाई – ₹66,000

निगम की अपील

निगम आयुक्त ने नागरिकों से अपील की है कि वे समय पर सम्पत्तिकर, जलकर एवं उपभोक्ता प्रभार की राशि जमा करें, जिससे निगम की कार्यवाही से बचा जा सके।