सदर काली मंदिर में दो दिवसीय होली उत्सव की तैयारी

जबलपुर के सदर काली मंदिर में दो दिन का होली उत्सव होगा। पहले दिन बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। तड़के तीन बजे लकड़िया दहन होगी। यहां फूलों और गुलाल से होली खेली जाएगी। दहन के बाद प्रसाद वितरण होगा।

सदर काली मंदिर होली उत्सव कब और कैसे होगा

जबलपुर के सदर क्षेत्र स्थित प्राचीन काली मंदिर में तैयारियां तेज हैं।हर साल की तरह इस बार भी होली उत्साह से मनाई जाएगी।आयोजन दो दिन तक चलेगा और बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे।काली माई मंदिर होलिका उत्सव समिति इस पूरे कार्यक्रम का संचालन कर रही है।समिति संरक्षक उमेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पहले दिन बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।अनुश्री वेलफेयर सोसाइटी के सहयोग से प्रस्तुतियां दी जाएंगी।इसके बाद भव्य ऑर्केस्ट्रा आयोजित किया जाएगा।यह परंपरा कई दशकों से चली आ रही है।

होलिका दहन का समय और खास परंपरा

समिति अध्यक्ष दीपक रजक ने बताया कि यह आयोजन शहर के बड़े आयोजनों में गिना जाता है।यहां मथुरा और वृंदावन की तर्ज पर फूलों और गुलाल से होली खेली जाती है।मंदिर परिसर में भक्त एक दूसरे को रंग लगाते हैं।होलिका दहन तड़के सुबह तीन बजे किया जाएगा।यहां केवल लकड़ियों का दहन होता है और किसी प्रतिमा का दहन नहीं किया जाता।दहन के बाद सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा।समिति ने लोगों से परंपरा और सही समय का ध्यान रखने की अपील की है।

बसंत पंचमी से शुरू होती है तैयारी

समिति सचिव आकाश नायडू ने बताया कि तैयारी बसंत पंचमी से शुरू होती है।उस दिन लकड़ी का ढांचा स्थापित किया जाता है जिसे अंडुआ कहा जाता है।बाद में इसे लकड़ियों से ढक दिया जाता है।तय मुहूर्त पर इसी ढांचे का दहन किया जाता है।यह परंपरा मंदिर स्थापना के समय से चली आ रही है।समिति आज भी इसे उसी उत्साह से आगे बढ़ा रही है।मंदिर परिसर को सजाया जाएगा और सुरक्षा के इंतजाम भी किए जा रहे हैं।समिति ने सभी शहरवासियों को उत्सव में शामिल होने का निमंत्रण दिया है।

होली और रमजान पर जबलपुर पुलिस अलर्ट मोड में

जबलपुर में होली और रमजान को देखते हुए पुलिस अलर्ट है। कंट्रोल रूम में समीक्षा बैठक हुई। संवेदनशील इलाकों पर नजर बढ़ाई गई। आदतन अपराधियों पर सख्ती के निर्देश हैं। छोटी घटना पर भी तुरंत कार्रवाई होगी।

होली और रमजान साथ होने से पुलिस सतर्क है।
1 मार्च 2026 को कंट्रोल रूम में बैठक हुई।
संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाने के निर्देश हैं।
आदतन अपराधियों पर नजर और सख्ती होगी।
छोटी सूचना पर भी तुरंत मौके पर पहुंचा जाएगा।

होली और रमजान से पहले पुलिस की बड़ी बैठक क्यों हुई

जबलपुर में त्योहारों से पहले सुरक्षा समीक्षा हुई।
बैठक की अगुवाई पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय ने की।
शहर और ग्रामीण थानों के अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में पिछले वर्षों की घटनाओं पर चर्चा हुई।
जहां पहले विवाद हुए थे, वहां विशेष निगरानी तय हुई।
होलिका दहन पारंपरिक स्थानों पर कराने के निर्देश दिए गए।

संवेदनशील इलाकों और पुराने विवादों पर फोकस

पुलिस ने संवेदनशील स्थानों की सूची तैयार की है।
ऐसे इलाकों में नियमित गश्त बढ़ाई जाएगी।
दो पक्षों के बीच पुराने झगड़ों की समीक्षा हुई।
जरूरत पड़ने पर बाउंड ओवर की कार्रवाई होगी।
शांति समिति और उत्सव समितियों से संवाद बढ़ाया गया।
स्थानीय सुझावों को लागू करने पर जोर दिया गया।

छोटी घटना पर भी तुरंत कार्रवाई के निर्देश

अधिकारियों को प्रतिक्रिया समय घटाने को कहा गया।छोटी सूचना को भी नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।मौके पर पहुंचकर कानून के अनुसार कदम उठेंगे।कार्रवाई पूरी तरह निष्पक्ष रखने की हिदायत दी गई।लापरवाही पर जवाबदेही तय होगी।मकसद साफ है, त्योहार शांति से बीतें।

आदतन अपराधियों और असामाजिक तत्वों पर सख्ती

बैठक में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की समीक्षा हुई।हर थाने से रिपोर्ट ली गई।लंबित मामलों को जल्द निपटाने के निर्देश मिले।जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है, उन पर नजर रहेगी।जरूरत पड़ने पर कानूनी शर्तें लागू की जाएंगी।उल्लंघन पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।

संसाधन और दंगा नियंत्रण तैयारी की जांच

सरकारी वाहनों की तैयारी भी परखी गई।वाहनों में जरूरी सुरक्षा सामग्री रखने को कहा गया।टियर गैस, टॉर्च और वीडियो रिकॉर्डिंग उपकरण तैयार रहेंगे।पीए सिस्टम और सायरन चालू हालत में रहेंगे।बलवा ड्रिल की सामग्री उपलब्ध रखने के निर्देश हैं।किसी भी हालात में तुरंत प्रतिक्रिया की तैयारी है।

आम जनता के लिए पुलिस का साफ संदेश

पुलिस ने कहा कि त्योहार मिलकर मनाएं।अफवाहों से बचें और सूचना तुरंत दें।हर सूचना पर पुलिस तेजी से कार्रवाई करेगी।उद्देश्य है आम लोगों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ाना।साथ ही असामाजिक तत्वों में कानून का डर रहे।जबलपुर पुलिस ने पूरी तैयारी का दावा किया है।

शिक्षा विभाग के लैब अटेंडेंट को तीसरी क्रमोन्नति का आदेश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दमोह के लैब अटेंडेंट को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार को तीन माह में तीसरी क्रमोन्नति और बकाया वेतन देने का आदेश दिया। यह फैसला 30 साल सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों के लिए अहम माना जा रहा है।

दमोह के लैब अटेंडेंट ने तीसरी क्रमोन्नति की मांग की थी।
कर्मचारी ने 30 साल की सेवा पूरी कर ली थी।
विभाग ने समय पर लाभ नहीं दिया था।
मामला हाईकोर्ट पहुंचा और सुनवाई हुई।
कोर्ट ने तीन माह में लाभ देने का आदेश दिया।

शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर

जबलपुर से आई यह खबर कई कर्मचारियों के लिए अहम है।मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने दमोह के लैब अटेंडेंट को राहत दी है।कोर्ट ने राज्य सरकार को साफ निर्देश दिए हैं।तीसरी क्रमोन्नति और बकाया राशि तीन माह में देनी होगी।कोर्ट ने यह भी कहा कि आदेश की प्रति मिलने के बाद समय गिना जाएगा।देरी होने पर जिम्मेदारी विभाग की मानी जाएगी।इससे साफ संदेश गया है कि नियमों की अनदेखी नहीं चलेगी।

30 साल की सेवा के बाद भी नहीं मिला लाभ

हरिनारायण साहू दमोह जिले के निवासी हैं। वह स्कूल शिक्षा विभाग में लैब अटेंडेंट हैं। उन्होंने 30 साल से अधिक सेवा पूरी कर ली थी।नियम के अनुसार उन्हें तीसरी क्रमोन्नति मिलनी चाहिए थी। लेकिन विभाग ने समय पर यह लाभ नहीं दिया।
इसी कारण उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। उनकी ओर से अधिवक्ता शुभम मिश्रा ने कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर की। यह याचिका WP 6432 2026 के रूप में दर्ज हुई। उन्होंने 5 जनवरी 2025 से लाभ लागू करने की मांग रखी।

पहले के बैंचमार्क फैसले का दिया गया हवाला

सुनवाई के दौरान कर्मचारी की ओर से अधिवक्ता शुभम मिश्रा ने अहम तर्क रखे। वकील ने कहा कि मामला पहले के फैसले जैसा है।उन्होंने एस.पी. मिश्रा बनाम मध्य प्रदेश राज्य केस का जिक्र किया।उस मामले में भी कर्मचारी को तीसरी क्रमोन्नति मिली थी। कोर्ट ने तब साफ कहा था कि 30 साल सेवा पूरी होना पर्याप्त है। इसलिए समान स्थिति में समान लाभ मिलना चाहिए। सरकार की ओर से पेश वकील ने इस तथ्य से इनकार नहीं किया। उन्होंने यह नहीं कहा कि मामला अलग है। इससे कोर्ट के सामने तस्वीर साफ हो गई।

जस्टिस भट्टी की बेंच से मिली राहत

मामले की सुनवाई जस्टिस मनिंदर एस. भट्टी की एकल पीठ ने की।कोर्ट ने माना कि कर्मचारी ने सेवा अवधि पूरी की है। ऐसी स्थिति में लाभ रोकना उचित नहीं है। कोर्ट ने आदेश में साफ लिखा कि तीसरी क्रमोन्नति दी जाए। सभी वित्तीय लाभों की गणना की जाए।
बकाया राशि तीन माह के भीतर दी जाए। यह आदेश पहले दिए गए फैसले के अनुरूप होगा। विभाग को नियमों के अनुसार कार्रवाई करनी होगी। कोर्ट ने स्पष्ट समय सीमा तय कर सख्ती दिखाई।

क्या होती है तीसरी क्रमोन्नति

तीसरी क्रमोन्नति समयमान वेतनमान का लाभ है।।यह पदोन्नति नहीं बल्कि वेतन वृद्धि है। 30 साल की सेवा पूरी होने पर यह दी जाती है। इसका मकसद अनुभव का सम्मान करना है। लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारी को आर्थिक राहत मिलती है। इससे उनका मनोबल मजबूत होता है। यदि विभाग समय पर लाभ नहीं देता तो विवाद पैदा होता है। कई कर्मचारी ऐसे मामलों में न्याय की उम्मीद रखते हैं। यह फैसला उनके लिए भी राह खोल सकता है।

फैसले से शिक्षा विभाग में बढ़ी हलचल

इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग में चर्चा तेज है।।कई कर्मचारी वर्षों से लाभ की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब उन्हें भी उम्मीद की किरण दिखी है। कानूनी जानकार मानते हैं कि यह आदेश अहम है। समान मामलों में इसे आधार बनाया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर कर्मचारी कोर्ट का सहारा ले सकते हैं। दमोह के इस कर्मचारी की लड़ाई लंबी रही। उन्हें अपना हक पाने के लिए कानूनी रास्ता चुनना पड़ा। अब कोर्ट के आदेश से उन्हें राहत मिली है।

पनागर पुलिस ने 4000 के इनामी NDPS आरोपी को दबोचा

पनागर थाना पुलिस ने लंबे समय से फरार 4000 रुपये के इनामी आरोपी मनीष प्रधान को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर NDPS एक्ट के तहत गंभीर मामला दर्ज था। वह करीब ढाई साल से फरार था। पुलिस अब उससे पूछताछ कर नशा नेटवर्क की कड़ियां तलाश रही है।

पनागर पुलिस ने एक इनामी आरोपी को पकड़ा है।
आरोपी पर NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज था।
वह साल 2024 से फरार चल रहा था।
पुलिस अधीक्षक ने उस पर 4000 रुपये का इनाम रखा था।
अब पुलिस उससे पूछताछ कर नेटवर्क तलाश रही है।

जबलपुर जिले के पनागर थाना क्षेत्र में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रहा एक आरोपी आखिरकार पकड़ में आ गया। यह आरोपी नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामले में वांछित था।गिरफ्तार आरोपी का नाम मनीष प्रधान है। वह दमोह जिले के जबेरा का रहने वाला है। उसके खिलाफ साल 2024 में पनागर थाने में मामला दर्ज हुआ था। मामला NDPS एक्ट के तहत दर्ज किया गया था।

पनागर पुलिस ने कैसे पकड़ा 4000 का इनामी आरोपी

घटना के बाद से ही मनीष फरार था। पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही थी। पुलिस अधीक्षक ने उस पर 4000 रुपये का इनाम घोषित किया था। यह इनाम उसकी गिरफ्तारी पर रखा गया था। पुलिस को हाल ही में सटीक सूचना मिली। सूचना के आधार पर टीम ने घेराबंदी की। इसके बाद आरोपी को पकड़ लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे पुलिस रिमांड पर लिया गया है।

NDPS एक्ट मामला क्या है और क्यों है गंभीर

NDPS एक्ट नशीले पदार्थों के मामलों में लागू होता है। इस कानून में सख्त सजा का प्रावधान है। नशे की तस्करी को गंभीर अपराध माना जाता है। इसी कारण यह मामला भी अहम माना जा रहा है।
पुलिस के अनुसार आरोपी मुख्य भूमिका में था। घटना के बाद से वह लगातार ठिकाने बदल रहा था। करीब ढाई साल तक वह गिरफ्त से दूर रहा। अब पुलिस को उम्मीद है कि उससे कई अहम जानकारी मिलेगी।

आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड क्या बताता है

जांच में सामने आया कि मनीष आदतन अपराधी है। उसके खिलाफ पहले भी चार मामले दर्ज हैं। ये सभी मामले NDPS एक्ट से जुड़े बताए गए हैं। इससे साफ है कि वह पहले भी नशे के धंधे में शामिल रहा है।पुलिस अब उससे कड़ी पूछताछ कर रही है। कोशिश है कि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो। पुलिस यह भी जानना चाहती है कि सप्लाई कहां से होती थी। साथ ही किन लोगों तक यह नशा पहुंचाया जाता था।

आगे क्या होगी पुलिस की कार्रवाई

फिलहाल आरोपी पुलिस रिमांड पर है। पूछताछ के बाद उसे अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस अन्य संदिग्धों की भी तलाश कर रही है।पनागर थाना पुलिस का कहना है कि नशे के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने आम लोगों से भी सहयोग की अपील की है।यह कार्रवाई इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोगों का मानना है कि ऐसे कदम जरूरी हैं। नशा युवाओं के भविष्य के लिए खतरा बनता जा रहा है।पुलिस का कहना है कि अभियान आगे भी जारी रहेगा। जो भी कानून तोड़ेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

जबलपुर में FIR के लिए भी हाईकोर्ट का दरवाजा! आदेश के बाद भी बरेला पुलिस की मनमानी

क्या अब जबलपुर में एक साधारण नागरिक को FIR दर्ज करवाने के लिए सीधे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जाना पड़ेगा? जमीन धोखाधड़ी के एक मामले में यही तस्वीर सामने आई है, जहां हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद भी बरेला थाना पुलिस ने महीनों तक रिपोर्ट दर्ज नहीं की। और जब दर्ज की, तो शिकायत में शामिल 6 नामों में से 5 को ‘एडिट’ कर दिया गया।

20 अगस्त 2025 को हाईकोर्ट ने संज्ञेय अपराध पाए जाने पर कार्रवाई के निर्देश दिए।

पुलिस ने 23 फरवरी 2026 को अवमानना याचिका दायर होने पर FIR दर्ज

शिकायत में 6 नाम थे, लेकिन FIR में केवल शुभम चौबे को आरोपी बनाया गया

कोर्ट के दबाव में दर्ज FIR, किसी की नहीं हुई गिरफ्तारी।

जबलपुर में यह सवाल अब आम चर्चा का विषय है कि क्या थानों में FIR दर्ज करवाना इतना मुश्किल हो गया है कि पीड़ित को पहले हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़े? बृजेश दुबे ने जमीन धोखाधड़ी की शिकायत की थी, लेकिन स्थानीय स्तर पर कार्रवाई न होने के बाद उन्हें हाईकोर्ट जाना पड़ा। अदालत ने स्पष्ट कहा कि शिकायत में संज्ञेय अपराध बनता है तो कानून के तहत कार्रवाई की जाए।

इसके बावजूद बरेला पुलिस ने लगभग छह महीने तक कोई कदम नहीं उठाया। जब अवमानना याचिका की तलवार लटकती दिखी, तब 23 फरवरी 2026 को FIR दर्ज की गई। सवाल यह है कि क्या पुलिस को कानून का पालन करने के लिए भी कोर्ट की चेतावनी जरूरी है?

6 आरोपी, FIR में सिर्फ 1 पर, बाकी पर मेहरबानी

पीड़ित की शिकायत में शुभम चौबे के साथ राजेश खुल्लर, शांति लाल जैन, विध्या जैन, मिथुन दुबे और संगीता खुल्लर को भी कथित साजिश का हिस्सा बताया गया था। आरोप था कि जमीन के पावर ऑफ अटॉर्नी और बाद की रजिस्ट्री में सभी की भूमिका रही।

लेकिन FIR में सिर्फ शुभम चौबे का नाम जोड़ा गया। बाकी पांच नाम किस आधार पर हटाए गए, इस पर पुलिस की ओर से कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। क्या यह जांच का हिस्सा है या ‘चयनात्मक’ कार्रवाई? यह सवाल अब खुलकर उठ रहे हैं।

जमीन सौदे से कथित धोखाधड़ी तक

मामले के अनुसार, बृजेश दुबे ने वर्ष 2014 में ग्राम सिलुआ में जमीन खरीदी थी। वर्ष 2018 में आर्थिक जरूरत के चलते परिचित से उधार लिया। आरोप है कि भारी ब्याज और दबाव के बीच जमीन का मुख्तयारनामा कराया गया और बाद में रजिस्ट्री कर ली गई।यदि शिकायत में सामूहिक साजिश का आरोप था, तो फिर जांच की दिशा एक ही नाम तक सीमित क्यों कर दी गई?

FIR के बाद भी गिरफ्तारी नहीं

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि FIR दर्ज होने के बाद भी मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि आरोपी क्षेत्र में खुला घूम रहा है।भारतीय न्याय संहिता की धारा 308(2), 308(3) और 318(4) के तहत मामला दर्ज होने के बावजूद पुलिस की कार्रवाई सुस्त क्यों है?

जनता पूछ रही है, कानून बड़ा या रसूख?

यह मामला अब सिर्फ एक जमीन विवाद नहीं रहा। यह सवाल बन चुका है कि क्या आम नागरिक को न्याय पाने के लिए पहले हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ेगी?FIR दर्ज कराने में देरी, आरोपियों की सूची में कटौती और गिरफ्तारी में ढिलाई, इन सबने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। अब देखना यह है कि क्या जांच निष्पक्ष दिशा में आगे बढ़ेगी या यह मामला भी कागजों तक सीमित रह जाएगा।

वरिष्ठ अधिमान्य पत्रकार के खिलाफ पुलिस कर्मी रच रहे साजिश, एक सस्पेंड दूसरा लाइन अटैच

जबलपुर में वरिष्ठ पत्रकार विलोक पाठक को “निपटाने” की धमकी देने का वीडियो सामने आने के बाद पत्रकारिता की सुरक्षा और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने पूरे शहर में आक्रोश फैला दिया है। श्रमजीवी पत्रकार परिषद ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए FIR और निलंबन की मांग की है।

वायरल वीडियो से मचा बवाल

पिछले 24 घंटों से सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने जबलपुर में सनसनी फैला दी है, जिसमें दो वर्दीधारी पुलिसकर्मी वरिष्ठ पत्रकार विलोक पाठक के खिलाफ खुलेआम अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए उन्हें “निपटाने” और मारने की धमकी देते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आते ही संस्कारधानी के पत्रकारों, सामाजिक, धार्मिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक संगठनों में तीव्र आक्रोश फैल गया। इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला बताया जा रहा है।

लोकतंत्र और प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला

श्रमजीवी पत्रकार परिषद और अन्य पत्रकार संगठनों ने इस घटना को प्रेस की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार पर गंभीर प्रहार करार दिया। परिषद का कहना है कि जिन पुलिसकर्मियों पर कानून-व्यवस्था और समाज की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, यदि वही बदमाशों की भाषा में पत्रकारों को धमकाने लगें, तो यह लोकतंत्र के लिए अत्यंत चिंताजनक स्थिति है।

एसपी से मुलाकात, FIR और निलंबन की मांग

इस मामले को लेकर श्रमजीवी पत्रकार परिषद ने विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज करने, निलंबन और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग रखी। परिषद ने स्पष्ट कहा कि यह घटना सुनियोजित प्रतीत होती है और इसका उद्देश्य पत्रकार को डराना व दबाव में लेना है।

BNS की सख्त धाराओं हो कार्रवाई

परिषद द्वारा भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करने की मांग की गई, जिनमें आपराधिक षड्यंत्र, आपराधिक धमकी, उकसावे, लोक सेवक द्वारा कानून की अवहेलना और समान इरादे से अपराध जैसी धाराएं शामिल हैं। परिषद का कहना है कि यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह भविष्य में और भी खतरनाक उदाहरण बन सकता है।

पुलिस अधीक्षक का त्वरित एक्शन

पत्रकारों के आक्रोश और मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित दो पुलिसकर्मियों में से एक को लाइन हाजिर और दूसरे को निलंबित कर दिया है। साथ ही FIR के संबंध में जांच कर शीघ्र आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।

राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी

बैठक के दौरान परिषद के राष्ट्रीय, प्रदेश, संभागीय और जिला स्तर के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन जबलपुर तक सीमित नहीं रहेगा। पूरे मध्यप्रदेश के पत्रकार संगठन एकजुट होकर व्यापक आंदोलन करेंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की होगी।

पत्रकारों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

वायरल वीडियो में पुलिसकर्मियों द्वारा यह कहते सुना गया कि यदि कोतवाली थाना क्षेत्र के लाठीचार्ज के दौरान पत्रकार विलोक पाठक मौजूद होते, तो उन्हें “निपटा दिया जाता।” यह बयान दर्शाता है कि निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों को अब केवल असामाजिक तत्वों से नहीं, बल्कि कुछ पुलिसकर्मियों से भी खतरा बढ़ता जा रहा है। खासकर अवैध गतिविधियों और संरक्षण देने वाले तंत्र को उजागर करने वाली पत्रकारिता पर यह सीधा हमला माना जा रहा है।

सबकी निगाहें अब पुलिस कार्रवाई पर

फिलहाल पूरा पत्रकार जगत और समाज की नजरें पुलिस प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं। यह मामला अब केवल एक पत्रकार की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोकतंत्र, कानून और प्रेस की स्वतंत्रता की कसौटी बन चुका है।

भेड़ाघाट के सहजपुर में ट्रेवल्स संचालक की दिनदहाड़े चाकू मारकर हत्या, ओवरब्रिज के नीचे वारदात से सनसनी

जबलपुर जिले के भेड़ाघाट थाना क्षेत्र अंतर्गत सहजपुर में दिनदहाड़े हुई एक सनसनीखेज हत्या ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। ट्रैवल संचालक युवक पाटन का निवासी था, जो घर से उज्जैन जाने का बता कर निकला था।

भेड़ाघाट थाना क्षेत्र अंतर्गत शाहपुरा सहजपुर ब्रिज के पास में दिनदहाड़े हुई एक सनसनीखेज हत्या ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। अज्ञात बदमाशों ने एक युवक पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर उसकी मौके पर ही हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी फरार हो गए, जबकि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी गई।

ओवरब्रिज के नीचे मिला युवक का खून से लथपथ शव

घटना सहजपुर ओवरब्रिज के नीचे की है, जहां स्थानीय लोगों ने एक युवक को गंभीर हालत में पड़ा देखा। पास जाकर देखने पर युवक खून से लथपथ था और उसके शरीर पर चाकू के कई वार के निशान थे। सूचना मिलते ही भेड़ाघाट थाना पुलिस मौके पर पहुंची, क्षेत्र को घेरा गया और पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल भिजवाया गया।

ट्रैवल संचालक है मृतक, पाटन का निवासी बताया जा रहा

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान अभिषेक उर्फ महेंद्र साहू (उम्र लगभग 27 वर्ष) के रूप में हुई है, जो पाटन थाना क्षेत्र का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि युवक ट्रेवल्स के व्यवसाय से जुड़ा हुआ था। परिजनों के अनुसार वह घर से उज्जैन जाने की बात कहकर निकला था, लेकिन रास्ते में यह खौफनाक वारदात हो गई।

दिनदहाड़े हत्या से इलाके में दहशत, कई सवाल खड़े

दिन के उजाले में ओवरब्रिज के नीचे हुई इस निर्मम हत्या से क्षेत्र में भय का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की वारदात से कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। हत्या के पीछे रंजिश, लूट या कोई अन्य कारण है—इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं, हालांकि पुलिस ने अभी किसी भी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

सीसीटीवी में कैद आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस, जांच जारी

भेड़ाघाट थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है और मृतक के संपर्कों को भी खंगाला जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही पूरे मामले का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।

जबलपुर के बाद सिहोरा में भी अवैध शराब के खिलाफ महिलाओं का उबाल, सड़क पर फोड़ी बोतलें

खमरिया, खिरवा और बरगी गांव की महिलाओं ने शराब बेचने आए व्यक्ति को घेरकर बोतलें छीन लीं और बीच सड़क तोड़ दीं।महिलाओं ने प्रशासन को बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है।

@फैज़ वारसी जबलपुर के बाद अब सिहोरा क्षेत्र में भी अवैध शराब के खिलाफ महिलाओं का आक्रोश खुलकर सड़क पर दिखा। सिहोरा के खमरिया, खिरवा और बरगी गांव की महिलाओं ने शराब बेचने आए व्यक्ति को घेरकर बोतलें छीन लीं और बीच सड़क तोड़ दीं। महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि अवैध शराब पर रोक नहीं लगी तो जिला स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

महिलाओं और बच्चों ने बीच सड़क फोड़ी अवैध शराब की बोतलें

सिहोरा क्षेत्र में अवैध शराब के खिलाफ सड़क पर उतरी महिलाएं

सिहोरा थाना क्षेत्र के गांव खमरिया, खिरवा और बरगी में अवैध शराब की बिक्री से परेशान महिलाओं ने गुरुवार को जोरदार प्रदर्शन किया। महिलाओं को सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति एक्टिवा में शराब भरकर गांव में बेचने की तैयारी कर रहा है। सूचना मिलते ही महिलाएं मौके पर पहुंचीं, व्यक्ति को घेर लिया और उसके पास मौजूद शराब छीनकर सड़क पर फेंक दी। प्रदर्शन कर रही महिलायें वीडियो में पुलिस पर भी आरोप लगाते सुनाई दे रही हैं। महिलाओं के अनुसार पुलिस को सूचना देने के बाद भी 2 घंटे तक पुलिस जब कार्यवाही करने नहीं आई तब उन्होंने मामला अपने हाथ में लिया।

बीच सड़क तोड़ी गईं शराब की बोतलें, गूंजे नारे

महिलाओं ने सड़क पर ही शराब की बोतलें फोड़ते हुए जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि अवैध शराब के कारण गांव का माहौल बिगड़ चुका है, आए दिन विवाद और मारपीट की घटनाएं हो रही हैं। नशे के कारण परिवार तबाह हो रहे हैं और युवा पीढ़ी तेजी से इसकी चपेट में आ रही है।

पहले भी किया था थाने का घेराव, फिर भी नहीं रुका कारोबार

महिलाओं ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने विरोध दर्ज कराया हो। अक्टूबर महीने में भी शराबबंदी की मांग को लेकर सिहोरा थाना का घेराव किया गया था, लेकिन इसके बावजूद क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार बेरोकटोक जारी रहा। इसी लापरवाही के चलते महिलाओं को अब खुद सड़क पर उतरना पड़ा।

सूचना पर पहुंचा आबकारी और पुलिस अमला, महिलाओं ने लगाए आरोप

प्रदर्शन की सूचना मिलते ही आबकारी विभाग और सिहोरा थाने का स्टाफ मौके पर पहुंचा। बड़ी संख्या में ग्रामीण भी घटनास्थल पर जमा हो गए थे। जब पुलिस के द्वारा इस शराब को जब्त करने की बात की गई, तो महिलाओं ने आरोप लगाए कि सूचना के 2 बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं। अधिकरियों ने किसी तरह आक्रोशित महिलाओं को शांत कराया, लेकिन महिलाओं का कहना साफ था कि अब केवल आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए।

नशे से बिगड़ रहा सामाजिक माहौल

प्रदर्शन कर रहीं महिलाओं का आरोप है कि खमरिया और खिरवा गांव में चारों ओर अवैध शराब बेची जा रही है। शराबियों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे महिलाओं और बच्चों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। युवाओं में नशे की लत तेजी से बढ़ रही है और इसका सीधा असर गांव की शांति और सुरक्षा पर पड़ रहा है।

सिंधी कैंप की मौतों का जिक्र हुआ ताज़ा

जबलपुर के सिंधी कैंप इलाके में बीते कुछ महीनों में 19 मौतों के बाद महिलाओं ने एसपी ऑफिस और कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराया था। अब आरोप है कि जांच के नाम पर आबकारी विभाग ने केवल औपचारिकता निभाई और यह जानने की कोशिश की गई कि मौतें कितने दिनों में हुईं, न कि यह कि शराब कहां से लाई गई थी। जो जांच की गई इसका मकसद सिर्फ यही नजर आया कि किस तरह से इन मौतों से पुलिस सहित आबकारी विभाग अपना पल्ला झाड़ ले।

FIR के आंकड़ों के सहारे मौतों को छिपाने का प्रयास

इस मामले में जो जांच की गई उसमें आबकारी विभाग ने क्षेत्रीय थाना प्रभारी से पूछा है कि शराब पीने से क्षेत्र में कितनी मौत हुई हैं। जिसका जवाब साफ है कि जिस थाने में अवैध शराब बिक्री ही थाना प्रभारी के संरक्षण में हो रही हो, वहां शराब से मौत के मामले में एफआईआर दर्ज होना तो नामुमकिन ही है। इस क्षेत्र के अवैध शराब बिक्री के कुछ वीडियो भी वायरल हुए है जो पुलिस सहित आबकारी के जिम्मेदारों की पोल खोल रहे हैं।

आबकारी के पंचनामे ही खोल रहे पोल

आबकारी विभाग ने मृतकों के परिजनों से बयान लेकर पंचनामे तैयार किए हैं। बयान में सवाल ही वही पूछे गए जो विभाग का बचाव करते हों। जैसे यह तो पूछा गया कि मृतक को शराब की लत कब से थी। लेकिन यह नहीं पूछा गया कि वह शराब खरीदता किससे था। यहां तक की कई परिजन तो अनपढ़ भी हैं जिन्होंने आबकारी के तथाकथित बयान पर अंगूठे लगाए हैं। आमतौर पर इस बस्ती में निम्न आय वर्ग के लोग रहते हैं, और शराब से मौत होने के बाद यह ना तो पुलिस शिकायत करते हैं ना ही शव का पोस्टमार्टम कराते हैं, इसलिए इस तरह की मौतों के मामले दब कर रह जाते हैं। लेकिन हैरानी की बात यह थी कि आबकारी विभाग के अधिकारियों को क्षेत्र में पड़ी हुई कच्ची शराब की पन्नियां भी नजर नहीं आई। हालांकि यह नजर आती भी कैसे क्योंकि जांच तो सिर्फ मामला दबाने के लिए की गई थी।

नस्ल के लिए काल बन रही अवैध शराब

अब आबकारी विभाग और पुलिस सहित प्रशासन चाहे जितनी सफाई दे जबलपुर के नागरिक जानते हैं कि अवैध शराब बिक्री की असलियत क्या है। जगह-जगह मैदानो से लेकर पार्कों तक में इसके सबूत नज़र आते हैं। लेकिन जब नजरअंदाज करने की ठान ही ली जाए तो फिर कुछ कैसे नज़र आ सकता है। पीड़ित तो बस अब यही दुआ कर रहे हैं कि चंद नोटो के लिए ऐसे व्यापार को नजरअंदाज करने वालों के परिवार पर भी कुछ ऐसा घटे कि उन्हें अपने कर्म याद आ जाएं। अब इन्हें सद्बुद्धि देने के लिए पीड़ितों को भगवान का ही सहारा रह गया है।

कांचघर हत्याकांड का खुलासा: संगम टेंट हाउस के सामने हुई हत्या के 4 आरोपी गिरफ्तार

थाना सिविल लाइन क्षेत्र के कांचघर इलाके में हुई युवक की हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। जबलपुर में हुई सनसनीखेज हत्या का पुलिस ने किया खुलासा, इलाज के दौरान युवक की मौत के बाद हत्या में बदला मामला, सिविल लाइन पुलिस की त्वरित कार्रवाई से आरोपियों की गिरफ्तारी।

@फैज़ वारसी जबलपुर। थाना सिविल लाइन क्षेत्र के कांचघर इलाके में हुई युवक की हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। 29 दिसंबर 2025 की शाम करीब 7 बजे संगम टेंट हाउस के सामने मोनू झरिया पर चार युवकों ने चाकू से जानलेवा हमला किया था। गंभीर रूप से घायल मोनू झरिया को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद मामला हत्या में तब्दील हो गया, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई थी।

इलाज के दौरान मोनू झरिया की मौत, हत्या में बदला मामला

घटना की गंभीरता को देखते हुए सिविल लाइन पुलिस ने विशेष टीमों का गठन किया। सीसीटीवी फुटेज, मुखबिरों से मिली सूचना और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने चार आरोपियों को चिन्हित कर गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों में (1) तुषार उर्फ रंगा उर्फ वीरा पिता ब्रजभान चौधरी (18 वर्ष), आर्यन पिता विनोद कुछबंधिया (18 वर्ष), (3) नवीन पिता सलाम गौरी (20 वर्ष) और (4) साहिल पिता मोहन चौधरी (20 वर्ष) शामिल हैं। सभी आरोपी घमापुर थाना क्षेत्र के शीतलामाई और कुचबंधिया मोहल्ला निवासी बताए हैं।

3 आरोपी अभी भी फरार, हथियार और वाहन हुए जब्त

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से हत्या में प्रयुक्त चाकू और दो मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। इस हत्याकांड में तीन अन्य आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। पूरे मामले के खुलासे में सिविल लाइन थाना, ओमती थाना और अपराध शाखा की संयुक्त टीम की अहम भूमिका रही।

आरोपियों का निकला जुलूस

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। कोर्ट ले जाने के दौरान इन आरोपियों को सड़क से पैदल लेकर जाया गया। इस दौरान आरोपी यह कहते हुए चल रहे थे कि अपराध करना पाप है और पुलिस हमारी बाप है।

विजयवर्गीय के ‘घंटा’ बयान पर कांग्रेस का पलटवार, कलेक्टर कार्यालय में घंटा बजाकर किया विरोध प्रदर्शन

कांग्रेस ने मंत्री के बयान को मीडिया का अपमान बताते हुए, घंटा बजाकर विरोध जताया। मुख्यमंत्री मोहन यादव से तत्काल मंत्री के इस्तीफे की मांग की है।

@फैज़ वारसी (जबलपुर) मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के आपत्तिजनक बयान को लेकर सियासत गरमा गई है। जबलपुर में कांग्रेस ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर घंटा बजाते हुए विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस ने मंत्री के बयान को मीडिया का अपमान बताते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव से तत्काल इस्तीफे की मांग की है।

कलेक्टर कार्यालय में कांग्रेस का प्रतीकात्मक प्रदर्शन

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान के विरोध में कांग्रेस ने जबलपुर के कलेक्टर कार्यालय परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। नगर कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ नाटी शर्मा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और घंटा बजाकर मंत्री के बयान पर आपत्ति जताई। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह विरोध उसी शब्द के प्रतीकात्मक जवाब के तौर पर है, जिसका प्रयोग मंत्री ने पत्रकार के सवाल पर किया था।

“जिस घंटे की बात कर रहे मंत्री, वही हम बजाकर पूछ रहे सवाल” – सौरभ नाटी शर्मा

कांग्रेस के जबलपुर नगर अध्यक्ष सौरभ नाटी शर्मा ने तीखे शब्दों में कहा कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पत्रकार के सवाल पर जिस “घंटा” शब्द का इस्तेमाल किया, उसी घंटे को बजाकर कांग्रेस सवाल पूछ रही है। उन्होंने कहा कि उनकी समझ में तो यही घंटा है, लेकिन मंत्री किस घंटे की बात कर रहे थे, यह वही जानें। सौरभ शर्मा ने मंत्री के बिगड़े बोलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र और मीडिया की गरिमा के खिलाफ बताया।

फ्रस्ट्रेशन में हैं मंत्री – कांग्रेस का आरोप

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा मंत्री कैलाश विजयवर्गीय उम्र और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के दबाव में फ्रस्ट्रेशन का शिकार हो चुके हैं। कांग्रेस का कहना है कि वह रिटायरमेंट से पहले मुख्यमंत्री बनना चाहते थे, लेकिन यह सपना पूरा न होने के कारण वह महिलाओं, बच्चियों और मीडिया कर्मियों से बदसलूकी जैसी हरकतें कर रहे हैं। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मांग की कि ऐसे मंत्री से तत्काल इस्तीफा लिया जाए, ताकि सरकार की छवि और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा हो सके।

क्या है पूरा मामला: इंदौर में दूषित पानी से मौतें

पूरा विवाद इंदौर के भागीरथपुरा इलाके से जुड़ा है, जहां दूषित पेयजल के कारण डायरिया का गंभीर प्रकोप फैल गया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस घटना में 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 212 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इनमें से करीब 50 मरीज ठीक होकर घर लौट चुके हैं। यह इलाका मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इंदौर-1 विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है।

मीडिया के सवाल पर आपा खो बैठे मंत्री

घटना को लेकर बुधवार रात मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मीडिया से बातचीत कर रहे थे। शुरुआत में उन्होंने शांतिपूर्वक सवालों के जवाब दिए, लेकिन जब निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों के बिलों के रिफंड और पीने के पानी की वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर सवाल पूछा गया, तो वह अचानक नाराज हो गए। इसी दौरान उन्होंने पत्रकार से कहा कि “फालतू सवाल मत पूछो” और बहस के बीच एक आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल कर दिया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

विवाद बढ़ने पर जताया खेद, लेकिन कांग्रेस संतुष्ट नहीं

वीडियो वायरल होने के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी टीम पिछले दो दिनों से बिना सोए हालात सुधारने में लगी है। हालांकि, कांग्रेस ने इसे पर्याप्त नहीं मानते हुए कहा कि केवल खेद जताना काफी नहीं है। पार्टी का कहना है कि मीडिया के प्रति इस तरह का व्यवहार अस्वीकार्य है और इसके लिए नैतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

सियासत तेज, आगे और बढ़ सकता है मामला

कांग्रेस के इस प्रदर्शन के बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर कांग्रेस इस्तीफे की मांग पर अड़ी है, वहीं दूसरी ओर भाजपा इसे परिस्थितियों का दबाव बता रही है। साफ है कि दूषित पानी से हुई मौतों का मामला अब प्रशासनिक संकट से निकलकर बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है।