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शनिवार, अगस्त 30, 2025
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सरदार लौटेंगे या लौटने में फिर से पाँच साल लगेंगे?

संस्कारधानी में कोई बात निकले और दूर तलक न पहुँचे, ऐसा नामुमकिन है। एक बात ऐसे ही निकल आई है। दोस्त कहें, हितैषी, समर्थक या कबीला! लेकिन ये जो भी हैं, उससे तो नाराज़ हैं जिसे कुछ महीनों पहले सिर-आँखों पर बैठाकर उस किले का सरदार बनाया जिसके लिए दर्जनों लोग कोशिश में थे। किले का सरदार बनते ही उस सरदार के बचपन के कुछ साथियों ने उसे घेर लिया। और उन्होंने उस सरदार के इर्द-गिर्द ऐसे घेराबंदी कर दी कि कोई और सरदार के करीब न आ सके। अब सरदार के ऊपर किले के साथ-साथ उसकी सीमा में रहने वाले लोगों के प्रति कुछ ज़िम्मेदारियाँ भी हैं। तो सरदार उसमें व्यस्त रहने लगा, जो समय बचता वो उसके समीप रहने वाले लोगों के साथ चला जाता। सरदार को उन लोगों से मिलने नहीं दिया जाता या सरदार खुद नहीं मिलता, जो उसके उस किले का सरदार बनने के सफर में न सिर्फ शामिल रहे बल्कि उन्होंने उसे सरदार बनाने के लिए काफी संघर्ष भी किया। लेकिन कहते हैं किसी इंसान की सही पहचान तब होती है जब उसके पास कोई बड़ा पद, शक्ति, सत्ता, धन या स्त्री आ जाए। उन दोस्तों और कबीले वालों को सरदार की पहचान धीरे-धीरे होने लगी। जब ज़्यादातर उनके साथ रहने वाला सरदार अब गाहे-बगाहे भी उनसे मिलने न आता। बुलाने पर नहीं आता, न किसी के जन्मदिन में और न किसी कि विदाई में। अब दिवाली आ रही है और उसके कुछ सालों बाद फिर अलग तरह की सरदारी का दावा करने का वक़्त भी। सरदार ने दिवाली के पहले खबरनवीसों को तोहफे बांटे हैं, बैठकें कर रहे हैं और मिलन समारोह भी। हालांकि इन सबमें कबीले के पुराने लोग और दोस्त नहीं पहुँचे। दिवाली में प्रभु राम वनवास से लौटकर और रावण से जीतकर आयोध्य लौट आए थे। सरदार भी लौटेंगे या नहीं या लौटने में पाँच साल लगेंगे, ये सरदार बताएंगे या तो समय।

शुभ दीपवाली

कल्चरल स्ट्रीट में “शब्द” का ओपन माइक 29 और 30 को

दो दिवसीय साहित्य, रंगकर्म और सिनेमा से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन

बीते वर्ष की ही तरह इस वर्ष भी कालजयी अनिल कुमार श्रीवास्तव फाउंडेशन की ओर से एक साहित्य उत्सव ‘ शब्द ‘ का आयोजन 29 व 30 अक्टूबर को संस्कृति थिएटर कल्चरल स्ट्रीट में किया जा रहा है। इस दो दिवसीय आयोजन में साहित्य की विविध विधाओं के अंतर्गत अलग-अलग आयोजन दो दिनों तक चलेंगे। 29 को सुबह 11 बजे उद्घाटन सत्र है। फिर अन्य सत्र होंगे। फाउंडेशन के सदस्यों का निवेदन है कि उद्घाटन सत्र से लेकर दिन भर के आयोजन में आप उपस्थित होकर आयोजन की गरिमा बढ़ाएं। साथ ही देश भर से आने वाले साहित्यकारों से रू- ब- रू होने का लाभ भी लें। इसके साथ ही साहित्य में रुचि रखने वाले युवाओं के लिए दोनों दिनों में ओपन माइक का सत्र भी रखा गया है। जिसमे युवा साथी अपनी स्वरचित कविताओं का पाठ करने के लिए आमंत्रित हैं।कृपया इच्छुक युवा साथी व साहित्य साधक – 7748804673 पर सम्पर्क कर सकते हैं। और ओपन माइक के लिए पंजीयन करवा सकते हैं। पंजीयन निःशुल्क है।

झांसी की रानी, सुभद्रा कुमारी चौहान और सिंधिया का सफेद झूठ

राजेन्द्र चंद्रकांत राय ने अपने लेख में तथ्यों के आधार पर बताया कब, कहाँ क्या हुआ...

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर के अपने राजमहल में 164 साल बाद झांसी की रानी लक्ष्मी बाई को एक महान् योद्धा के रूप में प्रतिष्ठित करते हुए कहते हैं, ‘एक कविता से इतिहास नहीं बदला जा सकता है। यह भ्रम फैलाया गया कि सिंधिया राजवंश ने रानी लक्ष्मीबाई का साथ नहीं दिया था।’ ऐसा कहते हुए वे यह भूल जाते हैं कि यदि सिंधिया राजवंश ने रानी लक्ष्मीबाई का साथ दिया था, तो 164 सालों तक उनके प्रति उस राजवंश का दुराव क्यों बना रहा। वे इतिहास की तरफ पीठ करके ही ऐसी बातें कर रहे हैं। सुभद्रा कुमारी चौहान के अमरगीत ‘झांसी की रानी’ को सिंधिया राजवंश के बारे में भ्रम फैलाने वाली कविता बताने के लिये हम ज्योतिरादित्य सिंधिया की कड़े शब्दों में भर्त्सना करते हैं। सुभद्रा कुमारी चौहान ने ‘झांसी की रानी’ गीत की रचना, स्वाधीनता आंदोलन के दिनों में, जबलपुर कारागार में की थी। सन् 1930 ईस्वी में उनका पहला काव्य संग्रह ‘मुकुल’ का प्रकाशन हुआ था। इसी संग्रह में ‘झाँसी की रानी’ गीत भी संग्रहित है।

पिछले 80-90 सालों से यह गीत संपूर्ण भारतवर्ष में लोगों की जुबान पर बना हुआ है। साहित्य-सृजन किसी राजवंश या व्यक्ति के बारे में भ्रम फैलाने के लिये नहीं किया जाता। उसका महान् उद्देश्य हुआ करता है। इस गीत का भी एक महान् उद्देश्य था, भारत की स्वाधीनता। जिनके राज्य में सूर्यास्त नहीं होता था, उनके चंगुल से देश को मुक्त कराने के लिये आमजन में जोश जगाना।

सुभद्रा जी स्वाधीनता आंदोलन के दौरान स्वयं ही ‘झांसी की रानी’ गीत को गाकर सुनाया करती थीं। वे अपने कथ्य और संवेदना को सरलतम और जनभाषा में अभिव्यक्त करने में निपुण थीं। यह गीत, सुनने वालों को जोश से भर देता था। उनकी इस रचना की लोकप्रियता और आम लोगों पर उसका प्रभाव देख कर, अँग्रेजों ने उसे जब्त कर लिया था।एनसीईआरटी ने भी इसी साल,‘नयी शिक्षा नीति’ के लागू होते ही अपनी स्कूली पाठ्यपुस्तकों से इस गीत को हटा कर अंग्रेजों के पद्चिन्हों पर चलने का ही काम किया है। सुभद्रा जी के इस गीत में एक पंक्ति इस तरह आती है- ‘अंग्रेजों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी रजधानी थी।’ यह पंक्ति गीत-रचना के लिये चुनी गयी झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की शौर्यगाथा के कथानक का ही एक हिस्सा है, जो इतिहास-सिद्ध भी है। क्रिस्टोफर हिबर्ट ने अपनी विख्यात किताब, ‘द ग्रेट म्यूटिनी इंडिया : 1857’ में लिखा है, ‘‘उन्होंने (विप्लवकारियों ने) यह फैसला किया कि वे ग्वालियर कूच करेंगे। दरअसल ब्रिटिश अफ़सर की अगुवाई वाली ग्वालियर की एक सैन्य टुकड़ी के द्रोह करने के बावजूद उन्हें यह भरोसा था कि युवा महाराजा (जयाजीराव) सिंधिया की सेना को साथ देने के लिये मनाया जा सकता है, जिसमें दो हजार से ज्यादा जांबाज सिपाही मौजूद हैं। महाराजा (जयाजीराव सिंधिया) अब भी इसी राय के पक्षधर बताये जा रक थे कि ब्रिटिशों को कभी शिकस्त नहीं दी जा सकती। विप्लवकारी अगुवाओं ने ग्यारह हजार सिपाहियों और बारह तोपों के साथ ग्वालियर मार्च शुरु कर दिया। महाराजा (जयाजीराव सिंधिया) ने उन्हें मुरार के निकट टक्कर दी लेकिन एक चक्र गोलीबारी के बाद ही उनकी तोपों पर कब्ज़ा कर लिया गया। इस अप्रत्याशित हादसे ने महाराजा की सेना को विप्लवकारियों का साथ देने के लिये प्रेरित किया। उनके (जयाजीराव सिंधिया के) निजी अंगरक्षकों ने रुकने का निर्णय लिया, परंतु शीघ्र ही महाराजा को अपने अंगरक्षकों सहित आगरा की सुरक्षा हेतु कूच करने पर मज़बूर होना पड़ा।’’ (प्रकाशक, संवाद प्रकाशन, मेरठ, पहला संस्करण, 2008, पृष्ठ 459) यह एक अंग्रेज लेखक के द्वारा लिखी गयी किताब है, इसलिये जरा नरम भाषा में कहा गया है, कि ‘महाराजा को अपने अंगरक्षकों सहित आगरा की सुरक्षा हेतु कूच करने पर मज़बूर होना पड़ा।’

भारतीय लेखक श्री जगदीश जगेश अपनी पुस्तक, ‘कलम आज उनकी जय बोल’ में लिखते हैं, ‘‘ यहाँ (22 मई, 1857 को क्रातिकारियों का दल ग्वालियर पहुंचा था) राजा (जयाजीराव)  सिंधिया के विरुद्ध विद्रोह करके (उनकी) सेना क्रांति  में सम्मिलित हो गयी। सिधिंया आगरा भाग गया।’’ (प्रकाशक, हिंदी प्रचार संस्थान, 1989, पृष्ठ 34)
यानी जयाजीराव सिंधिया तो अंग्रेजों के साथ बने रहे, परंतु उनकी सेना ग़दर के साथ हो गयी थी।
सुप्रसिद्ध लेखिका महाश्वेता देवी ने इसी प्रसंग को अपने उपन्यास -झांसी की रानी’ में इस तरह से लिखा है, ‘‘रानी लक्ष्मीबाई ने अपने डेढ़ सौ घुड़सवारों को  लेकर आगे आकर सिंधिया की गति को रोक दिया। उसे देख कर जैसा सुना था वैसी असहाय तो सिंधिया को वे नहीं लगीं। इस बीच तात्या और बांदा के नवाब आगे आ गये। तात्या का सांवला रंग, दृढ़ संकल्पपूर्ण चेहरा देख कर शंकित सिंधिया जब सहायता के लिये कातर होकर अपने सरदारों की तरफ देखते हैं, तब भारतीयों की तरफ से एक सैनिक तलवार हाथ में लेकर आगे आ गया। सारे भारतीय नेतागण साथ-ही-साथ तलवार ऊंची करके समवेत स्वर में गर्जन कर उठे- दीन! दीन हर हर महादेव! उसी समय सिंधिया की सारी सेना यन्त्रचालित की तरह भारतीय पक्ष में जाकर खड़ी हो गयी। ‘‘स्थिति पूरी तरह अपने प्रतिकूल देख कर सिंधिया अपने कुछ देहरक्षकों के साथ निकटवर्ती एक पहाड़ की तरफ भाग गये। पीछा करके भारतीय सैनिकों ने प्रायः साठ देहरक्षकों को मार  दिया। ‘‘ इसके बाद भगोड़े सिंधिया द्रुतगति से फूलबागवाले प्रासाद  में जाकर पोशाक बदलकर आगरा के रास्ते धौलपुर की ओर भाग गये।’’ (प्रकाशक, राधाकृष्ण पेपरबैक्स, हिंदी अनुवाद राधाकृष्ण प्रकाशन, सन् 2000, पृष्ठ 243)

लॉर्ड कैनिंग ने कुल तीन दरबार किए थे। पहला दरबार उस समय किया था, जब भारत में स्वाधीनता पाने के लिये विप्लवी शुरुआत होने को थी। उस समय अंग्रेजों की प्राथमिकता थी , देसी राजाओं-नवाबों को अपने साथ रखना। उस पहले दरबार में ग्वालियर से जयाजी राव सिंधिया भी गए थे। ‘जयाजी विजय” शीर्षक किताब के लेखक सरदार फालके के दादा उस दरबार में जयाजी राव सिंधिया के साथ गए थे और उन्होंने सिंधिया को अंग्रेजों के प्रति वफ़ादारी की क़समें खाते हुए अपनी आांखों से देखा था। कैप्टन मैक्फ़र्सन 1857 की ग़दर के समय ग्वालियर में रेज़ीडेंट पद पर था, उसने भी अपनी डायरी में जयाजी राव द्वारा झांसी की रानी के विरुद्ध मोर्चा बनाने की बात लिखी है। विनायक दामोदर सावरकर ने भी अपनी पुस्तक ‘1857, भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम’ में यह तथ्य स्वीकार किया है।

खोजने पर बहुत सी किताबें और उद्धरण मिल जायेंगे। इतिहास आखि़र इतिहास होता है। उसे दबाया, छिपाया या मिटाया नहीं जा सकता। यह ज्यादा अच्छा होता यदि वे अपने पूर्वजों के कृत्य के लिये सार्वजनिक क्षमा याचना करते और प्रायश्चित करने का संकल्प भी लेते। ऐसा करने की बजाय, उन्होंने एक ओछा रास्ता चुना और स्वाधीनता सेनानी कवयित्री सुभद्राकुमारी चौहान पर ही निम्नस्तरीय आरोप जड़ दिया। उनके इस आचरण की जितनी भी भर्त्सना की जाये, कम ही होगी।

राजेंद्र चंद्रकान्त राय, रमाकान्त श्रीवास्तव, सुधीर सक्सेना, कल्बे कबीर, संगम पाण्डे, श्रीकान्त चौधरी, राजेश बहुगुणा, वरयाम सिंह, उमाशंकर सिंह परमार, मोहन कुमार डेहरिया, रामदेव धुरंधर, श्याम कटारे, अनामिका तिवारी, हर्ष तिवारी, मुकुल यादव, नंदलाल, डॉ आभा दुबे, प्रो मगनभाई पटेल, मोहन नागवानी, राजेंद्र सिंह ठाकुर, आनंद नेमा, सुनीता श्रीनीति, खुशी शाह, निर्मला गर्ग, शशि काशीकर, किंशुक तिवारी, अनिरुद्ध सिन्हा,  राजीव शंकर गोहिल, राजकुमार सिन्हा, सत्येंद्र तिवारी, दुर्गा प्रसाद बाजपेई, वीरेंद्र मोहन, बनास जन, केशव तिवारी, वरयाम सिंह, अनिरुद्ध सिन्हा, नवीन चौबे, राजेश उत्साही, सुशीला पुरी, विनोद बिहारी दास, ग़ज़ल नशीने, विनय अंबर, रामलाल भारती, अपूर्व, राजेंद्र राजन, डॉ राकेश पाठक, वीरेंद्र मोहन, एकता मंडल, लोक बाबू।

कराते में सानिया ने जीता कांस्य

66 वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा कुराश प्रतियोगिता में के.एल.सोनकर स्कूल बरेला की छात्रा सानिया रैकवार ने कांस्य पदक पर कब्जा जमाया। जहा पर प्रदेश के बड़े दिग्गज खिलाड़ियों मे जबलपुर कि बेटी ने जबलपुर का नाम रोशन किया । तीन दिवसीय क्रीड़ा कुराश प्रतियोगिता का आयोजन विदिशा जिले के विनायक बैंकट हॉल में किया गया है। राज्य स्तरीय शालेय कुराश प्रतियोगिता में इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, भोपाल, नर्मदापुरम, उज्जैन,रीवा,सागर, आदिवासी विकास खण्ड ,चम्बल सम्भाग से 380 खिलाड़ियों के प्रतियोगिता में भाग लिया।राज्य स्तरीय शालेय कुराश प्रतियोगिता का समापन 14 अक्टूबर को किया गया जिसमें के.एल.सोनकर स्कूल बरेला की छात्रा सानिया रैकवार ने जबलपुर सम्भाग टीम दल का प्रतिनिधित्व करते हुए अपने आयु व वजन वर्ग में कांस्य पदक पर कब्जा जमाते हुए सफलता अर्जित की । सानिया रैकवार मार्शल खेल प्रशिक्षक जयराज चौधरी के मार्गदर्शन में सी.एम.राइज शासकीय आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरेला जबलपुर में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। सानिया रैकवार की इस उपलब्धि पर सम्भागीय क्रीड़ा अधिकारी आशा सिसोदिया, जिला क्रीड़ा अधिकारी चंदा सोनी, जनरल मेनेजर उजयारेलाल हल्दकार,के.एल.सोनकर स्कूल बरेला प्राचार्य मदन साहू,सी.एम.राइज शासकीय आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरेला के प्राचार्य डॉ देवेन्द्र कुमार गुप्ता, खेल शिक्षक अनिल सोनकर, प्रशिक्षक जयराज चौधरी, मानव क्रीड़ा एवं कला एकेडमी की संरक्षिका अर्जुन अवार्डी मधु यादव, संरक्षक मिलन मुखर्जी, अध्यक्ष राजकुमार यादव (अंतरराष्ट्रीय मार्शल खेल प्रशिक्षक) वरिष्ट उपाध्यक्ष गुड्डू नवीं (एम.आई.सी.सदस्य प्रतिनिधि नगर निगम जबलपुर), उपाध्यक्ष मिलिंद्र भालेकर, महासचिव शिवानी बेन, संयुक्त सचिव जयराज चौधरी,झामसिह तेकाम ,कोषाध्यक्ष सुजेश नायडू ,आदि ने शुभकामनाएं एवं बधाइयां प्रेषित कर इनके उज्जवल भविष्य की कामना की ।

बूढ़े हाथों ने मिट्टी को आकार “दीया”, अब बिकने को हैं तैयार केलेक्ट्रेट में

दीपवाली में मिट्टी के दीये न सिर्फ घर को रोशन करते हैं बल्कि ये पर्यावरणनुकूल भी हैं। रोशनी के इस पर्व में दीपों का विशेष महत्त्व है। इसलिए सभी वर्ग के लोग दीपवाली में दीपों का उपयोग आवश्यक रूप से करते हैं। सोचिए आपके घर को रोशन करने वाला दीपक ऐसे हाथ से बना हो जो परिवार के बिना जीवन बिता रहा हो, जिसके चेहरे पर वक़्त ने लकीरें खींच दी हों। शायद उसकी नाउम्मीद आँखें फिर अपने परिवार की खुशियों को देखने न जा पाएँ। ऐसे में उस दीपक की वजह से वो आपके घर की खुशियों का हिस्सा बन सकता है। कैसे?

इसके लिए आपको केलक्ट्रेट जबलपुर जाना होगा। जहां जिला रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा संचालित वृद्धाश्रम के वृद्धजनों द्वारा दीपावली के मद्देनजर आकर्षक स्वरूप में तैयार किये गये मिट्टी से बने दीये और सजावटी सामग्री का विक्रय कलेक्टर कार्यालय के मार्गदर्शन कक्ष से किया जा रहा है।

कलेक्टर ने की सराहना – कल कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी ने वृद्धाश्रम के वृद्धजनों द्वारा तैयार की गई इन सजावटी सामग्री के स्टॉल का अवलोकन भी किया। उन्होंने इस अवसर पर वृद्धजनों द्वारा मिट्टी से बनी सजावटी सामग्री एवं दीयों रंगरोगन कर दिये गये आकर्षक स्वरूप की सराहना की। इस अवसर पर जिला रेडक्रॉस के सचिव आशीष दीक्षित ने बताया कि वृद्धाश्रम के वृद्धजनों द्वारा तैयार किये गये दीये और सजावटी सामग्री का एक स्टॉल बाजनामठ स्थित वृद्धाश्रम में भी लगाया जायेगा। जहां नागरिक इसका अवलोकन कर इन्हें खरीद सकेंगे।

कलेक्टर ने एलपीजी फिलिंग स्टेशन और पेट्रोलियम डिपो के दो किलोमीटर परिधि में प्रतिबंधित की आतिशबाज़ी

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दीपावली के पर्व के अवसर पर किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को टालने तथा लोक व्यवस्था सुनिश्चित करने के मद्देनजर, कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी ने शहपुरा भिटौनी में स्थित एलपीजी फिलिंग स्टेशन और पेट्रोलियम के बल्क डिपो के दो किलोमीटर की परिधि के अंदर पटाखा छोड़ने और आतिशबाज़ी प्रतिबंधित करने का आदेश जारी कर दिया है। इस आदेश के मुताबिक ज़िले के भीतर पेट्रोलियम पदार्थ और एलपीजी भंडारण-संग्रहण के समस्त केन्द्रों के दो किलोमीटर परिधि के अंदर भी पटाखा छोड़ना और आतिशबाजी करना प्रतिबंधित है। यह आदेश अगले महीने यानि 5 नवंबर तक लागू रहेगा। प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरूद्ध भारतीय दंड विधान की धारा 188 के अंतर्गत कार्यवाही की जायेगी।

आयुध निर्माणी डिपो के सौ मीटर परिधि में भी आतिशबाजी प्रतिबंधित – आयुध निर्माणी डिपो और आसपास के क्षेत्र में भी पटाखा छोड़ने और आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। कलेक्टर ने इस संबंध में एक आदेश जारी कर आयुध निर्माणी के आस-पास 100 मीटर की परिधि में आतिशबाजी करते और पटाखा छोड़ते पाये जाने वाले व्यक्ति के विरूद्ध कानूनी कार्यवाही के निर्देश दिये हैं।

रानी दुर्गावती पर चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन 21 को

रानी दुर्गावती के शौर्य और बलिदान का महत्व छात्र-छात्राओं को ज्ञात हो सके इसके लिए उनके जीवन और उनके कार्यों पर आधारित चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रतियोगिता 21 अक्टूबर को भंवरताल उद्यान में वीरांगना दुर्गावती की प्रतिमा के समक्ष प्रात: 8.30 से 9.30 बजे तक आयोजित होगी। प्रतियोगिता का तत्काल निर्णय निर्णायक करेंगे और 10.15 बजे पुरुस्कार वितरण भी होगा। मित्रसंघ, जिला प्रशासन और नगर निगम जबलपुर के सहयोग से इस प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है।

यह प्रतियोगिता दो वर्गों में होगी जिसमें ग्रुप ए कक्षा 5 वीं से 8 वीं तक और ग्रुप बी कक्षा 9 वीं से 12 वीं तक के छात्र-छात्राएँ होंगे। दोनों ही ग्रुपों के विजेताओं को प्रथम पुरुस्कार 51 सौ, द्वितीय पुरुस्कार 21 सौ और तृतीय पुरुस्कार 11 सौ रुपये दोनों ही वर्गों में अलग-अलग दिए जायेंगे। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्र-छात्राएं 19 अक्टूबर तक मोबाईल नंबर 8889450003 पर नि:शुल्क पंजीयन करा सकते हैं।

मोबाईल फूड टेस्टिंग लैब ने 60 खाद्य पदार्थों की मौके पर की जांच

रविवार वर्ल्ड फूड डे के अवसर पर आज खाद्य सुरक्षा प्रशासन जिला जबलपुर द्वारा हॉकर्स जोन सब्जी मार्केट बड़ा पत्थर रांझी मे जागरूकता कार्यक्रम व लाइसेंस रजिस्ट्रेशन कैंप शाम 6:00 बजे से आयोजित किया गया। जिसमें जिसमें उपस्थित सब्जी विक्रेताओं को खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच करने लाइसेंस स्टेशन के साथ ही खाद्य कारोबार करने के संबंध में जानकारी दी गई चलित खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला द्वारा मौके पर ही 60 खाद्य पदार्थों के मौके पर भी जांच की गई। विदित हो कि आयुक्त खाद्य सुरक्षा मध्य प्रदेश भोपाल के निर्देश पर ये जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्यालय खाद्य सुरक्षा अधिकारी पंकज श्रीवास्तव, विनोद धुर्वे, मध्य प्रदेश पथ विक्रेता एकता संघ के अध्यक्ष प्रवीण तिवारी, उपाध्यक्ष सोनेलाल पटेल, रांची सब्जी मंडी के अध्यक्ष राजकुमार कुशवाहा के साथ मोहन कुशवाहा संतु जयसवाल एवं बल्ली कुशवाहा आदि लोग उपस्थित रहे।

रैन बसेरा में मरीज़ों के परिजन ही रुक पाएंगे, चौबीस घंटे रसोई सुविधा उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जाएंगे: कलेक्टर

कल रविवार की दोपहर मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित रैनबसेरा का कलेक्टर डॉ इलैयाराजा टी ने निरीक्षण किया। जहां उन्होंने मरीज़ों के परिजनों को दी जाने वाली तमाम सुविधाओं और भोजन व्यवस्थाओं का जायज़ा लिया। जिसे उन्होंने बेहतर बनाने की आवश्यकता बताई। विदित हो कि कलेक्टर डॉ इलैयाराजा टी द्वारा किये जा रहे प्रयासों के परिणामस्वरूप मेडिकल कॉलेज स्थित रैनबसेरा का जीर्णोद्धार कर कई सुविधायें जुटाई गयीं और इसे आकर्षक स्वरूप दिया गया। जिसके अंतर्गत मरीजों के परिजनों की रुकने की व्यवस्था के साथ-साथ यहाँ कपड़े धोने और नहाने के लिये वाशिंग एरिया भी बनाया गया।

रैनबसेरा के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने कमियों को दूर करने अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने वहाँ सिर्फ पेशेंट के अटेंडेंट्स को ही रुकने की इजाजत देने के निर्देश मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों को दिये। उन्होंने कहा कि रैनबसेरा की नई बिल्डिंग में भी मरीजों के परिजन रूक सकें इसके लिये सभी जरूरी इंतजाम शीघ्र किये जायें। 

कलेक्टर ने इस अवसर पर कहा कि हमारी कोशिश रेन बसेरा में मरीजों के परिजनों के लिये ठहरने की सुविधाओं में और इज़ाफ़ा करने की है। उन्होंने कहा कि दूर से आने वाले कई मरीज ऐसे भी होते हैं जिन्हें उपचार के दो या तीन दिन के अन्तराल के बाद फॉलोअप के लिये दुबारा बुलाया जाता है। ऐसे मरीजों और उनके अटेंडेंट भी रैनबसेरा में रूक सकें इसके लिये भी समुचित इंतजाम किये जा रहे हैं। साथ ही हमारी कोशिश रैनबसेरा स्थित रसोई से चौबीस घण्टे मरीजों के परिजनों को भोजन की उपलब्ध करवाने की भी है। ताकि दूर से आने वाले मरीजों को अपने साथ भोजन बनाने के लिये सामग्री लेकर न आना पड़े। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर रसोई संचालित करने वालीं सामाजिक संस्थाओं से चर्चा चल रही है और संस्थायें इस पर सहमत भी हैं।

कलेक्टर ने निरीक्षण के दौरान रैनबसेरा परिसर में साफ-सफाई पर और अधिक ध्यान देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि परिसर हमेशा साफ-सुथरा रहना चाहिये। रैनबसेरा परिसर में कोई भी खाना बनाते नहीं दिखना चाहिये। कलेक्टर ने रैनबसेरा के आसपास सफाई में कमी पाये जाने पर सफाई ठेकेदार को नोटिस जारी करने और अर्थ दण्ड लगाने के निर्देश भी मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों को दिये। कलेक्टर ने रैनबसेरा परिसर निरीक्षण के पहले मेडिकल कॉलेज परिसर में नवनिर्मित पार्किंग का भी अवलोकन किया। इस दौरान मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ गीता गुईन, मेडिकल अस्पताल के अधीक्षक डॉ अरविन्द शर्मा भी मौजूद थे।

भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने सातवीं बार जीता महिला एशिया कप

शनिवार को श्रीलंका के साथ हुए क्रिकेट के फाइनल मुक़ाबले में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय सिलहट क्रिकेट स्टेडियम में खेले जा रहे इस T20 मैच में श्रीलंका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का फैसला लिया। जो उनके लिए ग़लत साबित हुआ और श्रीलंका की टीम 9 विकट गँवाकर भारत को सिर्फ 65 रन का लक्ष्य दे पाई। जिसे भारत की स्मृति मन्धाना ने नौवे ओवर की तीसरी गेंद में एक बेहतरीन 6 रन के शॉट के साथ न सिर्फ़ अपना अर्द्धशतक पूरा किया बल्कि धमाकेदार ढंग से अपनी टीम को भी जीत दिलाई। प्लेयर ऑफ़ द मैच रेणुका सिंह रहीं जिन्होंने तीन विकेट लिए और प्लेयर ऑफ़ द सीरीज़ दीप्ति शर्मा रहीं। जीतने के बाद महिला क्रिकेट टीम ने मैदान में ही जमकर ख़ुशी मनाई। भारतीय टीम की एशिया कप पर ये ऐतिहासिक सातवीं जीत है।