मंडला, त्योहारों के अवसर पर हाट-बाजारों में चाट-फुलकी के ठेलों में खाद्य सामग्रियों के रख-रखाव और परोसते समय साफ-सफाई पर ध्यान नहीं दिया जाता है। इससे चाट-फुलकी का सेवन करने वालों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है। पिछले दिनों मंडला और चिरईडोंगरी में पानीपुरी(फुल्की) के सेवन से 80 लोगों को उल्टी-दस्त की शिकायत भी हुई। जिससे उनका इलाज जिला अस्पताल मंडला में चल रहा है। इन परिस्थितियों के मद्देनजर अपर कलेक्टर मीना मसराम ने 23 अक्टूबर को सम्पूर्ण मंडला ज़िले में चाट-फुल्की लगाने वाली दुकानों और हाथ ठेलों को उनकी गुणवत्ता की जांच पूरी होने तक इस तरह की खाद्य सामग्रियों का विक्रय प्रतिबंधित कर दिया है। इसके लिए उन्होंने लिखित में आदेश भी जारी किया है।
दिवाली के दिन लोग देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के उद्देश्य से पूजन करते हैं। लेकिन बहुत से लोग इस दिन का उपयोग विशेष सिद्धि पाने या तंत्र साधना के लिए भी करते हैं। आप अपने प्रयोजन के अनुसार पूजा का मुहूर्त चुनकर उस समय पूजा करें। ताकि आपको अपने प्रयोजन की पूर्ति में सफलता मिल सके।
आज कार्तिक अमावस्या को प्रदोष काल शाम 5 बजकर 43 मिनट से शुरू होगा। इस समय चर चौघड़िया रहेगा जो शाम में 7 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। उसके बाद रोग चौघड़िया लग जाएगा। शाम में मेष लग्न 6 बजकर 53 मिनट तक है। ऐसे में स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए स्थिर लग्न में शाम 6 बजकर 53 मिनट से 7 बजकर 30 मिनट से पहले गृहस्थ जनों को देवी लक्ष्मी की पूजा आरंभ कर लेनी चाहिए।
निशीथ काल में दीपावली पूजा: जो लोग प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन नहीं कर पाते हैं या विशेष सिद्धि के लिए लक्ष्मी पूजन करना चाहते हैं वह दीपावली की रात में निशीथ काल में 8 बजकर 19 मिनट से रात 10 बजकर 55 मिनट के बीच पूजा कर सकते हैं।
महानिशीथ काल में दीपावली पूजा: महानिशीथ काल में दीपावली की साधना साधक लोग करते हैं। तंत्र साधना के लिए यह समय अति उत्तम रहेगा। रात 10 बजकर 55 मिनट से रात 1 बजकर 31 मिनट महानिशीथ काल में तंत्रोक्त विधि से दीपावली पूजन किया जा सकता है।
दीपावली के पावन अवसर पर देश में जगह-जगह पर दीपावली का पर्व मनाया गया । इस पावन मौके पर संस्कारधानी जबलपुर में हेल्पिंग हैंड्स एम.पी.20 टीम द्वारा तिलवारा घाट व अन्य जगह पर बच्चों को पटाखे मिठाई व कपड़े वितरित कर दिवाली मनाई गई । हेल्पिंग हैंड्स एम.पी.20 टीम द्वारा बच्चों व जरूरतमंदो के साथ हर त्यौहार बनाकर खुशियां बांटते हैं यह टीम लगभग 3 वर्षो से लगातार जरूरतमंदों की मदद कर रही है । इस टीम के प्रमुख सदस्य अभय द्विवेदी, पुष्पराज सिंह कुशवाहा, संतोष द्विवेदी, सांराश राजपूत, देवराज राजपूत, शिवम मरावी, दीपिका, नीलम, राम, प्रवीण ,अक्षत आदि उपस्थित रहे ।
भारतीय परिवारों में दिवाली के दिन भी कुछ न कुछ काम चलते रहते हैं। ऐसे में भागमभाग के चलते पूजन के समय ज़रूरी चीजें छूट जाती हैं। जो बाद में मन में खटकती रहती हैं। आपके साथ ये स्थिति न हो इसलिए कुछ ज़रूरी तैयारियां और चीजें यहाँ दी जा रही हैं।
ज़रूरी है लिपाई-पुताई: वर्षा के कारण गंदगी होने के बाद संपूर्ण घर की सफाई और लिपाई-पुताई करना जरूरी होता है। मान्यता के अनुसार जहां ज्यादा साफ-सफाई और साफ-सुथरे लोग नजर आते हैं, वहीं लक्ष्मी निवास करती हैं। किसी कारणवश यदि लिपाई-पुताई न कर पाए हों तो पूजा के कमरे में पोछा लगाकर ही पूजन की तैयारी करें।
वंदनवार: आम या पीपल के नए कोमल पत्तों की माला को वंदनवार कहा जाता है। इसे अक्सर शुभ कार्यों के समय द्वार पर बांधा जाता है। दीपावली के दिन भी द्वार पर इसे बांधना चाहिए। वंदनवार इस बात का प्रतीक है कि देवगण इन पत्तों की भीनी-भीनी सुगंध से आकर्षित होकर घर में प्रवेश करते हैं।
रंगोली: रंगोली या मांडना को ‘चौंसठ कलाओं’ में स्थान प्राप्त है। उत्सव-पर्व तथा अनेकानेक मांगलिक अवसरों पर रंगोली से घर-आंगन को खूबसूरती के साथ अलंकृत किया जाता है। इससे घर-परिवार में मंगल रहता है।
दीपक: पारंपरिक दीपक मिट्टी का ही होता है। इसमें 5 तत्व हैं- मिट्टी, आकाश, जल, अग्नि और वायु। हिन्दू अनुष्ठान में पंच तत्वों की उपस्थिति अनिवार्य होती है।
चांदी का ठोस हाथी: विष्णु तथा लक्ष्मी को हाथी प्रिय रहा है इसीलिए घर में ठोस चांदी या सोने का हाथी रखना चाहिए। ठोस चांदी के हाथी के घर में रखे होने से शांति रहती है और यह राहू के किसी भी प्रकार के बुरे प्रभाव को होने से रोकता है।
कौड़ियां: पीली कौड़ी को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। कुछ सफेद कौड़ियों को केसर या हल्दी के घोल में भिगोकर उसे लाल कपड़े में बांधकर घर में स्थित तिजोरी में रखें। ये कौड़ियां धनलक्ष्मी को आकर्षित करती हैं।
चांदी की गढ़वी: चांदी का एक छोटा-सा घड़ा, जिसमें 10-12 तांबे, चांदी, पीतल या कांसे के सिक्के रख सकते हैं, उसे गढ़वी कहते हैं। इसे घर की तिजोरी या किसी सुरक्षित स्थान पर रखने से धन और समृद्धि बढ़ती है। दीपावली पूजन में इसकी भी पूजा होती है।
मंगल कलश: एक कांस्य या ताम्र कलश में जल भरकर उसमें कुछ आम के पत्ते डालकर उसके मुख पर नारियल रखा होता है। कलश पर रोली, स्वस्तिक का चिन्ह बनाकर उसके गले पर मौली बांधी जाती है।
पूजा-आराधना: दीपावली पूजा की शुरुआत धन्वंतरि पूजा से होती है। दूसरा दिन यम, कृष्ण और काली की पूजा होती है। तीसरे दिन लक्ष्मी माता के साथ गणेशजी की पूजा होती है। चौथे दिन गोवर्धन पूजा होती है और अंत में पांचवें दिन भाईदूज या यम द्वीतिया मनाई जाती है।
मजेदार पकवान: दीपावली के 5 दिनी उत्सव के दौरान पारंपरिक व्यंजन और मिठाई बनाई जाती है। हर प्रांत में अलग-अलग पकवान बनते हैं। उत्तर भारत में ज्यादातर गुझिये, शकरपारे, चटपटा पोहा चिवड़ा, चकली आदि बनाते हैं। इस दिन पूजन के पश्चात भगवान को घर में बने पकवानों या भोजन का भोग लगाकर ही परिवार सहित भोजन ग्रहण करें।
ज्योतिर्विद् वास्तु दैवज्ञ पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री मो. 9993874848
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भारत विश्वाकर्षण का केंद्र बन रहा है, माँ नर्मदा के तट पर बसे जाबालि ऋषि की तपोभूमि के साथ ही देश के मध्य में बसा हमारा जबलपुर देश भर में आकर्षण का केंद्र बने और जिसकी सबसे बड़ी ताकत हमारी सांस्कृतिक विरासत है। यह इच्छा साँसद राकेश सिंह नर्मदा के ग्वारीघात तट पर “नर्मदा तट में एक दीप – जबलपुर की समृद्धि के नाम” कार्यक्रम में व्यक्त की।
यह कार्यक्रम संतजनों की उपस्थिति में दीपावली की पूर्व संध्या साँसद राकेश सिंह के आह्वान पर 51 हजार दीपों को प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत नर्मदा आरती और अष्टक के साथ की गई। जिसके बाद शंखनाद और फिर स्वस्तिवाचन के साथ दीप प्रज्वलित किये गए। जिसमें नर्मदा तट ग्वारीघाट के आठों घाट जिनमें सिद्ध घाट, उमा घाट, नाग मंदिर घाट, पंडा घाट, नाव घाट, महिला घाट, दरोगा घाट, श्रीबाबाश्री घाट के साथ ही दूसरी ओर गुरुद्वारा के सामने के घाट में भी दीप प्रज्वलित किये गए। इसके बाद उपस्थित संतजनों का पूजन और स्वागत साँसद राकेश सिंह द्वारा किया गया।
साँसद सिंह ने कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति है, हम किसी भी पवित्र कार्य की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर करते है लेकिन कुछ वर्षों में शासनगत व्यवस्था के कारण हमारी प्राचीन परंपरा धीरे धीरे क्षीण हुई है। वर्तमान का समय सांस्कृतिक पुनरुथान का है और जब हम सांस्कृतिक पुनरुथान की बात करते है तो आज देश में वो परिस्थितियां है जिनकी हमे वर्षो से प्रतीक्षा थी। जैसे भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर अयोध्या जी मे बनने जा रहा है, कश्मीर धारा 370 के बंधन से मुक्त हो गया है, विकास की नई इबारत लिखी जा रही, पूरे देश में साधु संतों के आशीर्वाद से भक्तिमय और धर्ममय माहौल है।
जबलपुर की सांस्कृतिक पहचान बने: उन्होंने आगे कहा कि माँ नर्मदा के तट में रहने वाले हम लोग प्राचीन काल से ही उन्हें नमन करने आते रहे है और समय समय पर उनके तट पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए पर्व मानते आ रहे है और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की वजह से अपनी प्रसन्नता जाहिर करने के हमारे पास अब अवसर ज्यादा हैं। साँसद सिंह ने कहा इस वर्ष से दीपोत्सव जबलपुर का आयोजन हमने इस संकल्प के साथ किया है कि आने वाले वर्षो में हम इसकी निरंतरता और भव्यता बनाये रखेंगे और नर्मदा तट के किनारे का यह दीपोत्सव जबलपुर की सांस्कृतिक पहचान बनेगा। उन्होंने कार्यक्रम के उपरांत उपस्थित सभी संतजनों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक, सांस्कृतिक, धर्मिक संगठनों के के साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं की प्रति कार्यक्रम को भव्यता प्रदान करने आभार व्यक्त किया।
स्थानीय मिट्टी के कारीगरों से दिए खरीदे गए 51 हज़ार दिए: साँसद सिंह ने कहा हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूरे देश से लोकल फ़ॉर वोकल के लिए आह्वान किया था और उनके आह्वान पर हमने जबलपुर के स्थानीय मिट्टी के कारीगरों से दिए खरीद कर आज नर्मदा जी के तट में दीपोत्सव मनाया है और ऐसे आयोजन जबलपुर को समृद्ध भी करेंगे साथ ही हमारी सांस्कृतिक विरासत को मजबूत भी करेंगे।
दो दर्जन से अधिक संत रहे मौजूद: दीपोत्सव कार्यक्रम में संत जगतगुरु राघवदेवाचार्य, महामंडलेश्वर अखिलेश्वरानंद, दण्डीस्वामी कालिकानंद सरस्वती, नृसिंहपीठाधीश्वर डॉ नरसिंह दास, स्वामी गिरिशानंद सरस्वती, साध्वी विभानंद गिरी, साध्वी ज्ञानेश्वरी, स्वामी पगलानंद, स्वामी रामदास, स्वामी डॉ मुकुंददास, स्वामी चैतन्यानंद, डॉ राधे चैतन्य, स्वामी अशोकानंद, साध्वी सम्पूर्णा, साध्वी शिरोमणि, स्वामी राम भारती, सन्त केवलपुरी महाराज, स्वामी कालीनन्द जी, स्वामी रामशरण, श्री रामकृष्ण दास महाराज, स्वामी त्रिलोक दास, नागा साधु श्यामदास महाराज, स्वामी रामाचार्य महाराज, स्वामी राजेश दास, स्वामी मृतुन्जय दास मौनी बाबा, साध्वी लक्ष्मीनन्द सरस्वती, महन्त प्रकाशानंद ने अपना आशीर्वाद प्रदान किया।
कार्यक्रम में विधायक अशोक रोहाणी, अजय विश्नोई, सुशील तिवारी इंदु, नंदनी मरावी, विनोद गोंटिया, डॉ जितेंद्र जामदार, जिला पंचायत अध्यक्ष संतोष बरकड़े, प्रदेश कोषाध्यक्ष अखिलेश जैन, जीएस ठाकुर, रानू तिवारी, शरद जैन, अंचल सोनकर, हरेन्द्रजीत सिंह बब्बू, प्रभात साहू, सदानंद गोडबोले, स्वाति गोडबोले, नगर निगम अध्यक्ष रिंकू बिज, नेता प्रतिपक्ष कमलेश अग्रवाल, अभिलाष पांडे, राममूर्ति मिश्रा, अरविंद पाठक, पंकज दुबे, रत्नेश सोनकर, रजनीश यादव, भाजपा जिला पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष, पार्षदो के साथ बड़ी संख्या में सामजिक संगठनों के कार्यकर्ता और बीजेपी के पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित थे।
कल देश में के साथ-साथ प्रदेश और शहर में दीपावली का त्योहार मनाया जाएगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार घर-घर महालक्ष्मी माता पधारेंगी। इन्हीं मान्यताओं के मद्देनजर महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने पूरी संस्कारधानी को दूधिया रोशनी और विविध रंगों की रंगोली से सजवाया है। उनके मुताबिक आज मां लक्ष्मी घर घर जाकर संस्कारधानी के समस्त नागरिकों को धन-धान्य और उत्तम स्वास्थ्य का वरदान देंगी। महापौर ने दीपोत्सव पर्व को ध्यान में रखते हुए शहर के सभी प्रमुख चौराहों, बाजारों, मार्गों एवं भवनों को आकर्षक साज सज्जा और विविध रंगों की रंगोली से सजवाया है। जिसका उन्होंने आज शाम निरीक्षण भी किया और व्यवस्था की सराहना भी की। उन्होंने छोटी लाइन फाटक, गोरखपुर, सिविक सेंटर, तीन पत्ती, ब्लूम चौक, मदन महल, नौदराब्रिज, रसल चौक के साथ साथ अन्य चौराहों, बाजारों आदि क्षेत्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के अवसर पर महापौर ने कहा कि उनके ऊपर माता रानी की विशेष कृपा रहती है, मां नर्मदा, मां भगवती की प्रेरणा और उनसे मिली शक्ति के कारण ये सब मैं करवा पाया। उन्होंने बताया कि दीपावली का ये महापर्व हमारे संस्कारधानी के लोग सतरंगी खुशुबुओं के बीच दूधिया रोशनी में मनाएंगे और मां लक्ष्मी की विधि विधान से अपने घर आंगन में पूजा करेंगे।
इस अवसर पर महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने निर्धन परिवारों के बीच पहुंचकर उनके साथ पर्व की खुशियां बांटी। रोशनी के महापर्व दीपावली की पूर्व संध्या पर उन्होंने शहर के अनेक क्षेत्रों में पहुंचकर निर्धन और असहाय परिवारों के साथ पर्व की खुशियां मनाते हुए उन्हें आकर्षक उपहार प्रदान कर किए और उन्हें दीपावली पर्व की शुभकामनाएं दी। महापौर के अनुसार आज हम कह सकते हैं कि दीपोत्सव की पूर्व संध्या पर संस्कारधानी की धरती रंगों से सज गई है और आसमान रोशनी से जगमगा गया है। सतरंगी खुशबू से संस्कारधानी का कोना कोना सुगंधित है। संस्कारधानी के समस्त नागरिकों को आज फिर से दीपोत्सव पर्व की बधाई और शुभकामनाएं देता हूँ और मां लक्ष्मी से प्रार्थना करते हैं कि मां की कृपा सभी घरों और आंगन में बरसे।
लोग रोज़ी-रोटी की तलाश में घर से इतना दूर निकल जाते हैं कि कभी-कभी उनके लिए घर लौटना बड़ा मुश्किल हो जाता है। ऐसे में अगर कोई त्योहार हो तो घर की अहमियत और बढ़ जाती है। दीपवाली के मौके पर ऐसे ही 70 मजदूर घर लौटने की उम्मीद छोड़ चुके थे। लेकिन तभी जबलपुर पुलिस उनके लिए मसीहा बनकर पहुंची और उनकी घर वापसी करवायी।
मामला जबलपुर थाना मझोली अंतर्गत ग्राम उमरधा, खितौला, पडवार, खमरिया और थाना मझगवॉ अंतर्गत ग्राम खिरहनी के 70 मजदूरों का है। जो महाराष्ट्र के ज़िला सोलापुर थाना पंढरपुर अतंर्गत ग्राम सुस्ते और ग्राम हुनूर मजदूरी करने गये थे। लेकिन पैसों की कमी होने के कारण दीपावली त्योहार में गॉव वापिस नहीं आ पा रहे थे। मजदूरों के परिजनों के ने 70 मजदूरों के जिला सोलापुर में फंसे होने की सूचना विधायक अजय विश्नोई और थाना प्रभारी मझोली अभिलाष मिश्रा को दी।विधायक विश्नोई ने पुलिस अधीक्षक जबलपुर सिद्धार्थ बहुगुणा से सोलापुर में 70 मजदूरो के फंसे होने के सम्बंध मे चर्चा की और मदद के लिए कहा। वहीं थाना प्रभारी मझोली अभिलाष मिश्रा द्वारा भी तत्काल सूचना से जबलपुर पुलिस अधीक्षक , अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण शिवेश सिंह बघेल और एसडीओपी सिहोरा भावना मरावी को अवगत कराया गया। एसपी ने सूचना को गम्भीरता से लेते हुये तत्काल जिला सोलापुर पुलिस अधीक्षक तेजस्वी सतपुते से चर्चा करते हुये वस्तुस्थिति से अवगत कराया और तत्काल चौकी प्रभारी इंद्राना उप निरीक्षक ऋषभ सिंह बघेल, सहायक उप निरीक्षक रामसनेही पटेल, आरक्षक सुमित, थाना सिहोरा के आरक्षक मनोज की सोलापुर की टीम गठित कर महाराष्ट्र रवाना भेजी। ये टीम सोलापुर पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से 31 मजदूर ग्राम सुस्ते से और ग्राम हुनूर से 39 मजदूर को साथ लेकर रेल्वेस्टेशन पंढरपुर पहुंची। स्टेशन में इन 70 मजदूरों की भोजन इत्यादि की व्यवस्था करवाकर उसी परिसर में ही जी.आर.पी. और आर.पी.एफ. की मदद से रात्रि कालीन आराम की व्यवस्था भी की। इसके बाद जी.आर.पी. और आर.पी.एफ. की मदद से दीक्षा भूमि एक्सप्रेस से जबलपुर के लिये सभी मजदूरों को रवाना किया और सकुशल जबलपुर स्टेशन लेकर पहुंचे। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, एस.डी.ओ.पी. सिहोरा, थाना प्रभारी मझोली ने जबलपुर रेल्वे स्टेशन में फूलमाला पहनाकर पुलिस टीम और मजदूरों का स्वागत किया और सभी मजदूरों को बस में बैठाकर अपने-अपने गाँव भेजा। ये क्षण मजदूरों के लिए भी भावुक करने वाला था। उन्होंने उनकी मदद करने वाली जबलपुर पुलिस और विधायक विश्नोई को धन्यवाद दिया।
धनतेरस के दिन उस वक़्त परिवारों की आँखें नम हों गयीं जब उन्हें समस्त सुविधाओं से भरे मकान में गृह प्रवेश का मौका मिला। इस अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना में बने 4.51 लाख आवासों में गृह प्रवेश कर रहे परिवारों को शुभकामनाएँ दी हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि आज से दीपावली आरंभ हो रही है और इस शुभ दिन में लोग अपने आवासों में गृह प्रवेश करेंगे। इस कार्यक्रम का वर्चुअल शुभारंभ धनतेरस के दिन प्रधानमंत्री मोदी ने किया। प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री के संबोधन को आम जन ने लाइव टेलीकास्ट के माध्यम से सुना। ज़िले में सांसद राकेश सिंह और कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी ने गृह प्रवेशम कार्यक्रम के दौरान सालीवाड़ा ग्राम पंचायत भवन में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के संबोधन को सुना। साथ ही हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण किया। सालीवाड़ा ग्राम पंचायत के नीमखेड़ा में जवाहर लाल बर्मन व मुंशीलाल बर्मन के पीएम आवास में सांसद सिंह ने फीता काटकर गृह प्रवेश कराया और दीपावली की शुभकामनाएं दी। विदित हो कि ज़िले में आज साढ़े बारह सौ मकानों में गृह प्रवेश का कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम के दौरान जिला पंचायत के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी मनोज सिंह, सीईओ जनपद पंचायत, तहसीलदार, सरपंच सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। इसके साथ ही नीमखेड़ा में कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी ने स्थानीय लोगों की समस्याओं को सुना तथा उनके समुचित समाधान करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये।
आज जलाए जाएंगे 51 हज़ार दीये : सांसद सिंह ने कहा कि जबलपुर की समृद्धि के लिये 23 अक्टूबर की शाम 7 बजे ग्वारीघाट नर्मदा तट में 51 हजार दीपक जलाने का कार्यक्रम है जिसमें अधिक से अधिक संख्या में लोग सहभागी हों।
मौसमी बीमारियां हों या फिर लंबे समय से चला आ रहा कोई पुराना रोगा। कई बार देखने में आता है कि कई बीमारियां लाइलाज सी हो जाती है। ऐसा नहीं है कि उनका इलाज नहीं है लेकिन रोगी बार-बार उनसे पीड़ित होता है। एलर्जी हो सर्दी हो या फिर पेट से जुड़ी कोई समस्या कई बार इन बीमारियों का इलाज कई तरह की चिकित्सा पद्धति में भी नहीं हो पाता। ऐसे में रोगी तो परेशान होता ही है बल्कि ये छोटी सी बीमारियां मानसिक रूप से फ्रस्ट्रेशन भी हो जाता है। लेकिन ऐसी ही मौसमी और कई तरह की बीमारियों में कुछ पत्ते बेहद लाभकारी होते हैं।आइए जानते हैं किस तरह के पत्ते होते हैं ये और कैसे पहुंचाते हैं कई तरह की बीमारियों में राहत? नीम, तुलसी, बबूल, बड़ और बेर के पत्तों में कई औषधीय गुण होते हैं। ये पत्ते कई तरह की बीमारियों में घरेलू नुस्खों के तौर पर इस्तेमाल होते हैं। चर्मरोग से लेकर मंसूड़ों की समस्या और बालों के झड़ने की दिक्कत तक में ये पत्ते अंग्रेजी दवाओं से ज्यादा कारगर साबित होते हैं।
आइए इन पांच पत्तों के औषधीय फायदे जानते हैं
नीम का पत्ता बेहद लाभकारी होता है। अगर आप सुबह खाली पेट नीम के 10-12 पत्तियों को पीसकर पीते हैं तो आपको कभी चर्मरोग नहीं होगा। इसके अलावा, नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर सिर धोने से बाल झड़ने की समस्या भी खत्म हो जाएगी। झुओं की समस्या में भी नीम के पत्ते फायदेमंद होते हैं। तुलसी के पत्ते की चाय पीने से सर्दी-खांसी में आराम मिलता है। अगर आप रोज सुबह तुलसी के पत्ते की चाय पीते हैं या फिर नियमित तौर पर तुलसी के पत्ते खाते हैं तो आपको कई तरह की बीमारियों से छुटकारा मिलता है। नीम और तुलसी की ही तरह बबूल की पत्तियां भी बेहद लाभकारी होती हैं। बबूल की पत्तियों को पानी में उबालकर कुल्ला करने से दांत व मसूड़े मजबूत होते हैं। नीम की ही तरह बेर की पत्तियां भी बाल झड़ने की समस्या से निजात दिलाती हैं। बेर की पत्तियों व नीम की पत्तियों को बारीक पीसकर नींबू का रस मिलाकर बालों में लगाने से बाल मजबूत होते हैं और बाल झड़ने की समस्या भी दूर होती है। नीम और बेर की ही तरह बड़ भी बालों के झड़ने में लाभकारी होते हैं। बड़ के दूध में नींबू का रस मिलाकर सिर पर लगाने और फिर धो लेने से बाल झड़ने की समस्या दूर हो जाती है।
बीते दिनों शासकीय होम साइंस महिला महाविद्यालय में बीएससी पाठ्यक्रम की 200 छात्राओं के फेल होने के मामले में एनएसयूआई के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को जबलपुर पहुंचे शिक्षा मंत्री मोहन यादव को ज्ञापन सौंपा। जिसमें उन्होंने महिला महाविद्यालय की प्राचार्य पर लापरवाहीपूर्वक मूल्यांकन कार्य का आरोप लगाते हुए उन्हें हटाए जाने की मांग की।
इसके बारे में एनएसयूआई के अदनान अंसारी और देवकी पटेल ने अधिक जानकारी देते हुए बताया कि शासकीय होम साइंस महिला महाविद्यालय के परीक्षा परिणामों में गड़बड़ी के विरोध में लगातार एनएसयूआई प्रदर्शन कर रही है लेकिन प्राचार्य छात्र हित में कोई फैसला लेने के बजाय महाविद्यालय और आंदोलनकारी छात्रों पर ही कार्यवाही कर रहे हैं। साथ ही नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद भी अधिकारियों के सकारात्मक सहयोग ना मिलने के कारण छात्रों की परेशानियों का समाधान नहीं हो रहा है क्योंकि अध्यापकों को स्वयं नवीन शिक्षा नीति की जानकारी नहीं है। छात्र संघ शुल्क लिए जाने के बाद भी लंबे समय से छात्र संघ चुनाव नहीं आयोजित करवाए जा रहे जबकि प्रदेश में अन्य चुनाव आयोजित करवाए जा रहे हैं। इसके अलावा लंबे समय से गलत रोस्टर तैयार किए जाने के कारण रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के बैकलॉग के पद नहीं भर पा रहे हैं इसलिए रोस्टर का पुनः निर्धारण कर नियम अनुसार भर्ती शीघ्र की जाए।
प्रतिनिधिमंडल मे एनएसयूआई पूर्व प्रदेश महासचिव सागर शुक्ला, राष्ट्रीय समन्वयक देवकी पटेल, पूर्व जिला उपाध्यक्ष अदनान अंसारी, एजाज अंसारी, शफी खान, वाजिद कादरी, आकाश कुशवाहा, अंकित कोरी, शादाब अली, अभिषेक रजक, मौसम शिवहरे, सुमित कुशवाहा, राशि, सोनाली झारिया, कामिनी मिश्रा आदि मौजूद रहे।